
Wasim Akram Tyagi
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DIP Accredited Journalist. Tweets Are Personal, RTs No Endorsement. गलत बातों को सुनना और सुनकर हामी भर लेना, बहुत हैं फायदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता।
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जिस शख्स को पीटा जा रहा है, उसका नाम राहुल सिद्धार्थ है। राहुल सरकारी डॉक्टर हैं। वो अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से जा रहे थे, रास्ते में आवारा गाय आ गई, गाड़ी की टक्कर लगी और गाय मर गई। इसके बाद जो हुआ वो आपके सामने है। राहुल को हिंसक भीड़ ने बुरी तरह पीटा, उनकी गाड़ी को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। यह मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं का है। इस वीडियो में आप देखेंगे कि जब राहुल को पीटा जा रहा है, तो वहां पुलिस भी मौजूद है। इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो, जहां जानवर के नाम पर इंसान के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया जाता हो। इंसानों को जानवरों की तरह पीटा जाता हो। उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया बार-बार दंभ भरते हैं कि उन्होंने प्रदेश को मुक्त बनाया है, वो यह नहीं कहते कि उन्होंने अघोषित तौर पर दक्षिणपंथी धार्मिक कट्टरपंथियों को अराजकता और हिंसा करने का लाइसेंस दे दिया है। पुलिस की मौजूदगी में राहुल को पीटा जा रहा है। लेकिन मजाल भला कि पुलिस उसे बचाए। जबकि यही पुलिस अभियुक्तों के पैर में गोली मारकर उनका एनकाउंटर करने के लिए विख्यात हो चुकी है। लेकिन इस हिंसक झुंड के सामने पुलिस ऐसे बेबस हो, मानो वह अधिकार विहीन हो।
Wasim Akram Tyagi234,990 görüntüleme • 20 gün önce

ये लखनऊ का रीजनल पासपोर्ट ऑफिस है। यूपी के तमाम दूर दराज इलाकों से यहां लोग अपने पासपोर्ट संबंधित केस के लिए पहुंचते हैं। अब आप गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड का व्यवहार देखिए। प्रतापगढ़, अयोध्या, इलाहाबाद से आए लोगों को ऑप्वाइंटमेंट होने के बावजूद अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। जबकि नियम ये है कि एक एप्लीकेंट के साथ एक व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति होती है। लखनऊ आरपीओ अधिकारी को कम से कम अपने सिक्योरिटी गार्ड को शिष्टाचार ज़रूर सिखाना चाहिए। ज़ाहिर है लोग पासपोर्ट ऑफिस अपॉइंटमेंट लेकर आते हैं। कई सौ किलोमीटर दूर से आने वाले लोगों को अगर इस तरह लौटा दिया जा रहा है तो ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। PassportSeva Support Randhir Jaiswal
Wasim Akram Tyagi41,386 görüntüleme • 5 gün önce

पत्रकार Shuaib Raza | شعیب رضا ने टीएमसी के बाग़ी सांसद Yusuf Pathan ने सवाल किया कि क्या वह फिर से TMC के सम्पर्क में है? इस सवाल को युसूफ पठान बार-बार टालते रहे। और फिर आखिरकार उन्होंने कह ही दिया, “मैं नहीँ बोलूंगा।” सही भी है! बोलने लायक़ बचे भी कहाँ हो! बोलने लायक़ होते तो बोलते भी।
Wasim Akram Tyagi183,258 görüntüleme • 27 gün önce

सोचिए! यह आदमी ‘पत्रकार’ है। अब इसने क्या ही पत्रकारिता की होगी। OBC एससी समाज को लेकर इसकी सोच इतनी घृणित है, वह इस शख्स ने बता दिया है। यह शख्स अभी तक मुसलमानों को लेकर अनर्गल टिप्पणी करते हुए अपनी कुंठा का प्रदर्शन करता रहा है, अब इसके निशाने पर OBC और SC हैं। यह नफ़रती कुंठित जीव पानी को लेकर दलित समाज पर टिप्पणी कर रहा है। ध्यान रहे डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाड़ शहर में स्थित चवदार तालाब से अछूतों/दलितों को पानी पीने का अधिकार दिलाने के लिए यह ऐतिहासिक आंदोलन किया था। इस सत्याग्रह के दौरान, डॉ. अंबेडकर ने स्वयं तालाब के पानी को हाथ लगाकर पिया और हजारों लोगों ने उनके साथ पानी पीकर सदियों पुरानी छुआछूत की पाबंदी को तोड़ा। लेकिन यह कुंठित जीव कुछ और ही कहानी सुना रहा है।
Wasim Akram Tyagi31,663 görüntüleme • 5 gün önce
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मानवता को शर्मसार करने वाला यह वीडियो महाराष्ट्र के वसई का है। संदीप पवार नामी एक दरिंदे ने चार वर्षीय बच्चे को पूरी ताक़त से सड़क पर पटख दिया। बच्चे का नाम विघ्नेश है उसके पिता का संदीप के साथ विवाद चल रहा था। संदीप ने उसकी सज़ा चार वर्षीय मासूम को दी है।
Wasim Akram Tyagi609,240 görüntüleme • 5 ay önce

गुजरात के राजकोट में रहने वाले परवेज़ शेख ने साल 2015 में पाकिस्तान के कराची की रहने वालीं रेहाना से शादी की थी। शादी के बाद रेहाना अपनी ससुराल राजकोट आईं। परवेज़ और रेहाना के दो बच्चे हैं। अब पिछले चार सालों से रेहाना पाकिस्तान में फंसी हुई हैं। भारत सरकार उन्हें वीज़ा नहीं दे रही है। रेहाना के बच्चे राजकोट में हैं, और वो कराची में, इन सरहदों ने एक मां को उसके बच्चों से और एक पत्नी को उसके पति से अलग किया हुआ है। इसी देश में एक महिला अपने पति को छोड़कर अपने साथ तीन बच्चे लेकर पाकिस्तान से अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ कर जाती है। उसके पास ना वीज़ा होता है, ना पासपोर्ट लेकिन भारत सरकार ना तो उसके खिलाफ कोई एक्शन लेती है, ना उसे शरण देने वाले उसके ‘प्रेमी’ के खिलाफ कोई एक्शन लिया जाता है, और ना ही उसके ‘पैरोकार’ के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है। लेकिन जायज़ तरीका अख्तियार करने वाली मां सरहद पार तड़प रही है, इधर उसके बच्चे और पति तड़प रहे हैं। क्या Randhir Jaiswal PMO India इसका संज्ञान लेगा?
Wasim Akram Tyagi40,425 görüntüleme • 9 gün önce

जहां सांप्रदायिक तनाव होता है ये गुंडे वहीं नज़र आते है। जहां तनाव नहीं है, वहां पहुंचकर ये गुंडे तनाव पैदा करते हैं। खुद को धर्म के लड़ाके बताकर ये गुंडे गालियां देते हैं, विवादित एवं भड़काऊ बयानबाज़ी करते हैं। लेकिन मजाल भला कि मदर ऑफ डेमोक्रेसी की पुलिस इनके खिलाफ एक्शन ले पाए। अब ये गुंडे पुर्णिया सांसद पप्पू यादव को लेकर भड़काऊ बयानबाज़ी कर रहे हैं। गालियां दे रहे हैं। मुसलमानों पर विवादित एवं भड़काऊ टिप्पणी कर रहे हैं। यह सब दिल्ली में हो रहा है। Amit Shah के मातहत काम करने वाले CP Delhi #DilKiPolice और Delhi Police शायद ही इनके खिलाफ एक्शन ले पाए। मदर ऑफ डेमोक्रेसी की पुलिस कानून से नहीं बल्कि ‘मालिक’ के ‘आदेश’ से चल रही है।
Wasim Akram Tyagi114,676 görüntüleme • 1 ay önce

दिल्ली में जमुना सफाई के नाम पर प्रोपेगेंडा करने के लिए अब आईटी सेल के टुकड़ाखोरों को जमुना में उतारा गया है। अब आप इस वीडियो को देखिए! वीडियो में दिख आईटी सेल का टुकड़ा खोर जमुना का पानी पीने का प्रोपेगंडा कर रहा है। वह पानी लेता है, उसे गटकने का दिखावा करता है और फिर पानी पिए बगैर ही बहा देता है।
Wasim Akram Tyagi859,777 görüntüleme • 10 ay önce

इस ऑडियो में ग़ाज़ियाबाद के हिस्ट्रीशीटर Pinki Bhaiya का चेला सोनू शर्मा बताया जा रहा है। सोनू गाजियाबाद के खोड़ा में पिंकी चौधरी के संगठन का अध्यक्ष है। आरोप है कि सोनू ‘दूसरे’ समुदाय के युवक से रंगदारी मांग रहा है। POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD बताए कि इन अपराधियों को इतनी आज़ादी क्यों दी हुई है? इस सबका मास्टरमाइंड हिस्ट्रीशीटर पिंकी चौधरी नहीं तो कौन है? DGP UP की UP POLICE इसकी जांच करेगी?
Wasim Akram Tyagi61,442 görüntüleme • 21 gün önce
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वीडियो मे दिख रहे शख्स का नाम अशोक खरात है। यह महाराष्ट्रा के पुणे में रहता है, और खुद को ज्योतिष बताता है। यह “समस्या समाधान” के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाता था। महिलाओं को के बहाने से अपने ऑफिस बुलाता, फिर उन्हें नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर देता। इसके बाद गुप्त कैमरों से उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाता और फिर उन्हीं वीडियो के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करता था। यहां सिर्फ एक सवाल है और वो सवाल किसी सरकार या प्रशासन से नहीं है, बल्कि दक्षिणपंथी संगठनों से है कि वो इस दुराचारी के खिलाफ कब प्रदर्शन करेंगे? इस दुराचारी ने जिन महिलाओं के वीडियो बनाए हैं, क्या वो ‘दूसरे’ संप्रदाय की हैं? नहीं! तब इसके खिलाफ कब प्रदर्शन होगा? कब इसके बहिष्कार का आह्वान होगा? इसी पुणे में एक सप्ताह के भीतर दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों ने रोज़ा इफ्तार कर रहे रोज़ेदारों पर हमला करके उन्हें पीट-पीट कर लहुलुहान किया था। उससे पहले एक मुस्लिम शख्स के मुँह में गोबर दिया गया था। लेकिन इस घटना पर चुप्पी है! यह कैसा दोहरापन है?
Wasim Akram Tyagi417,576 görüntüleme • 5 ay önce

इस ‘नए भारत’ में जिन लड़ाकों को तैयार किया गया है, अब वो मैदान में उतर चुके हैं। नफ़रत की प्रयोगशाला में तैयार ये लड़ाके अब उन लोगों पर हमला कर रहे हैं जो प्रोटेस्ट करने वाले युवाओं का समर्थन कर रहे हैं। इस वीडियो में देखिए कि पहले एक नफ़रती चिंटू एक युवक पर हमला करता है, फिर वहां खड़े उसके गैंग के सदस्य उसे पीटना शुरू कर देते हैं। Amit Shah CP Delhi #DilKiPolice Delhi Police बताए कि इन अराजकतवादी तत्वों के खिलाफ कार्रावाई करेगी? या इनसे याचना करेगी?
Wasim Akram Tyagi109,042 görüntüleme • 1 ay önce

यूपी के देवरिया में मुबीन नामी एक पेंटर ने “या हुसैन” झंडा डिजाइन किया। इस झंडे पर “या हुसैन” जिस डिजाइन से लिखा गया था वह AK-47 के डिजाइन जैसा दिख रहा था। उसका वीडियो वायरल हुआ और देवरिया पुलिस ने मुबीन समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसी उत्तर प्रदेश के पाठ्यक्रम में G फॉर गन भी पढाया जाता है, क्या उसे भी अपराध माना जाएगा? इसी उत्तर प्रदेश में दक्षिणपंथी गैंग द्वारा हथियार बांटे जाते हैं, उस पर भी कोई कार्रावाई होती है? या कानून की सारी धाराएँ ‘दूसरों’ के लिए ही हैं?
Wasim Akram Tyagi23,239 görüntüleme • 7 gün önce

एक सावरकर थे। अंग्रेज़ों ने उन्हें जेल में डाल दिया। कुछ वर्ष जेल में रहने के बाद उन्होंने अंग्रेज़ों से माफी मांगी और खुद स्वतंत्रता आंदोलन से अलग कर लिया। इसके एवज में अंग्रेज़ उन्हें साठ रुपया महीना वेतन दिया करते थे। एक मौलाना मोहम्मद अली जौहर थे। मौलाना जौहर की माता जी से लेकर उनका पूरा परिवार स्वतंत्रता सेनानी था। इतिहास ने उन्हें ‘अली बंधु’ का नाम दिया है। वो अपनी आखिरी सांस तक आज़ादी के लिए संघर्ष करते रहे। मौलाना को मालूम नहीं था कि जिस वतन की आज़ादी के लिए वो संघर्ष कर रहे हैं, उसी वतन में एक रोज़ नफ़रत की सियासत के फायर ब्रांड नेता उन पर भी लांछन लगा देंगे। जब पड़ा वक्त वतन पर तो लहू हमने दिया अब आई है बहार तो कहते हैं तेरा काम नहीं!
Wasim Akram Tyagi42,040 görüntüleme • 16 gün önce

प्रतापगढ़ के रहने वाले स्वतंत्र टिप्पणीकार आलोक त्रिपाठी ने Congress सांसद Imran Pratapgarhi की तीखी आलोचना की है। आलोक का कहना है कि Rahul Gandhi Priyanka Gandhi Vadra को भी इसका संज्ञान लेना चाहिए कि उनकी पार्टी ने जिन्हें सांसद बनाया है, ग्राउंड पर उनकी कोई पकड़ ही नहीं है। खैर! आलोक को सुनिए!
Wasim Akram Tyagi131,756 görüntüleme • 1 ay önce

यह घटना यूपी के शामली के लिलौन गांव की है। लिलौन निवासी मोमीन के परिवार से इसी गांव का निवासी शिवम नामी एक शख्स रंजिश रखता है। रंजिश महज़ चुनावी है। लेकिन इस चुनावी रंजिश में शिवम ने ऐसी क्रूरता दिखाई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। बीते महीने मार्च की 10 तारीख को मोमीन के दो बच्चे घर से यह कहकर निकले कि वो खेलने जा रहे हैं। इन बच्चों को शिवम और उसके साथी नितिन और गोलू दोनों बच्चो को बहला फुसलाकर बडी नहर पर ले गए। आरोप है कि इन तीनों ने दोनों बच्चों को पहले बेरहमी से पीटा और फिर नहर में फेंक दिया, चूंकि एक बच्चा तैरना जानता था तो वह अपने छोटे भाई को भी किसी तरह नहर से निकाल लाया। इसके बाद शिवम और उसके साथियों तीनों ने दोनों बच्चों को अपने घर में बन्धक बना लिया, और उन्हें निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीट। बच्चों के साथ हो रहे अमानवीय एवं क्रूरता की सूचना पाकर मोमीन मौके पर पहुंचे, तो शिवम और उसके साथियों द्वारा उनके साथ भी गाली गलौज की गई। जिसके बाद मोमीन द्वारा Call 112 पर कॉल कर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। आरोप है कि पुलिस द्वारा आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रावाई नहीं हुई है। अब यहां से कई सवाल हैं। क्या DGP UP की UP POLICE बच्चों के साथ अमानवीय एवं क्रूर रवैया अपनाने वाले शिवम और उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त ऐसी कार्रावाई करेगी जो नज़ीर बने? इस घटना को एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन आरोपितों पर कोई कार्रावाई तक नहीं हुई है, ऐसा क्यों? Yogi Adityanath की Government of UP में बच्चों के साथ क्रूरता करने वालो के साथ पुलिस इतना ढुल मुल रवैया क्यों अपनाए हुए है। इस मामले का NCPCR को संज्ञान लेना चाहिए, दोषियों को ऐसी सज़ा मिले जो नज़ीर बन जाए।
Wasim Akram Tyagi279,004 görüntüleme • 4 ay önce

इज़रायल की जीत के लिए कहीं हवन हो रहा है, कहीं कुछ हो रहा है। लेकिन मैं एक बात बताना चाहता हूँ, पूरे ईरान में कहीं गाय नहीं खाई जाती, लेकिन इजरायल में कोई दस्तरख्वान ऐसा नहीं है, जहां गाय नहीं खाई जाती हो। तो जहां तुम्हारी माता को चबा-चबा कर खाया जाता है, उसे तुम फादर लैंड कह रहे हो। मौलाना कल्बे जव्वाद
Wasim Akram Tyagi296,954 görüntüleme • 5 ay önce

गुजरात के अहमदाबाद का यह परिवार लंदन से अहमदाबाद ईद उल अज़हा मनाने आया था। आज ही इस परिवार के अपने उन्हें एयरपोर्ट पर विदा करने आए थे। उन्हें क्या ख़बर थी कि उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही, एक हादसा उनका सबकुछ बर्बाद कर देगा। #Planecrash | #AirIndia | #AhemdabadPlaneCrash
Wasim Akram Tyagi721,660 görüntüleme • 1 yıl önce

यूपी में दो बहनों ने इस्लाम धर्म अपना लिया था, जिसके बाद दोनों को परिवार ने बंधक बना लिया। दोनों बहनों ने 2020 और 2021 में धर्मांतरण किया था। अब युवतियां हाईकोर्ट पहुंची, हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस संदीप जैन ने दोनों युवतियों को आज़ाद करने आदेश देते हुए 25 लाख रुपया मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया है।
Wasim Akram Tyagi41,039 görüntüleme • 21 gün önce

इस मंच पर तक़रीर करने वाले ‘मुक़र्रिर’ को देखिए, सुनिए! फिर यह भी देखिए कि जब यह तक़रीर की जा रही थी तब ‘मुक़र्रिर’ क्या था! और आज क्या है। जिस शख्स को मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी, उस शख्स के परिवार पर ग़म का पहाड़ टूटा है, और यह एक बार नहीं कई बार हुआ है। सवा तीन साल पहले उस परिवार में 24 घंटे के भीतर तीन जनाज़े उठे, जिसमें एक जनाजा उस शख्स का भी था, जिसे इस मुक़र्रिर ने ‘बाप की हैसियत’ दी थी। बाकी दो जनाज़े उस शख्स के भाई और बेटे के थे। लेकिन वह मुक़र्रिर उस वक्त भी उन जनाजों पर सार्वजनिक तौर पर शोक प्रकट भी नहीं कर पाया था। बीते रोज़ उसी परिवार का एक और सदस्य सुपुर्द-ए-खाक हुआ है। लेकिन मजाल भला कि यह मुक़र्रिर जो अब ‘सांसद’ भी है वह उस दुर्घटना पर सार्वजनिक तौर पर ग़म का इज़हार भी कर पाता। जब कांधों पर चढ़कर ‘बड़ा’ बनना था, तब भरे मंच से उस शख्स को ‘बाप’ बता दिया था। और जब बारी कांधा देने की आई तो ‘बेख़बरी’ की चादर तान ली। क्यों? क्या यह ‘डर’ था कि इससे राजनीतिक ‘तरक्की’ रुक सकती? माना हालात ‘अच्छे’ नहीं हैं, लेकिन इतने भी बुरे नहीं हैं कि किसी ‘अपने’ की मौत पर ग़म का इज़हार भी ना कर सकें।
Wasim Akram Tyagi43,906 görüntüleme • 23 gün önce