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जहाँ मृतक का सम्मान नहीं, वहाँ अमृतकाल नहीं!
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ये यूपी के प्रयागराज की अनीता है जिनकी बीमारी से मौत हो गई. पत्तल बेचकर गुजारा करने वाले परिवार के पास अंतिम संस्कार को पैसे न थे. आखिर में अनीता के पिता और पति ने बांस में चादर बांधी, उसमें शव रखा और अंतिम संस्कार को चल पड़े. यही है योगी के यूपी की हकीकत है

शर्मनाक

वीडियो बनवाने की जगह मदद कर देते , तो आपका कुछ बिगड़ता नहीं , बस लाशों पर राजनीति ना कर पाते।

लोगों ने अब भाषण और राशन को ही जिंदगी मान लिया है,

सुबह सुबह लाश पर रोटी सेंकने का काम टोंटीदार ही कर सकता है। लानत है तुम्हारी राजनीति पर

अत्यंत दुखद उत्तर प्रदेश में जंगल राज कायम

ये समाज की गलती है हर बात के लिऐ सरकार को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं,,, यदि अंतिम संस्कार जैसे कार्यों में समाज किसीकी सहायता नही कर सकता तो हमारा समाज गलत दिशा में है ,,, जो चिंताजनक है

"ये जो जातीय जनगणना की बात है ये कोई नई नहीं है। देश के बड़े नेता, देश की जितनी बड़ी आबादी है वो सब चाहते हैं कि कास्ट सेंसेस हो और इसके पक्ष में उत्तर प्रदेश की ज्यादातर जनता है। न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि देश की सभी पार्टी आज चाहती हैं कि कास्ट सेंसेस हो। ~ माo राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
