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जहाँ मृतक का सम्मान नहीं, वहाँ अमृतकाल नहीं!

303,570 Aufrufe • vor 2 Jahren •via X (Twitter)

8 Kommentare

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Surya Samajwadivor 2 Jahren

ये यूपी के प्रयागराज की अनीता है जिनकी बीमारी से मौत हो गई. पत्तल बेचकर गुजारा करने वाले परिवार के पास अंतिम संस्कार को पैसे न थे. आखिर में अनीता के पिता और पति ने बांस में चादर बांधी, उसमें शव रखा और अंतिम संस्कार को चल पड़े. यही है योगी के यूपी की हकीकत है

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Dr. Arunesh Yadav (डॉ अरुणेश यादव)vor 2 Jahren

शर्मनाक

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Sudhir Mishra 🇮🇳vor 2 Jahren

वीडियो बनवाने की जगह मदद कर देते , तो आपका कुछ बिगड़ता नहीं , बस लाशों पर राजनीति ना कर पाते।

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Deepak Singhvor 2 Jahren

लोगों ने अब भाषण और राशन को ही जिंदगी मान लिया है,

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🇮🇳 सुहानी तिवारीvor 2 Jahren

सुबह सुबह लाश पर रोटी सेंकने का काम टोंटीदार ही कर सकता है। लानत है तुम्हारी राजनीति पर

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Shyam Yadavvor 2 Jahren

अत्यंत दुखद उत्तर प्रदेश में जंगल राज कायम

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Gyanendra bouddhvor 2 Jahren

ये समाज की गलती है हर बात के लिऐ सरकार को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं,,, यदि अंतिम संस्कार जैसे कार्यों में समाज किसीकी सहायता नही कर सकता तो हमारा समाज गलत दिशा में है ,,, जो चिंताजनक है

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Arvind Yadavvor 2 Jahren

"ये जो जातीय जनगणना की बात है ये कोई नई नहीं है। देश के बड़े नेता, देश की जितनी बड़ी आबादी है वो सब चाहते हैं कि कास्ट सेंसेस हो और इसके पक्ष में उत्तर प्रदेश की ज्यादातर जनता है। न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि देश की सभी पार्टी आज चाहती हैं कि कास्ट सेंसेस हो। ~ माo राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी

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