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Census data is safe, secure, and fully confidential. It is never shared with any agency. Don’t believe rumours—be part of the Census. Our Census, our development. जनगणना की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय होती है। इसे किसी भी संस्था के साथ साझा नहीं किया जाता। अफवाहों से दूर...

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आज राज्यसभा के शून्य काल में जनगणना में देरी का मुद्दा उठाया - 1. हमारे देश में हर 10 साल पर होने वाली जनगणना 1881 में शुरू हुई थी। तमाम आपात हालात, युद्ध और दूसरे संकट आए लेकिन ये काम जारी रहा। 2. 1931 की जनगणना के दौरान जातिगत जनगणना भी कराई गई थी। इस जनगणना के पहले गांधीजी ने कहा था कि –“जैसे अपने शरीर की पड़ताल के लिए हमें periodical मेडिकल examination कराना पड़ता है, उसी तरह जनगणना किसी राष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण होती है।” 3. जनगणना बहुत महत्व का काम होता है। इसमें काफी बड़ी तादाद में लोग लगते हैं। उनको population के आंकड़ों समेत employment, family structures, Socio-economic condition और कई key parameters पर Data collect करना होता है। 4. दूसरे विश्वयुद्ध और 1971-72 में भारत-पाक युद्ध के बावजूद भी उस समय जनगणना हुई थी। इतिहास में पहली बार सरकार ने जनगणना में रिकार्ड देरी की है। 5. आपको जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी करानी चाहिए। क्योंकि आप SC और ST का Data Collect करते ही हैं, अन्य जातियों का भी कर सकते हैं। लेकिन जातिगत जनगणना और जनगणना दोनों पर सरकार मौन है। जनगणना के लिए इस साल के बजट में भी केवल 575 करोड़ रुपये का आवंटन है। 6. दुनिया के 81% देशों ने इस बीच में कोरोना के बावजूद successfully जनगणना का काम पूरा कर लिया है। 7. जनगणना में देरी के दूरगामी परिणाम होते हैं। तमाम बुनियादी आंकड़ें नहीं होने के कारण तुगलकी नीतियां बनती हैं। 8. Consumer Survey, National Family Health Survey, Periodic Labour Force Survey, National Food Security Act और National Social Assistance Programme सहित कई महत्वपूर्ण Survey और कल्याणकारी कार्यक्रम जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर करते हैं। 9. इस देरी के कारण करोड़ों नागरिक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। नीति निर्माताओं के पास अहम फैसला लेने के लिए जरूरी और भरोसेमंद Data नहीं है। 10. इसलिए मैं सरकार से यह निवेदन करता हूं कि तत्काल जनगणना और जातिगत जनगणना का काम शुरू होना चाहिए।

Mallikarjun Kharge

63,532 次观看 • 1 年前

• हमारे देश में हर 10 साल पर होने वाली जनगणना 1881 में शुरू की गई थी। तमाम संकट आए लेकिन ये काम जारी रहा। • 1931 की जनगणना के दौरान जातिगत जनगणना भी कराई गई थी। इस जनगणना से पहले महात्मा गांधी जी ने कहा था कि 'जैसे अपने शरीर की पड़ताल के लिए Periodical medical examination करना पड़ता है, उसी तरह जनगणना किसी राष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण होती है।' • जनगणना बहुत महत्वपूर्ण काम होता है, इसमें काफी बड़ी तादाद में लोग लगते हैं। उनको जनसंख्या के आंकड़े employment, family structures, socio-economic conditions और कई Key parameters की पड़ताल करनी होती है। • दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और 1971-72 में भारत-पाक युद्ध के बावजूद जनगणना हुई थी, लेकिन बहुत दुख की बात है कि इतिहास में पहली बार सरकार ने रिकॉर्ड देरी की है। • जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी संभव है, क्योंकि सरकार SC/ST के डाटा जुटाती ही है। ऐसे में अन्य जातियों का डाटा भी जुटा सकते हैं, लेकिन जातिगत जनगणना और जनगणना दोनों पर यह सरकार मौन है। • दुनिया के 81% देशों ने कोरोना के बावजूद जनगणना का काम पूरा कर लिया है। भारत में जनगणना कब होगी, इस पर साफ तौर से कुछ भी नहीं कहा जा रहा है। इस साल बजट में केवल 575 करोड़ रुपए का आवंटन है। इससे लगता है कि सरकार जनगणना कराने से बचना चाहती है, लेकिन जनगणना में देरी के दूरगामी परिणाम होते हैं। • तमाम बुनियादी आंकड़ों की गैर-मौजूदगी में यह तुगलकी नीति बनती जाती है। Consumer Survey, National Family Health Survey, Periodic Labour Force Survey, National Food Security Act और National Social Assistance Programme सहित कई महत्वपूर्ण सर्वेक्षण और कल्याणकारी कार्यक्रम जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर करते हैं। • लंबी देरी के कारण लाखों नागरिक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। नीति निर्माताओं के पास आम फैसला लेने के लिए जरूरी और भरोसेमंद डाटा नहीं है। सटीक जानकारी के बिना आप कोई नया काम ठीक से नहीं कर सकते। इसलिए मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि तत्काल जनगणना और जातिगत जनगणना का काम शुरू होना चाहिए। Mallikarjun Kharge जी

Supriya Shrinate

16,745 次观看 • 1 年前

राहुल गांधी जी ने कल सभी को कांग्रेस पार्टी के सामाजिक न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण के एजेंडा से अवगत कराया है। हमारी तीन मांग थी 👇 • जातिगत जनगणना • आरक्षण में 50% सीमा ख़त्म की जाए • अनुच्छेद 15(5) को लागू किया जाए 24 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और उस बैठक के बाद एक प्रेस नोट निकाला गया जो कि PIB वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इसमें लिखा था कि- The Union Cabinet chaired by Prime Minister Shri Narendra Modi has approved the proposal for conducting the Census of India 2021 at a cost of ₹8,254 crores. It includes three components: house listing, housing census, and population enumeration. यही तीन बातें इस प्रेस रिलीज में शामिल हैं और इसमें कहीं भी जाति शब्द का जिक्र नहीं है, लेकिन कल अप्रत्याशित तरीक़े से यह बताया गया कि जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल होगी। : कांग्रेस महासचिव (संचार) श्री Jairam Ramesh

Congress

14,290 次观看 • 1 年前