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ईमानदारी की बुनियाद बड़ी मज़बूत होती है। भाजपा सपा से कुछ तो सीखे।
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पहली बात तो ये कि तुम्हारे दावों पर यकीन कैसे करें, कैमरा दिखा रहा है सिर्फ एक गड्ढा और उसके ऊपर का कुछ सीमेंटेड सा कॉन्स्ट्रक्शन जैसा है। इसलिए ये तो पता ही नहीं लग रहा कि ये साइकिल ट्रैक है या क्या। दूसरी बात इस देश में साइकिल ट्रैक बनाने का मतलब क्या है भई। कितना प्रैक्टिकल था ये फैसला। कौन चलता है साइकिल ट्रैक पर। तुम्हारे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता कितनी चले हैं बताओ। साइकिल ट्रैक का प्लान सिर्फ पैसा कमाने के लिए किया तुमने। तुम्हारे साइकिल ट्रैक बनाने से सड़कों की चौड़ाई कम हो गई, ट्रैफिक जाम लग गया। ऐसे तुगलकी आदेश को योगी सरकार ने इसी लिए तुरंत खारिज़ किया। तुमने साइकिल ट्रैक बना दिए लेकिन तुम्हारे ही लोगों ने उन ट्रैक्स पर कब्जा करके दुकानें खोल लीं। वो सारे लोग तुम्हें ही वोट देते हैं। तो क्या तुम्हें मालूम नहीं था कि हिंदुस्तान की पब्लिक इस तरह के thoughts के लिए नहीं है। ये कॉन्सेप्ट तुम लंदन से ले आए, लेकिन ये नहीं देखा कि ये फैसला यूपी में करना कितना प्रैक्टिकल है, इन ट्रैक्स की देखभाल तुम्हारे ही समय में खत्म हो गई थी। अगर कोई चीज बनाई थी, तो तुम्हारा तंत्र उसकी देखभाल क्यों नहीं कर पाया। एक किलोमीटर के ट्रैक पर 1.50 करोड़ का खर्चा आया। इटावा सफारी से आगरा तक का साइकिल ट्रैक बना दिया, कौन चलता है उस पर , ये पता किया क्या तुमने। तो ये सारे शोशे जो तुमने छोड़े वो पैसे कमाने के लिए। अपनी पसंद के यादव, मुसलमान ठेकेदारों को ठेके बांट दिए और जम कर सबने मलाई लूटी। तुमने सोचा था इसी बहाने तुम्हारे चुनाव चिह्न साइकिल का प्रचार हो जाएगा। तो ज़रा शर्म करो, तुम्हारे जिस प्रोजेक्ट को देखने भर से पता चल रहा है कि पैसे लूटने के लिए शुरु किया था, उस प्रोजेक्ट की तारीफ अपने अनपढ़ चेलों से करवा रहे हो। बदल दो अपनी सोशल मीडिया टीम, उसके “अखिलेश भइया”, उसके बोलने से पता चलता है कि समाजवादी युवजन सभा वाला है, जात पर लाठी लेकर खड़ा होने वाला।

अखिलेश नींद से जागिये पहली बात तो ये कि तुम्हारे दावों पर यकीन कैसे करें, कैमरा दिखा रहा है सिर्फ एक गड्ढा और उसके ऊपर का कुछ सीमेंटेड सा कॉन्स्ट्रक्शन जैसा है। इसलिए ये तो पता ही नहीं लग रहा कि ये साइकिल ट्रैक है या क्या। दूसरी बात इस देश में साइकिल ट्रैक बनाने का मतलब क्या है भई। कितना प्रैक्टिकल था ये फैसला। कौन चलता है साइकिल ट्रैक पर। तुम्हारे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता कितनी चले हैं बताओ। साइकिल ट्रैक का प्लान सिर्फ पैसा कमाने के लिए किया तुमने। तुम्हारे साइकिल ट्रैक बनाने से सड़कों की चौड़ाई कम हो गई, ट्रैफिक जाम लग गया। ऐसे तुगलकी आदेश को योगी सरकार ने इसी लिए तुरंत खारिज़ किया। तुमने साइकिल ट्रैक बना दिए लेकिन तुम्हारे ही लोगों ने उन ट्रैक्स पर कब्जा करके दुकानें खोल लीं। वो सारे लोग तुम्हें ही वोट देते हैं। तो क्या तुम्हें मालूम नहीं था कि हिंदुस्तान की पब्लिक इस तरह के thoughts के लिए नहीं है। ये कॉन्सेप्ट तुम लंदन से ले आए, लेकिन ये नहीं देखा कि ये फैसला यूपी में करना कितना प्रैक्टिकल है, इन ट्रैक्स की देखभाल तुम्हारे ही समय में खत्म हो गई थी। अगर कोई चीज बनाई थी, तो तुम्हारा तंत्र उसकी देखभाल क्यों नहीं कर पाया। एक किलोमीटर के ट्रैक पर 1.50 करोड़ का खर्चा आया। इटावा सफारी से आगरा तक का साइकिल ट्रैक बना दिया, कौन चलता है उस पर , ये पता किया क्या तुमने। तो ये सारे शोशे जो तुमने छोड़े वो पैसे कमाने के लिए। अपनी पसंद के यादव, मुसलमान ठेकेदारों को ठेके बांट दिए और जम कर सबने मलाई लूटी। तुमने सोचा था इसी बहाने तुम्हारे चुनाव चिह्न साइकिल का प्रचार हो जाएगा। तो ज़रा शर्म करो, तुम्हारे जिस प्रोजेक्ट को देखने भर से पता चल रहा है कि पैसे लूटने के लिए शुरु किया था, उस प्रोजेक्ट की तारीफ अपने अनपढ़ चेलों से करवा रहे हो। बदल दो अपनी सोशल मीडिया टीम, उसके “अखिलेश भइया”, उसके बोलने से पता चलता है कि समाजवादी युवजन सभा वाला है, जात पर लाठी लेकर खड़ा होने वाला।

अखिलेश कैमरे में एक गड्ढा दिखाकर उसे साइकिल ट्रैक बताने से पहले ये बताओ कि इस साइकिल ट्रैक पर चलता कौन था? सड़कें संकरी हुईं, अतिक्रमण हुआ और रखरखाव तक नहीं हो पाया। करोड़ों खर्च करके ऐसा प्रोजेक्ट बनाया जिसका इस्तेमाल और उपयोगिता ही सवालों में रही। तुम्हारे कितने प्रतिशत कार्यकर्ता साईकिल चलाते है ? कितने हजार लोग उस ट्रैक का इस्तेमाल करते है ? बस बकवास कर लो

डबल इंजन सरकार

समाजवादी छात्र जागरूकता एवं सदस्यता अभियान रायबरेली !

अबकी बार अखिलेश सरकार 📣🔊🔈

अखिलेश जी ईमानदारी की बुनियाद की बात कर रहे हैं तो सबसे पहले अपनी पार्टी के पिछले शासनकाल की बुनियाद देख लें। जो साइकिल ट्रैक आज टूट रहे हैं, उनकी मिट्टी खिसक रही है, वे उसी व्यवस्था की देन हैं जिसमें विकास के नाम पर सिर्फ नारे बिकते थे और काम कागज पर रह जाता था। सपा का चुनाव चिह्न साइकिल है, लेकिन उनके शासन में साइकिल ट्रैक बनते भी थे तो रखरखाव का कोई इंतजाम नहीं था। आज वही ट्रैक दिखाकर भाजपा को सीख देने की बात करना वैसा ही है जैसे कोई अपनी टूटी छत दिखाकर पड़ोसी से मकान बनाने की सलाह दे। ईमानदारी की बुनियाद तब मजबूत होती है जब काम दिखे, न कि जब वीडियो बनाकर आरोप लगाया जाए। उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में जो सड़कें, पुल और ट्रैक बने, वे जनता के सामने हैं। अखिलेश जी से पूछना चाहिए कि उनकी सरकार के समय बने कितने काम आज भी उसी मजबूती से खड़े हैं और कितने सिर्फ भाषणों में रह गए। जो स्वयं अपनी बुनियाद संभाल नहीं सके, वे दूसरों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने निकले हैं। जनता अब वीडियो नहीं, जमीन पर दिखने वाले काम देखती है।

MP- आदिवासियों के 30 से ज़्यादा बच्चे इस पानी को पी कर मर गए। इंदौर में गंदा पानी पीने से कितनों की मौत हुई। कोई सबक मिला था..??

अखिलेश जी आपकी सरकार में हमारे यहां की सड़क का यही हाल था। इस सड़क का नाम है ताड़ीघाट- बारा मार्ग

भाजपा वाले सिर्फ कमीशन पा जाए हो गया कार्य अब उसमें तो वो रहेंगे नहीं रहना तो आम इंसान को है न ।

Gumrah kiya gaya hai

2017 में गोरखपुर की एक संस्था में मात्र 6 करोड़ 40 लाख का फण्ड था जो अब 2026 के अंत तक आते आते 1 हजार 8 सौ 67 करोड़ तक पहुंच गया, ये फण्ड किसने दिया ? हाइवे,सड़के,बड़े बड़े सरकारी ठेके लेने वाले टॉप 20 के कॉन्ट्रैक्टर्स ने ये फण्ड दिया हैं,क्या ये भ्रष्टाचार नही हैं

साइकिल ट्रैक अच्छा था तो कटान कैसे हो गया अगर कटान हो गया तो अच्छा कैसे कहे

Koi bewakoof hi aise khokale kam ko Vikas keh sakata hai nahi?

भ्र्ष्टाचार जनता पार्टी वालों को दिखाओ

UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर 2026 से लगने वाले MDR आसान भाषा में: ₹2,000 तक के UPI पेमेंट: कोई MDR नहीं — ₹0 ₹2,000 से अधिक: तस्वीर के अनुसार 0.40% MDR ₹3,000: ₹12 ₹10,000: ₹40 ₹50,000: ₹200 ₹70,000: ₹280 ₹75,000 या उससे अधिक: अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन ₹1 लाख ₹300

*ये बात सही है, जनता के खाते में 100 रुपए ही पहुंच रहे हैं, बाकी करोड़ों तो सीधे भाजपा और उसके मित्रों के खाते में जा रहे हैं*

हमारे सीएम ने सही फरमाया 😊

👍👍🙏🙏🙏

@SirManojYadav भाजपा गिरोह भ्रष्टाचार के दल दल में प्रदेश को बर्बाद कर रही है।

ईमानदारी क्या होती भाई साहेब?

आएगा, योगी ही

समाजवाद का काम बोलता हैं।

माननीय अखिलेश यादव जी, योगी सरकार रोजगार संगम नाम के पोर्टल (आउटसोर्सिंग नौकरी हेतु) में चयन प्रक्रिया अनैतिक/असंवैधानिक है जिसकी रिकार्डिंग मेरे पास है कृपया हमारी मदद करें 🙏

गिरगिट ने आज तंग आकर खुदखुशी कर ली....... 🤔🤔😄

Kya bhaiya aap bhi na...

जय श्री राम

Many many thanks Rastriya adyaksh samajwadi party Sri akhilesh yadavg

हा हा हा हा, चोर ईमानदारी की बात करता हैं अच्छा नहीं लगता, सपा के शासन में पूरे यूपी को लूट डाले थे और उसी लूट के पैसे से कोल्ड स्टोरेज बना, सैफई में शानदार महल बना अरबों की जमीन खरीदा, भूल गया क्या टोटी चोर यदुमुल्ला

ये देखिये सपा की बुनियाद
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