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Super Exclusive- CBI देख रही थी! यूपी टू झारखंड बड़ा ख़ुलासा झारखंड की परीक्षाओं में खेल करने वाली यूपी वाली कंपनी की जांच शुरू कर चुकी थी CBI। प्रारंभिक जांच यानि PE दर्ज की जा चुकी थी। प्रारंभिक जांच (PE) का नंबर था- PE0062023A0002 कुछ ही दिनों में सीबीआई...

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Super Exclusive- झारखंड में जो बवाल है! यूपी वाली कंपनी का कमाल है!! यूपी की विधानसभा और विधानपरिषद में हुई नियुक्तियों में गंभीर धांधलियों के आरोपों की दागी कंपनी आखिर झारखंड कैसे पहुंची? कैसे झारखंड लोकसेवा आयोग से लेकर स्टाफ सेलेक्शन कमीशन, फॉरेस्ट आदि परीक्षाओं का ठेका लिया? यूपी की विधानसभा और विधानपरिषद की जिस परीक्षा में हर पांचवी नियुक्ति, नेताओं और अधिकारियों के लड़के-बच्चों की हुई, ऐसी परीक्षा कराने वाली कंपनी पर कौन मेहरबान था? सोचने वाली बात ये भी है कि इस दागी कंपनी द्वारा कराई गई परीक्षा से हुई भर्ती के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश हो गए थे। फिर इस आदेश को रोकने सुप्रीम कोर्ट क्यूं पहुंची यूपी की मशीनरी? आखिर सीबीआई जांच से यूपी में किसे डर था? जब लखनऊ में हो रहा था इतना बड़ा खेल, सरकार का ध्यान किधर था? पूरी खबर TOP SECRET

abhishek upadhyay

39,552 Aufrufe • vor 20 Tagen

ब्रेकिंग न्यूज़ लखनऊ भारत समाचार की खबर के बाद यूपी सरकार में हड़कंप। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास अनिल सागर हटाए गए। सीबीआई जांच से बचने के लिए सरकार सागर को हटाया। सागर पर हाइकोर्ट सख्त थी, CBI जांच संभावित थी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना ऑथरिटी में भ्रष्टाचार हाइकोर्ट ने एफिडेविट में पकड़ लिया था भ्रष्टाचार। लंबे समय से सागर इंडस्ट्री में सागर की तैनाती थी। बिल्डर्स के प्रोजेक्ट मंजूरी में शासन में भ्रष्टाचार जस्टिस पंकज भाटिया ने सरकार को चेताया था सागर पर एक्शन नहीं तो सोमवार को CBI जांच सरकार ने रास्ता निकाला, जांच से बचे, सागर हटे। 10दिन में 3 एक जैसे मामलों में अलग अलग आदेश थे भारत समाचार ने हाइकोर्ट प्रोसीडिंग्स का खुलासा किया था ताकतवर IAS अनिल सागर वेटिंग में डाले गए। #BreakingNews | #Lucknow | Yamuna Authority | #LucknowHighCourt | CM Office, GoUP @ChiefSecy_UP Central Bureau of Investigation (India)

भारत समाचार | Bharat Samachar

16,992 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज मैं एक पत्रकार की हैसियत से उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ जी की मुजफ्फरनगर में जनसभा को कवर करने के लिए बहुत दूर से पहुंचा था, लेकिन मुझे पुलिस ने ग्राउंड के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया क्योंकि मैंने काली शर्ट पहनी थी और पुलिस के मुताबिक़ जनसभा में काला कपड़ा ले जाने, पहनकर आने की अनुमति नहीं, दूर से आने वाली उन महिलाओं और छात्र- छात्राओं को भी रोका गया जिनके सिर या गले में काला दुपट्टा था या लॉ के छात्रों के पास ब्लैक कोट या बंडी थी। मैं असमंजस में हूँ कि काला कपड़ा, दुपट्टा, शर्ट, टी शर्ट की आखिर इस जनसभा में अनुमति क्यों नहीं थी और अन्य रंगों की ही अनुमति क्यों थी?

Zakir Ali Tyagi

92,442 Aufrufe • vor 4 Monaten

लोक सभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान मैने राजस्थान में विभिन्न सरकारी भर्तियों के हुए पेपर लीक के मामलों को उठाते हुए पुलिस उप -निरीक्षक भर्ती में 50 ट्रेनी SI गिरफ्तार होने की तरफ केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया और इस भर्ती को रद्द करने की मांग उठाई,राजस्थान की भाजपा सरकार जब विपक्ष में थी तब ऐसे मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की बात कहती थी मगर सत्ता में आते ही इस बात को भूला दिया क्योंकि पूर्ववती कांग्रेस सरकार के समय कई बड़े लोगों की भूमिका युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने में थी मगर पर्दे के पीछे बैठे पेपर माफियाओं को बचाने के लिए हाल ही में हुए राजस्थान विधानसभा के उप -चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से गठबंधन कर लिया | इस चर्चा में मैने राजस्थान की विभिन्न भर्तियां के पेपर आउट होने के मामलों का भी जिक्र किया |

HANUMAN BENIWAL

36,592 Aufrufe • vor 1 Jahr

लखनऊ में पहले पत्नी, फिर बहन की गोली मार हत्या और फिर खुद को गोली मारने वाले मानस बाजपेयी की पूरी कहानी। एक साल से तलाक का केस चल रहा था। कल यानी 21 अगस्त को कोर्ट में तलाक केस पर सुनवाई थी। पत्नी पर शक था। उसे लगता था पत्नी धोखा दे रही है। इसलिए पत्नी को बैंक के बाहर बुलाकर गोली मार दी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि मानस बाजपेयी ने अपनी बहन को क्यों गोली मारी। क्यों हनुमान चालीसा तेज साउंड में बजाकर बहन की हत्या की। इस पूरे एपिसोड में बहन की क्या गलती थी। इस क्राइम की इनसाइड स्टोरी इस वीडियो से समझिए। असल में मानस की बहन मानसिक रूप से कमजोर थी। माता-पिता दोनों की पहले ही मौत हो चुकी थी। इसलिए बहन की जिम्मेदारी मानस के पास थी। दोनों पिछले काफी समय से एक साथ गोमती नगर में किराए के कमरे में रह रहे थे। जबकि मानस की पत्नी दिव्या मिश्रा अलग रह रही थी। दिव्या मिश्रा की बहन यूपी की जानी मानी पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा हैं। मानस बाजपेयी ने मरने से पहले वॉट्सऐप स्टेटस में पत्नी की बहन यानी प्रज्ञा के बारे में लिखा है कि उन्हें हमारे मैटर के बारे में पूरी जानकारी थी। फिलहाल, अभी सभी एंगल पर लखनऊ पुलिस जांच कर रही है। लेकिन इस हत्या और खुद जान देने का राज मानस बाजपेयी के उसी वॉट्सऐप स्टेटस में छुपा है। #up #upnews #lucknow #murder #crime #pragyamishra #divyamishra

Sunil Maurya

86,457 Aufrufe • vor 10 Tagen

योगी जी का क्राइसिस मैनेजमेंट तगड़ा है! यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा यूपी में बिजली कटौती को लेकर कहा हमने पिछली सरकार से बिजली आपूर्ति दुगना किया है। यूपी में कल के डेट में 13 हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति हुई है। बिजली की डिमांड पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदी गयी है।यूपी ने इस क्राइसिस में बहुत अच्छा काम किया है। विपक्ष ने पेट्रोल और बिजली को लेकर प्रोपोगेंडा फैलाया था।मगर जनता सरकार के साथ है। योगी जी के फटकार के बाद प्रदेश में बिजली आपूर्ति में बड़ा सुधार हुआ है। पहले की तरह लापरवाही नही हो रही है हालाकि गांवों में अब भी बिजली आपूर्ति में सुधार की जरूत है।

Suresh Singh

23,839 Aufrufe • vor 3 Monaten

विवादास्पद मैगज़ीन ‘तहलका’ के एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल जी को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा खंडपीठ द्वारा 2013 के बलात्कार के एक आरोप में दोषी पाया गया और उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। ये वही बिजनेस हाउस है, जिसने विचित्र प्रकार का स्टिंग ऑपरेशन किया था। जब अटल जी की सरकार ने जस्टिस फूकन की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया, तो यह एक ऐसा अवसर था, जब स्टिंग करने वाले ग्रुप ने पूरे टेप्स को वैरिफाई करने के लिए देने से मना कर दिया। इससे ज्यादा संदेह उत्पन्न नहीं हो सकता। और जब जांच की रिपोर्ट आई, तब तक सरकार बदल चुकी थी और कांग्रेस सरकार ने उस जांच रिपोर्ट को सदन के पटल पर कभी रखा ही नहीं। भाजपा सरकार द्वारा विषय उठाने पर 41 पेज की समरी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई। - डॉ Dr. Sudhanshu Trivedi पूरा देखें:

BJP

63,321 Aufrufe • vor 21 Tagen

आज विधानसभा के प्रश्नकाल में पेपर लीक से जुड़े अहम मामलो को लेकर मेरा पहला सवाल सूचीबद्ध था,दुर्भाग्य इस बात का है की सत्ता में आसीन भाजपा ने पेपर लीक जैसे महत्पूर्ण मामलो की जांच सीबीआई से करवाने के स्थान पर SIT गठन करके लीपापोती कर दी और मेरे द्वारा जब पेपर लीक के मामलो की सीबीआई से जांच करवाने को लेकर सरकार की मंशा जानना चाहा तो उसका कोई स्पष्ट जवाब मंत्री जी के पास नही था ! पेपर लीक के दर्जनों मामलो की वजह से राजस्थान के मेहनतकश युवाओं के सपनों के साथ चोट हुई और युवा वर्ग ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को चुनने में भागीदारी निभाई और उन्हें उम्मीद थी नई सरकार उनके साथ न्याय करेगी लेकिन आज सदन में BJP सरकार के जवाब यह स्पष्ट कर दिया की वर्तमान सरकार भी पूर्ववती कांग्रेस सरकार की भांति लीपापोती ही करेगी ! सरकार ने SIT गठित की मगर SIT ने आज तक उन लोगो से पूछताछ तक नही जिन पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष में रहते हुए आरोप लगाए !

HANUMAN BENIWAL

84,760 Aufrufe • vor 2 Jahren

सुप्रीम कोर्ट में CBI डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर हुई सुनवाई ने एक बार फिर मोदी सरकार की संस्थाओं पर कब्ज़े की राजनीति को उजागर कर दिया। जिस व्यवस्था में विपक्ष के नेता की भूमिका सिर्फ “औपचारिक” बनाकर छोड़ दी जाए, वहां निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है? CBI जैसी देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी और CEC जैसी संवैधानिक संस्था की नियुक्तियों में अगर सरकार का ही पूरा नियंत्रण दिखे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। तीन सदस्यीय कमेटी में प्रधानमंत्री, उनका ही मंत्री और विपक्ष का नेता, यह चयन प्रक्रिया कम और सरकारी प्रभाव ज्यादा लगती है। कल सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह सरकार से तीखे सवाल पूछे, उसने साफ कर दिया कि लोकतंत्र में संस्थाएं सरकार की “प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” नहीं होतीं। संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, और उस पर किसी भी तरह का राजनीतिक कब्ज़ा देश के लिए खतरनाक संकेत है। CBI देश की जांच एजेंसी है, BJP का राजनीतिक हथियार नहीं। और CEC किसी सरकार की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए होता है। लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब संस्थाएं सत्ता के दबाव से नहीं, संविधान के अनुसार चलें।

Alok Sharma

19,570 Aufrufe • vor 3 Monaten

CBI द्वारा IAS पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी से बीजेपी का भ्रष्ट चेहरा बेनकाब हो गया है। इस अधिकारी ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के इशारे पर कांग्रेस के वोट रद्द करके बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को जिताने की पुरजोर कोशिश की थी। जैसा मैंने उसी रोज आधी रात को प्रदेशवासियों को बताया था कि इस घटना ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में रिटर्निंग अधिकारी अनिल मसीह द्वारा सरेआम पार्षदों की वोट चोरी की याद ताज़ा कर दी। बीजेपी सरकार ने तो भ्रष्टाचार में लिप्त इस भ्रष्ट अधिकारी पर कार्रवाई का डर दिखाकर अपने राजनीतिक हितों को साधने का काम किया। बीजेपी सरकार ने तो इस भ्रष्ट अधिकारी का लाभ उठाकर इसे सिंचाई, जल संसाधन, खनन एवं भूविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विभाग देकर पुरस्कृत कर दिया था। लेकिन IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला इतना बड़ा था, जिसको नजरंदाज करना सीबीआई के लिए संभव नहीं था। सीबीआई कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारी और बीजेपी की मिलीभगत के इस घिनौने खेल का पर्दाफ़ाश हो गया। हरियाणा का जनमानस चाहता है कि सीबीआई इस बात की भी जांच करे कि राज्य सभा चुनाव में इस भ्रष्ट अधिकारी ने कांग्रेस के वैलिड वोट रद्द करने के एवज में बीजेपी समर्थित धनकुबेर उम्मीदवार से कितनी रिश्वत ली।

Deepender Singh Hooda

91,942 Aufrufe • vor 2 Monaten

असलियत यह है कि👇 ⦿ सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को प्रपोजल भेजा था कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ को अरावली रेंज से हटा दिया जाए ⦿ पहले सुप्रीम कोर्ट की कमेटी होती थी, जो माइनिंग की निगरानी रखती थी, लेकिन मोदी सरकार ने उसे भंग कर दिया और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस प्रपोजल को भेजा गया ⦿ ख़बरों के मुताबिक- अभी तक 50 नई माइनिंग को परमिशन मिल चुकी है ⦿ 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने उन माइंनिग के Extension को रोक दिया था, जो माइंनिग अरावली के पास पहुंच गई थी, लेकिन BJP की राजस्थान सरकार ने कहा है कि अगर आपको Extension चाहिए तो फीस भरिए और 2010 में बंद हुई माइनिंग को खोल दिया : Indian Youth Congress अध्यक्ष Uday Bhanu Chib जी 📍 दिल्ली

Congress

14,078 Aufrufe • vor 8 Monaten

योगीभक्त अफसर के घड़ियाली आंसू! #मऊ का प्रशांत कुमार सिंह GST की नौकरी में आने से पहले ट्यूशन पढ़ाता था. ख्वाब थे राजनीति में विधायक बनने के. समाजवादी पार्टी के "मैनेजर नेता" अमर सिंह का कनपकड़ू चेला रहा. फिर फ्रोड करके नौकरी पा गया. नौकरी हासिल करने के लिए आंख से विकलांग होने का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और विकलांग कोटे से नौकरी हासिल की. चचेरे भाई विश्वजीत ने प्रशांत सिंह की 5 साल पहले शिकायत की. "रामराज्य सरकार" में पाखंडी के प्रभाव से जांच दबा दी गई. विश्वजीत कोर्ट चला गया. कोर्ट ने पिछले दिनों मऊ के CMO को इस मामले में जांच के आदेश दिए. CMO के बार-बार नोटिस देने के बाद भी प्रशांत कुमार सिंह मेडिकल के लिए नहीं पहुंचे है आज लोहा गर्म देखा. एक तरफ शंकराचार्य का क्रोध और दूसरी ओर UGC की अग्निपरीक्षा. योगी और मोदी की सरकारें चक्रव्यूह में फंसी थी. दोनों सरकारों को मुश्किल से उबारने के लिए पाखंडी अफसर उंगली कटाकर शहीद बनने चला था. नौकरी से तिलांजलि देकर बलिदानी बनने की हसरत थी. खुद को योगी आदित्यनाथ का भक्त और नमक हलाल बताया और रोने का नाटक करके इस्तीफे का ऐलान कर दिया. शासन अब इस ढोंगी के जांच कराए. बरेली वाले अग्निहोत्री की तरह इसे भी सस्पेंड करे. बंगला खाली कराए और विभागीय जांच के बाद इसे जेल भेजे.

Narendra Pratap

52,542 Aufrufe • vor 7 Monaten