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पत्रकार का सवाल : गजेंद्र सिंह शेखावत ने यहाँ पर बयान दिया है उस पर आपकी प्रतिक्रिया? जवाब : पानी का संकट जो जोधपुर के अंदर, उसकी मज़ाक मंत्री जी ने खुद ने ही उड़ा दी। राजीव गांधी आए थे जोधपुर में, आपकी नई पीढ़ी को नहीं मालूम होगा,...

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आज जोधपुर में मीडिया से बातचीत की : पत्रकार : विधानसभा क्षेत्र हो या जोधपुर शहर, क्या क्या समस्याएं देखने में आईं ? जवाब : देखिए हालात बड़े गंभीर हैं। अब बताइए आप यह पानी को देख कर कोई विश्वास कर सकता है ? मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। यहां अंदर महिलाएं आई, बच्चे आए, नौजवान यह पानी लेकर आए। पानी का हमने इंतजाम किया, इंदिरा गांधी कैनाल से पानी यहां तक आया, राजीव गांधी लिफ्ट बनाई। 40 -45 साल की मेहनत थी, अब भी पानी सप्लाई नहीं कर पा रहे। मैं सुन रहा हूं कि महीने में 9 -10 दिन पानी आ रहा है जोधपुर के अंदर और मंत्रियों के स्टेटमेंट ऐसे आते हैं कि बड़ा लगता है यह क्या हो रहा है? मंत्रियों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि अपनी सरकार से बात करें। कहां कमी है, नहीं है। हमारे अपने मंत्री जो जोधपुर के हैं, वह अगर इस प्रकार के कमेंट करेंगे पानी को लेकर भी समस्या ही लगती नहीं लोगों को, वह दुर्भाग्य है। यह पानी देखिए आप, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन से पता कर लें अगर यह गलत है तो। पी सकते हैं यह पानी ? क्या क्या बताएं समस्या जो है, अब शहरी रोजगार हमने शुरू किया था। देश के अंदर शायद आंध्र प्रदेश के अलावा राजस्थान था, जिसने नरेगा जैसा पैटर्न बनाया शहरों के लिए। शहरों में गरीब रहते हैं बेचारे। सोते रहते हैं सड़कों पर, बाहर के आ जाते हैं। उनके लिए इतना वरदान साबित हुआ कि नगर निगमों ने खूब काम दिया और उनको रोजगार मिला और अब उनके पेमेंट नहीं हो रहे तीन चार छह महीने से। पहले से गरीबी है। गरीबी में आटा गीला वाली कहावत है। पट्टे नहीं मिल रहे लोगों को। पट्टों की तो हमारे वक्त में जो अभियान चला था, जिस रूप में इतनी खूबसूरती से चला था, पूरे देश में तारीफ हुई। धारीवाल जी जो हमारे मंत्री थे, उन्होंने जमकर के कैबिनेट के अंदर कई फैसले करवाए। ईज़ी करवाया कि कैसे लोगों को राहत मिले। आज मैं मीडिया में पढ़ रहा था, बात आई भी है। क्या क्या छूट दी गई थी, मुझे भी याद नहीं रहता है। इतनी छूट दी गई थी। आराम हो गया लोगों को। अब यह नाटक कर रहे हैं। खाली नाम बदल दिया योजना का और ना प्रशासन का शहरों में ना गांवों में कोई पट्टे मिल पा रहे हैं। न्यूज़ में पढ़ा कोई 40- 50 पट्टे मुश्किल से मिले हैं कहीं पर एक दिन में। अभी आए हैं यहां पर PHED के ठेकेदार, मैंने कहा भाई आप लोगों ने पहले तो धमकी दी सरकार को , ये मुझे पहले जयपुर में मिल चुके हैं, सारे डिपार्टमेंट चाहे PHED हो, अन्य डिपार्टमेंट हो, सबके पेमेंट बाकी पड़े हैं और इतने बड़े अमाउंट के हैं कि छोटे ठेकेदार बर्बाद हो गए, उधार लेकर काम करते हैं तो उन्होंने पहले धमकी दी कि हम स्ट्राइक पर जा रहे हैं तो सरकार ने बुलाकर कुछ मामूली पैसा रिलीज कर दिया। हमने दबाव दिया था उस वक्त। इनको दबाव से बुलाया गया और कहा गया नहीं आप धन्यवाद दीजिए सरकार का। एक विज्ञापन पूरा दिया पूरे पेज का लाखों रुपए खर्च हुए। इनको मजबूरी में देना पड़ा। मैंने इनको सुनाया, मैंने कहा आपने क्यों तो धमकी दी, क्यों आप धन्यवाद दे रहे हो, क्यों पैसा खर्च कर रहे हो? तो कहने का मतलब कि पेमेंट नहीं हो रहे सरकार में। RGHS के अंतर्गत जो पेंशनर्स हैं उनका इलाज होना लगभग बंद हो गया है। अब बताइए क्या बीत रही है ? RGHS जैसी इतनी शानदार स्कीम जो मैंने CGHS में केंद्र में मंत्री था या MP था तब हमारे लिए लागू थी वहां पर, उसी पैटर्न को मैंने लागू यहां पर करी राजस्थान में। पत्रकारों के लिए उससे मिलती जुलती स्कीम है। सबका भट्टा बैठा दिया स्कीम का। और तो और जो चिरंजीवी योजना थी फ्री इलाज की, पैसे मांगने लगे अस्पताल वाले कि हमारे पेमेंट नहीं हुई सरकार से। सरकार पेमेंट नहीं कर रही हमें इसलिए हम आगे पैसा वसूल कर रहे हैं। मैंने सरकार को एक बार कहा था भाई आप कम से कम कोई ऐसा सर्कुलर बनाएं कि अगर मजबूरी में पैसा नहीं दे पा रहे, और अस्पताल कोई वसूल कर रहा है तो पैसा वापस मिल जाए उनको। कोई हलचल नहीं, कोई जवाब नहीं। और तो जो पेंशन, जो बेचारे रिटायर हो रहे हैं लोग बाग उनका खुद का पैसा है, GPF का भी है, PF का भी सब पैसा होता है, ग्रेच्युटी का है वो पैसा तक नहीं दे रही सरकार , रिटायरमेंट में। कुछ आवश्यकता होती है, घर के अंदर शादी भी होता है, कुछ भी होता है। लाइन लगी हुई है। मैंने सुना ACS फाइनेंस जो हैं उनके कमरे के बाहर ही लोग खड़े रहते हैं। यह स्थिति है। और तो और 31 मार्च तक जो मैंने कल कहा मीटिंग के अंदर भी कि 31 मार्च तक जो बिल बन गए थे, ट्रेजरी में चले गए, रोका गया, वापस बुलाया गया। वापस प्रोसेस करो, इसलिए कि टाइम पास हो जाए, पेमेंट नहीं करना पड़े।

Ashok Gehlot

32,899 просмотров • 2 месяцев назад

क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी अग्निकांड की तरह घटना यहाँ पर हो? कोचिंग हब क्यों नहीं कर रहे शुरू? अशोक गहलोत का बयान: जो घटना हुई है कल लखनऊ में, 15 बच्चे मर गए। यह घटना भी कोई मामूली नहीं है। क्या हमारी सरकार इंतज़ार कर रही है क्या ऐसी घटना का? मैं सरकार को कहना चाहूँगा, हमने क़रीब ₹400-500 करोड़ खर्च करके जयपुर में कोचिंग हब बना दिया है 240 इंस्टिट्यूशंस के लिए। 140 लोगों ने जमा करा दिए पैसे। इस सरकार की बेवकूफ़ी से 100 लोगों ने पैसे वापस ले लिए। हम तो आईआईटी का वहाँ ब्रांच खोलेंगे वहाँ पर, मज़ाक बना रखी है इन्होंने। आईआईटी की अगर आपको एक यूनिट खोलनी है वहाँ पर, नया भवन बना दीजिए उनके लिए। पर जो हमने काम किया कि जो क़रीब 1 लाख बच्चे तो गोपालपुरा बायपास पर पढ़ रहे होंगे। घटना हो चुकी है दिल्ली में, बच्चे मर चुके हैं पानी के अंदर डूब करके अंडरग्राउंड में। गोपालपुरा में गैस से 25-30 बच्चे घायल हो गए। तो क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी की तरह घटना यहाँ पर हो? क्या चाहती है सरकार? क्यों उसको बंद कर रखा है? पड़ी-पड़ी बिल्डिंग टूट जाएगी, उसमें लाइब्रेरी भी है उसके अंदर, सारी सुविधाएँ हैं, फ़ूड कोर्ट भी है बच्चों के लिए, अच्छे माहौल में बच्चे पढ़ सकते हैं, अच्छा माहौल उनको मिलेगा सब तरह से। समझ के परे है कि क्यों इस प्रकार की हरकतें कर रही है? हरकतें वहाँ ही नहीं कर रही है, जोधपुर में चार अस्पताल बिल्डिंग खड़ी पड़ी है। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी की बिल्डिंग बन चुकी है, वहाँ पड़ी है। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पड़ा हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री खुद को रिक्वेस्ट करी, टेलीफ़ोन पर बात करके, जब मेरे बर्थडे पर बात हो रही थी। मैंने कहा, "श्रीमान जी, आप आइए, हम स्वागत करेंगे आपका वहाँ। आप इनका क्यों नहीं फीता काट देते हो?" कि "नहीं, मैं जल्दी करूँगा।" वो जल्दी आज तक नहीं आई है। कल मुझे किसान मिले, 2025 का मुआवज़ा अभी तक नहीं मिला उन किसानों को। पहले 23-24 का रुका हुआ था। यह आपके लूणी के जो हमारे मंत्री महोदय हैं, इनके क्षेत्र का ही था वो। और भी कई जगह से शिकायत आ रही थी। पर सरकार मुआवज़ा टाइम पर दे नहीं पा रही है और तमाम डिपार्टमेंट के पेमेंट रुके पड़े हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हमारी फाइनेंशियल स्थिति बहुत ही नाज़ुक है, हम पेमेंट नहीं कर पाएँगे 6 महीना, साल भर, कुछ तो कहे। सारे डिपार्टमेंट में पेमेंट रुक गए, ₹2 करोड़ के चेक नहीं कट रहे हैं। डबल इंजन सरकार है, दिल्ली में इनकी खुद की सरकार है, इनको एक्स्ट्रा इमदाद मिल सकती है, मिल भी रही होगी। पर मैनेजमेंट ऐसा बकवास कर दिया है, कोई डिपार्टमेंट का पेमेंट नहीं है। बर्बाद हो गए लोग-बाग, दुखी हो गए हैं। समझ नहीं पड़ रही है पेंशन टाइम पर नहीं मिलती, कुछ नहीं हो रहा है। मतलब यह स्थिति बनी है। ख़बर है गंगानगर, हनुमानगढ़ के अंदर और भी कई जगह कि गेहूँ की ख़रीद नहीं हो रही है। वहाँ हड़तालें चल रही हैं, लोग दुखी हैं, बारदाना नहीं आ रहा है। जो टारगेट फिक्स करते हैं, वो पूरा ख़रीद भी नहीं पा रही सरकार उनको और टाइम जो है पहले 30 जून तक का होता था ख़रीदारी का, इस बार 31 मई कर दिया, उसके कारण से अब बार-बार आगे बढ़ा रहे हैं और 30 जून भी आ जाएगा। तो किसान बर्बाद हो रहा है राजस्थान का, यह मैं कहना चाहूँगा।

Ashok Gehlot

28,020 просмотров • 3 месяцев назад

अनशनरत छात्र नेता श्री शुभम रेवाड़ से एसएमएस अस्पताल में मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की : पत्रकार: सर, आप शुभम से मिले हैं, आपने बातचीत की है ? जवाब : लंबे अरसे से सभी लोग मांग कर रहे हैं, शुभम भी मांग कर रहा था कि चुनाव होने चाहिए। यह समझ के परे है कि चुनाव क्यों नहीं करवा रही सरकार? हमारे वक्त में चुनाव उस साल हमने इसलिए नहीं करवाए थे, चुनाव के आचार संहिता लागू होने वाली थी। तो हमने कहा कि यह समाप्त होते ही चुनाव होंगे। और लगातार हम लोग पैरवी कर रहे हैं, सोशल मीडिया में लिख रहे हैं। यह पॉपुलर डिमांड है राजस्थान के नौजवानों की। सबको मालूम है कि छात्र संघों से निकले हुए लोग कहां तक पहुंचे? इनको नहीं मालूम एबीवीपी वालों को? अरुण जेटली जी थे केंद्र में वित्त मंत्री, वो भी छात्र संघ अध्यक्ष थे दिल्ली के अंदर। यहाँ हमारे रघु शर्मा जी हैं, महेश जोशी जी हैं, राजेंद्र राठौड़ जी हैं जो इनके खुद की पार्टी के नेता हैं। आप बताइए कितने लोग पहुंचे हैं जो कि छात्र राजनीति से आए । मैं खुद हूँ, मैं तो चुनाव हार गया था छात्र संघ का, जिनके नाम मैं ले रहा हूँ चुनाव जीते हुए थे और मैं हार के भी पहुँच गया जहाँ पहुँचना था मुझे। तो यह कोई बात नहीं हो कि आप चुनाव बंद करके जो नई पीढ़ी आने वाली है, अभी जेन - ज़ी आने के बाद में इनको समझ में नहीं आ रही है क्या कि जेन - ज़ी की ताकत क्या होती है ? भारत सरकार को भी झुका दिया, इस्तीफा होना पड़ा शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान जी का। तो सरकार को समझना चाहिए, आगे आ के बात करनी चाहिए। इसको गंभीरता से लेना चाहिए। 15 दिन हो गए आज भूख हड़ताल पे, पानी पीना छोड़ दिया, मैंने जबरदस्ती पानी भी पिलाया उनको अभी। तो आप मुझे बताइए कि एक इंसान अगर अपनी भावना रिप्रेजेंट कर रहा है लाखों बच्चों की, छात्रों की, मेरे वक्त में ही गुरुचरण छाबड़ा जी ने नशामुक्ति को ले के तीन बार उन्होंने अनशन किया, इसी SMS के अंदर। तब मैं खुद फोन करता था उनको, एज़ ए मुख्यमंत्री , समझाता था उनको, मेरे मंत्रियों को मैंने भेजा उनके पास में, आखिर में हमने समझौता करके उनका तुड़वाया अनशन। तीसरी बार मेरी सरकार चली गई थी, फिर वो अनशन में बैठ गए। वो भारतीय जनता पार्टी के एमएलए रहे हुए थे। अफसोस इस बात का, उनकी पार्टी का पूर्व एमएलए था, वरिष्ठ नेता था, वही 15 दिन तक भूख हड़ताल करते रहे, कोई नहीं आया यहाँ पर। तब मैं खुद आया यहाँ पर, विपक्ष में रहते हुए मैं आया। उनको मैंने बहुत समझाया। पर उन्होंने मेरी बात नहीं मानी, कि 'नहीं-नहीं, मैं बिल्कुल ठीक हूँ, यह है, वो है'। दूसरे दिन खबर आई कि वो सीरियस हो गए हैं और अगले दिन खबर आई कि वो मर गए। कोई बीजेपी नेता, बड़े-बड़े उनके घर पर दाह संस्कार में नहीं जा पाए, इतना घबरा गए थे वो,गिल्टी कॉन्शियस थे। आखिर में छिप-छिप के गए उनके यहाँ बैठने के लिए। यह स्थिति थी, अभी तक मुझे याद है वो बात। उनके परिवार वाले लोगों ने बहुत आंदोलन चलाए बाद में , वो बंद हो गए। तो कहने का मतलब यह है कि ऐसे मामलों में सरकार चाहे किसी पार्टी की हो, मुख्यमंत्री खुद को बात करनी चाहिए। उनके मंत्री बात करें और जो आमरण अनशन इन्होंने शुरू किया है उसको तुड़वाएं, यह मेरी मांग है मुख्यमंत्री से। मैंने जयपुर कलेक्टर से बात करी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि मैं लगा हुआ हूँ, अधिकारियों से बात कर रहा हूँ और मैं बात पहुँचा रहा हूँ आप सब की वहाँ सीएमओ के अंदर। शाम को 4-5 बजे तक की बात करी है। शुभम ने कहा है कि 4-5 बजे का मुझे कहा गया है। मैंने इनको कहा अगर वो पॉजिटिव जवाब नहीं दें आपको, तब भी आप यह अनशन तोड़ो। हम सब मिलकर के आगे आह्वान करेंगे, बल्कि तुम आगे आओ। अगर वहाँ जेन - ज़ी दिल्ली में देश भर में आ सकते हैं सड़कों पर, यह भी मुद्दा ऐसा ही है। पूरे छात्र संघ इसमें सहयोग करेंगे, हो सकता है एबीवीपी के छात्र भी साथ आ जाएंगे छात्रों के। मांग तो कॉमन मांग है, यह तो कोई कांग्रेस-बीजेपी की थोड़ी है! वो तो मुख्यमंत्री जी इनको चाहिए था ऐसी मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखें, यह मेरा मानना है।

Ashok Gehlot

41,721 просмотров • 1 месяц назад

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,850 просмотров • 3 месяцев назад

पत्रकार का सवाल : क़ानून व्यवस्था को लेकर लगातार जोधपुर में फायरिंग भी हो रही है। जवाब : अब देखो ना, दौड़ा-दौड़ा के मारा। यह घटना राजस्थान भर में हो रही है, कहीं मर्डर हो रहे हैं, कहीं रेप हो रहे हैं। सुनवाई नहीं हो रही है और एक नई बात हो गई है, थानों के अंदर जो है पैसे खा लेते हैं क्योंकि करप्शन की हदें पार हो गई राजस्थान के अंदर। करप्शन तो देखो हर राज के वक़्त में होता है, मैं स्वीकार करता हूँ। इस बार तो सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं। सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं और थाने वाले कहते हैं, जिसका रेप हो गया, पहली बात तो ग़रीब परिवार है वो, थाने में जाते ही नहीं हैं, चले भी गए, चले भी गए मान लो वो, तो क्योंकि पहले खा लेते हैं रेपिस्ट से, कहते हैं, "तुम जाके समझौता कर लो जयपुर के अंदर।" क्या मज़ाक है यह? स्थिति बड़ी नाज़ुक है। पत्रकार का सवाल : आपके द्वारा जो अस्पताल बनाए गए हैं, जो सैटेलाइट किए गए हैं ना, उनमें पद तो भर दिए गए हैं लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं दे रहे हैं, पैसों के लिए। जवाब : भैया, मैं बोल चुका हूँ यह पॉइंट अभी। वो बिल्डिंग अभी खड़ी है, ना इक्विपमेंट है, ना डॉक्टर वहाँ पर हैं। पत्रकार का सवाल : सर, शेखावत जी ने एक आरोप और लगाया था कि हमने ₹27,000 करोड़ दिए लेकिन जानबूझकर राजनीतिक द्वेष के चलते जो है, पानी के जो है कनेक्शन नहीं दिए गए, उसमें भारी घोटाला किया गया है। जवाब : यह वेग बातें हैं देखो। इन बातों, जब तक आप आँकड़े नहीं दो कि भाई हमने यह दिए थे, इसमें यह खर्च हुए, इसके खर्च नहीं हुए, तब तक कोई स्वीकार भी नहीं करेगा और ऐसे आरोप तो वेग आरोप हैं, मतलब इनमें कोई दम नहीं होता है। उनको पूछो भाई, हिंदुस्तान भर में आप तो मंत्री थे, विभाग इंपॉर्टेंट था आपका, हमें ख़ुशी हुई, मैंने प्रधानमंत्री मोदी जी को कहा मीटिंग के अंदर, "यह आपने अच्छा काम किया कि आपने यह नया विभाग को इस रूप में इंपॉर्टेंस दी है।" तो आप बताइए हमारी कितनी बड़ी रुचि होगी? अब क्यों नहीं काम कर रहे हैं ये? हमारी सरकार के वक़्त में काम कम हुआ, अब क्यों नहीं काम कर पा रही है? अब तो इनकी सरकार है, क्यों नहीं काम कर पा रही है? दूसरा, इनको चाहिए सब राज्यों का हिसाब दें, कहाँ पर कितना पैसा पहुँचा है, कहाँ मैंने एक्स्ट्रा मदद करी है। ईआरसीपी (ERCP) में जो व्यक्ति झूठ बोल सकता है, प्रधानमंत्री के मुँह से हमने टेप सुना दिया इनको, प्रधानमंत्री ने तीन बार बोला, दो बार बोला राजस्थान में, "ईआरसीपी को हम राष्ट्रीय परियोजना घोषित करेंगे।" और यह खड़े होकर बोल गए मीटिंग के अंदर, ऐसा कोई हो तो मैं पता नहीं क्या बोला, "इस्तीफ़ा दे दूँगा" या क्या बोलूँगा, पता नहीं, यह बोल गए वहाँ। मुझे याद नहीं, पर कुछ बोले थे खड़े होकर जयपुर की मीटिंग के अंदर। तो इनको पता ही नहीं है। जो प्राइम मिनिस्टर की कही हुई बात है, आप नहीं स्वीकार कर पा रहे हो, या पूरा नहीं कर पा रहे हो, अलग बात है। आप कहो भाई, "यह हमारी मजबूरी थी, भूल गए, पर इसमें यह अड़चन आ रही है, यह नियम नहीं कहते।" कुछ भी बोलो, आप यह कैसे कह सकते हो, बोले ही नहीं वो? तो यह इनके बारे में मैं नहीं बोलूँ तो अच्छा है।

Ashok Gehlot

25,542 просмотров • 3 месяцев назад

आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

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आज जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की : राज्य सरकार द्वारा जोधपुर की उपेक्षा किए जाने पर मेरी प्रतिक्रिया : देखिए सबसे बड़ी बात है कि 12 साल पूरे हो गए तो अलग बात है कि 12 साल में कोई उपलब्धि नहीं रही है। धर्म के नाम पर राजनीति हुई और उसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे। अब नतीजे क्या निकलेंगे आने वाले फ्यूचर के अंदर वक्त बताएगा, अभी उस पर कहने की आवश्यकता नहीं है। पर धर्म के नाम पर राजनीति करना एक अलग बात है और पब्लिक समस्याओं से रूबरू होना दूसरी बात है। आज हर क्षेत्र में, जोधपुर की बात करें, तो पीने के पानी का संकट पैदा हो गया जोधपुर में, जिसके लिए हमने 20 साल मेहनत करी होगी जब इंदिरा गांधी कैनाल का पानी लिफ्ट करके 50 दौरे मैंने किए होंगे नहर पर तब पानी आया और तीसरा फेस जो है अभी वो 1500 करोड़ लगभग हम लोग विदेश से ऋण ले रहे थे। देरी हो रही थी तो मैंने स्टेट बजट से 1400 करोड़ रुपए मैंने मंजूर कर दिए कि जोधपुर और आसपास के गांव प्यासे नहीं रहने चाहिए। वो काम भी धीमे चल रहा है। सरकार चली गई तो मॉनीटरिंग करने का कोई हिसाब ही नहीं है यहां पर तो। मुख्यमंत्री को पता ही नहीं पड़ता कि जोधपुर लिफ्ट थर्ड बला क्या है। अब जिस मुख्यमंत्री को नहीं पता था हो तब वो कैसे उसकी मॉनिटरिंग करेंगे, वो इंटरेस्ट ले ही नहीं रहे हैं। अभी मैंने उनसे बात करी, मेरी बर्थडे पर उनका फोन आया था तो मैंने कहा जो प्रोजेक्ट जोधपुर में बन रहे हैं या बन गए हैं, सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी बन गई। स्पोर्ट्स का कॉम्प्लेक्स बन गया, 90 करोड़ रुपए की लागत से, और जो काम हो गए हैं, मेडिकल यूनिवर्सिटी बन रही है। लंबी लिस्ट है मेरे पास। आप बताइए नई सड़क पार्किंग का ये हो गया और चार जगह शानदार बिल्डिंग खड़ी हैं, प्रताप नगर, मंडोर हॉस्पिटल , दिगाडी के अंदर, चौपांकी, शानदार बिल्डिंग हैं बाहर के लोग देख के आश्चर्य होता है कि इतनी शानदार बिल्डिंग है। पड़ी पड़ी खराब हो जाएगी। ना इक्विप्मेंट है ना डॉक्टर है। इस सरकार को क्या करें? पूरे राजस्थान में हाहाकार मचा हुआ है। मेरा दावा है , मीडिया वालों मैंने कहा था जयपुर में मेरा दावा कोई मीडिया वाला हम खर्चा देंगे, आप जहां चाहो राजस्थान के किसी गांव में किसी भी गांव में जाओ,आप सरकार की हकीकत से रुबरु हो जाओगे। सरकार नाम की चीज है क्या? हमारे वक्त की योजनाओं को आज लोग याद कर रहे हैं, कोई थैला लेकर चल रहा है, कोई पेंशन नहीं मिल रही पाँच छह महीने से, वो सरकार को कोस रहा है, दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं, RGHS भी लगभग बंद हो गया, प्राइवेट अस्पताल वाले पैसे वसूल करने लग गए हैं, कागजों में चिरंजीवी योजना लागू है तब भी प्राइवेट वालों ने हड़ताल कर दी, 40 दिन हो गए, मैने सुना कल परसों खोल रहे हैं उसको, तो 40 दिन तक इलाज नहीं हुआ और जेब से पैसा देना पड़ा। क्या सरकार भरपाई करेगी ? वादा भी किया लोगों से कि अभी देना पड़ेगा आपको, पैसा मिल जाएगा तो हम आपको वापस दे देंगे। तो सरकार सुनिश्चित करें ऐसे मेकेनिजम डेवलप करे जिससे कि पैसा दिलाए उन लोगों को सरकार, वो पैसे उनको वापस मिले तब जाकर ही हमारी जो स्कीम बनाई थी चिरंजीवी योजना वो लागू मानी जाएगी, ये मेरा मानना है। तो कहने को बातें बहुत सारी है। मैंने बताया कि लिफ्ट कैनाल की कोई लापरवाही हो रही है। अब क्लोजर होता है, हर साल होता है पंजाब से, हमारे वक्त में भी हुआ था, पर हमने एडवांस में मैनेजमेंट किया, वहां की सरकार से बातचीत करी, चीफ सेक्रेटरी से बातचीत करी और ये नौबत नहीं आने दी कि कोई संकट ही पैदा हो जाए, आज देखिए क्या हो रहा है। पीने के पानी के लिए जो राजस्थान में हिंदुस्तान के अंदर नंबर वन होना चाहिए था जोधपुर, इतना पानी आ चुका है कायलाना के अंदर भरा पड़ा है सारा पानी। अब पानी आगे सेआएगा नहीं तो ये क्या करेंगे? तो मेरा कहने का मतलब यह सरकार की लापरवाही आपके सामने है, जोधपुर की उपेक्षा हो रही है, मुख्यमंत्री जी पाँच बार दस बार आ चुके, पता नहीं कितनी बार आए होंगे मुझे पता नहीं, आपको ज्यादा मालूम है। ( मीडिया पांच साल जल मंत्री के जोधपुर आने पर मीडिया के जिक्र पर) कितनी बार आए हैं वो? पता नहीं कितनी बार आए हो, गिनती नहीं है मतलब। तो आप बताइए उसके बाद में ये मैंने कहा मुख्यमंत्री को जो मैंने पाँच छह नाम गिनाए, बिल्डिंग बन चुकी है, फिनटेक इंस्टीट्यूट हिंदुस्तान में एक मात्र ऐसा होगा जो अलग से टेक्निकल है वो, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर के इंस्टीट्यूट बन रहा है,इस प्रकार की जगह बहुत कम बनी होगी, दुनिया की मैं नहीं कह सकता पर हिंदुस्तान में बहुत कम बने होंगे वो हमने बनाया है। 1/2.

Ashok Gehlot

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कांग्रेस की एकजुटता पर बार बार सवाल उठाने वालों को जवाब : कांग्रेस एकजुट है। राजस्थान में कोई गुटबाजी नहीं है, देश में कोई गुटबाजी नहीं है। कांग्रेस एकजुट है और अगर किसी को ये कन्फ्यूजन है तो हट जाना चाहिए, बार बार ये क्वेश्चन करते हैं लेकिन इसमें कोई दम नहीं है। भाजपा में गुटबाजी को लेकर प्रतिक्रिया : हमने तो कभी आरोप लगाया नहीं,कभी उनके उनके फैसलों को लेकर कुछ कहा क्या ? हमने कहा क्या कि अभी चुनाव हुए राज्यसभा के, आपने राजेंद्र राठौड़ को टिकट क्यों नहीं दिया? मैंने कही क्या यह बात ? भाजपा के बारे में कहने की बातें बहुत हो सकती हैं। हम तो बोलते नहीं लेकिन वो बोलते रहते हैं हमारे पार्टी के बारे में। पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव का इंतजार बढ़ते जाने कर पत्रकार के सवाल का जवाब : सबको मालूम है कि इतने घबराए हुए हैं कि चुनाव के अंदर साफ हो सकते हैं। हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद में भी दुस्साहस देखिए कि ये उसके बाद भी चुनाव नहीं करवा रहे। केंद्र में सरकार इनकी है इसलिए किसको कहें? वरना यह तो बर्खास्त करने लायक सरकार है। गवर्नर को रिपोर्ट देनी चाहिए राष्ट्रपति के पास में कि क्यों नहीं चुनाव करवा रहे हैं? संविधान में जो कानून पास किया हुआ है, आप धज्जियां उड़ा रहे हो। जब वर्ष 98 में हमारी सरकार थी और कर्मचारियों की स्ट्राइक चल रही थी तो हमने कहा कि चुनाव कैसे होंगे, हड़ताल चल रही है। तब भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि चाहे स्ट्राइक हो चाहे कुछ भी हो आपको टाइम पर चुनाव करवाने पड़ेंगे, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। आज आप देख लीजिए बार बार हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट कह रहे हैं। उसके बाद भी स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री जी द्वारा माउंटआबू में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को लेकर बयानबाजी पर पत्रकार के सवाल का जवाब : अब देखिए भजन लाल जी की बातों को मुझे कहना पड़ेगा कि गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। गंभीरता से मत लो, क्योंकि वो जब से मुख्यमंत्री बने हैं, उनकी पार्टी के लोग ही उनके बारे में बातें बोल रहे हैं जो मैं कह रहा हूं कि हमारे काम होते नहीं है, हमारे मंत्री कोई बात करें तो सुनते नहीं हैं और मंत्री भी ऐसे ऐसे हैं जो गाली गलौज कर देते हैं थानों में जाकर के, कोई कलेक्टर को धमका देते हैं। किरोड़ीलाल मीणा जी तो कह रहे कि एसीबी दबाव में काम कर रही है, मेरे खिलाफ मुकदमा झूठा बना रही है। एसीबी तो मुख्यमंत्री के पास है तो किस पर आरोप लगा रहे हैं वो ? जिस सरकार की ऐसी स्थिति हो, उनके मुख्यमंत्री के बारे में क्या कमेंट करूं? वो आपसे मिल लिए बड़ी बात है। मीडिया को आज तक तो उन्होंने कोई जवाब दिया नहीं है। उन्होंने आज तक मीडिया के क्वेश्चन का कोई जवाब नहीं दिया है। ज्यादा से ज्यादा वो कभी बोल गए होंगे मीडिया के सामने, बोलकर रवाना हो गए होंगे। उनको मीडिया को फेस करना चाहिए, क्वेश्चन का जवाब देना चाहिए। उससे उनको ही फायदा है। कई बातें मीडिया वाले बताएंगे। जमीनी हकीकत क्या है? फायदा किसको होता है? सरकार को होता है पर ये इनकी फितरत में नहीं है।

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सवाल : नगर निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री खुद रोड शो कर रहे हैं ? जवाब : अब कितनी बार मैं कह चुका हूं, कल मैंने पॉडकास्ट भी किया है। जोधपुर सहित पूरे प्रदेश के अंदर कांग्रेस का माहौल बन चुका है। मुख्यमंत्री जी को नगरीय निकाय चुनाव में रोड शो करने की नौबत क्यों आई? पहली बार इतिहास में कोई मुख्यमंत्री घूम रहे हैं। हमने तो अपने वक्त में कभी कैंपेन किया ही नहीं। ये लोकल चुनाव हैं, लोकल नेता सक्षम होते हैं,उनमें दमखम होता है, वह योग्य होते है और जमीन से जुड़े होते हैं उन पर छोड़ना चाहिए चुनाव। आप सिंबॉलिक मीटिंग कर लो, अलग बात है पर आप पूरे राजस्थान में घूम रहे हो क्योंकि आपने कुछ काम किए ही नहीं। लोगों में आक्रोश है , हमारे वक़्त में पट्टे देने के काम हो रहे थे, सड़कों के हो रहे थे, जो भी काम थे , प्रशासनिक काम भी थे, काम करने का एक माहौल था। शिकायतें तो देखो, हर गवर्नमेंट में रहती हैं। मैं दावा नहीं करता कि मेरे वक्त में कोई शिकायत नहीं थी पर लाखों पट्टे दिए गए और अब ये पट्टे दे नहीं पा रहे हैं। ढाई-तीन साल इनको हो गए हैं, 1 लाख पट्टे मुश्किल से दिए होंगे। तो मेरा मानना है कि ये अब चाहे कितने ही घूमो, कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। जनता मानस बना चुकी है। जोधपुर में कांग्रेस का बोर्ड बनेगा। जो फीडबैक आ रहा है उससे कार्यकर्ताओं में शानदार उत्साह है। आम पब्लिक कांग्रेस के साथ जुड़ी है। और जो इनके वोट बैंक कहलाते थे, सो कॉल्ड, वो भी इस बार टूट रहे हैं। पूरे प्रदेश से खबरें आ रही हैं कि जो इनका वोट बैंक कहलाते थे, वो भी बड़े गुस्से के अंदर हैं उनके साथ व्यवहार भी अच्छा नहीं हो रहा है। हालात बड़े गंभीर हैं। तो मैं समझता हूं कि इस बार स्थानीय निकाय में कांग्रेस के बोर्ड बनेंगे और मैं बार-बार कह रहा हूं कि इन लोगों को झटका लगना जरूरी है। सवाल : केंद्रीय मंत्री तो कई वार्डों को व्यक्तिगत चुनाव मान के घूम रहे हैं लगातार जोधपुर में। जवाब : व्यक्तिगत और सार्वजनिक की उनकी क्या परिभाषा है मुझे पता नहीं है, पर वो तो वही हैं। सवाल : 40 लोगों का जोधपुर में निष्कासन हुआ, बागी या दागी कहें। क्या ये जल्दबाजी नहीं थी सर? जवाब : देखो, मैं तो अभी आया ही हूं। जो निर्णय प्रदेश के अंदर होता है पीसीसी का सर्कुलर होता है और उसमें जो दिशा-निर्देशन होता है, उसके अकॉर्डिंग टू सब जिला कांग्रेस कमेटियां काम करती हैं।

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धरना दे रहे आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर विद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की : लोकसभा का मेंबर बना पहला काम मैंने किया, यह जो बच्चे हैं, डेफ एंड डम्ब ( मूक-बधिर), तो मैंने उन्हीं के लिए गांधी बधिर विद्यालय खोला था। आज इस बात को करीब 40 साल से ज्यादा हो गया। अब वो बढ़ते-बढ़ते कॉलेज बन गई है जोधपुर के अंदर। इस प्रकार से मेरे को उस वक्त से मालूम है कि डेफ एंड डम्ब बच्चों की प्रॉब्लम क्या रहती है। आजकल तो बहुत ही आधुनिक तकनीकें आ गई हैं। हमारी गवर्नमेंट ने ही शुरू की थी देश के अंदर, बाद में भारत सरकार ने शुरू किया। 7 साल- 8 साल तक के बच्चों को जो है कॉकलियर इंप्लांट लग जाते हैं। बच्चे का अगर बचपन में सरकार ऑपरेशन करवा देती है जैसे मैंने शुरू किया राजस्थान के अंदर, मेरे दूसरे कार्यकाल के अंदर, साढ़े 6-7 लाख का खर्चा आया। हमने जो भी बच्चा आया, सबका कॉकलियर इंप्लांट लगाया तो वो बच्चे उसके बाद में बोलना और सुनना सीख जाते हैं। जब सुनना सीखेंगे तो बोलना सीख जाते हैं। प्रॉब्लम आती है सुनने में। अगर पैदाइश से ही वो सुन नहीं सकता, तो ये बोलेगा क्या? जब सुनाई ही नहीं देता है तो कौन क्या बोल रहा है। तो ये जो नई तकनीक आई है, बहुत ही कारगर है। अब मैंने सुना भारत सरकार ने भी इसके ऊपर ध्यान दिया है। तो राजस्थान तो वो राज्य है। अभी बच्चों की प्रॉब्लम यही थी, एक तो टीचर्स जो हैं, ये साइन लैंग्वेज होती है, बिना साइन लैंग्वेज के जो टीचर लगे हुए हैं अधिकांश, वो क्या पढ़ाएंगे जब उनको साइन लैंग्वेज खुद को नहीं आती है, इनको क्या पढ़ाएंगे? और ये तमाम बच्चे बड़े एक्सपर्ट बन गए हैं, काफी लोग, जो साइन लैंग्वेज से बातचीत कर सकते हैं सब।तो इनकी उस संबंध में समस्याएं हैं। फिर व्यवहार क्या है टीचर्स का, इनके नियम-कायदे फॉलो होते हैं कि नहीं होते हैं, सरकार सुविधाएं देती है वो इन तक पहुंचती हैं कि नहीं पहुंचती हैं, बिल्डिंग जर्जर हालत में है, बाथरूम गंदे पड़े हैं, गंदगी साफ नहीं होती है, जनरल समस्याएं इन्होंने बताई हैं। तो मैं मुख्यमंत्री को खुद लिखूंगा डी.ओ. लेटर, बताऊंगा कि मैं जाके आया हूँ और मेरा खुद का बैकग्राउंड इन्हीं की सेवाओं से शुरू हुआ है। मैं उनको अहसास करवाने की कोशिश करूँगा कि आप भी ध्यान दें। ये लड़के-लड़कियाँ यहाँ पर करीब 300 के लगभग पढ़ रहे हैं यहाँ पर। तो जब बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते, आप सोच सकते हो क्या बीत रही होगी। साइन लैंग्वेज ही है जिससे अपना वो जीवन बसर कर सकते हैं। ये बच्चे बड़े उम्र के हैं, इनका वो ऑपरेशन भी नहीं हो सकता है। ये स्थिति है। तो इसलिए मैंने जान-बूझकर उचित समझा कि मैं खुद जाऊँ। अभी मिस्टर जूली साहब आके गए थे, वो विपक्ष के नेता हैं, वो भी उठाएंगे असेंबली में भी। वो भी लिखेंगे मुख्यमंत्री जी को, हम दोनों बात करेंगे आपस के अंदर। और जो भी हो सकता है। ये संस्थान बहुत शानदार संस्थान है । पोद्दार जी के नाम से बनी है, 50 साल पहले बनी होगी, इसका अपना अलग महत्व है राजस्थान के अंदर। बाकी तो धीरे-धीरे पनपती हैं, सात हैं, आठ हैं, जो भी संस्थान हैं। दुर्भाग्य है प्रदेश का कि मैंने जो बाबा आमटे विश्वविद्यालय खोला यहाँ निशक्तजनों के लिए, उसमें डेफ एंड डम्ब भी आते हैं, ब्लाइंड भी आते हैं, हैंडीकैप्ड भी आते हैं। वो विश्वविद्यालय कागजों के अंदर है। वीसी को बिठा रखा है ये शिक्षा संकुल के अंदर। सरकार की ये स्थिति है, ढाई साल से वो वीसी बिठा रखा है वहाँ पर। अब रिटायरमेंट हो गया उनका। कुछ सेक्टर ऐसे होते हैं जहाँ राजनीति बीच में नहीं आती। उसमें तो सरकार को चाहिए चाहे कोई पार्टी के बच्चे पढ़ते हों, किसी परिवार के कोई, किसी पार्टी का कोई मतलब नहीं है। ये तो सेवा का काम है। इनकी सेवा करना, ईश्वर की सेवा करना है।

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आज जोधपुर सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता में मीडियाकर्मियों के सवालों के जवाब दिए : (23 जून 2026) राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के विषय में : मैं कोटा जाकर आया था, प्रसूताओं से मिलकर आया, वहां पांच प्रसूताओं की डेथ हो गई थी। हज़ारों प्रसूताएँ डिलीवरी के लिए अस्पताल जाती हैं वहाँ पर अगर मौतें हो जाएँ या इन्फेक्शन हो जाए और उसके कारण से अगर मान लीजिए, उनकी किडनी फेल हो गई है तो इसे मैं बहुत गंभीर घटना मानता हूँ। भगवान करे वहाँ पर रिवाइव हो जाए वरना ज़िंदगी भर के लिए तो डायलिसिस और या किडनी ट्रांसप्लांट। यह स्थिति बनी हुई है हक़ीक़त में यह है। बीकानेर में भी यह ख़बर आने लग गई। जोधपुर से आठ प्रसूताओं की जो कल ख़बर आई है, तो आज मैं एम्स और उम्मेद अस्पताल भी जा रहा हूँ। सवाल यह नहीं है कि आज मैंने पढ़ा स्टेटमेंट कि यह जो है कोटा की तरह की स्थिति नहीं है। कोटा की स्थिति हमें तो मालूम नहीं। सरकार बताए कि कोटा में कोई इन्फेक्शन हुआ या ओटी में कुछ गड़बड़ हुई, दवाइयों में कुछ गड़बड़ हुई तो हमें क्या पता? तो पहले ही आप कैसे कह सकते हो कि यह कोटा की तरह की घटनाएँ नहीं हैं? या तो वो स्पष्ट करें कोटा की घटना क्या थी। तो मालूम पड़े पब्लिक को भाई कि कोटा की घटना अलग थी, यहाँ की घटना अलग है, यहाँ के कारण अलग हैं। तो यह इस प्रकार के स्टेटमेंट देना मैं समझता हूँ उचित नहीं है। यह इतना बड़ा मामला है जहाँ हज़ारों प्रसूताएँ जाती हैं डिलीवरी के लिए, उन सब में अगर भय बैठ जाए कि मेरा क्या होगा? मेरे इन्फेक्शन नहीं हो जाए, मेरी मौत नहीं हो जाए, मेरी किडनी ख़राब नहीं हो जाए, तो क्या होगा बताओ? इतना बड़ा इशू है। मैं वेलकम करता हूँ, उन्होंने एम्स की टीम को बुलाया है। मैंने कोटा में भी यह बात कही थी। एम्स की टीम आ गई, स्टेट गवर्नमेंट की टीम आ गई, कल प्रिंसिपल सेक्रेटरी गायत्री राठौड़ जी आकर गईं, अच्छी बात है। कम से कम ध्यान सरकार का गया है। पर मैं यह कहना चाहता हूँ आज, 4 मई को भर्ती हुई थी कोटा के अंदर, 9 मई को भर्ती हुई थी। आज कितना टाइम हो गया? डेढ़ महीने से ज़्यादा हो गया लगभग। उसके अंदर आप बताने की स्थिति में नहीं हो, तो लोगों में चिंता व्याप्त है। सरकार को टॉप प्रायोरिटी देनी चाहिए इनको। क्योंकि हज़ारों-लाखों प्रसूताएँ पर डे अस्पतालों के अंदर जा रही हैं। क्या बीत रही होगी उनके ऊपर? यह बहुत गंभीर मामला है, सरकार की लापरवाही को न तो पब्लिक बर्दाश्त करेगी, न हम बर्दाश्त करेंगे। हमें और ज़्यादा क़दम उठाने पड़ेंगे, संघर्ष करना पड़ेगा। पत्रकार का सवाल : स्वास्थ्य मंत्री बयान भी ऐसे ही दे रहे हैं सर? जवाब : अब स्वास्थ्य मंत्री जी के बयान तो जब से बने हैं, तब से उनके बयान लीक से हटके आ रहे हैं और वो बहुत अच्छे मंत्री के रूप में उनकी पहचान थी। पिछली गवर्नमेंट में जब वसुंधरा जी थीं, तो उनकी अच्छी पहचान थी मंत्री के रूप में। इस बार पता नहीं कौन सा ग्रह लग गया उनको, पता नहीं वो जो बयान देते हैं, वो उल्टे ही पड़ रहे हैं। वो चिरंजीवी योजना के बारे में बयान जो दिया, तो मैंने भी उनको कहा जब वो मुझसे मिलने आए थे अस्पताल के अंदर, तो मैंने कहा, "आपने यह बयान दिया है, यह ग़लत है। यह ग़रीब-अमीर सबके लिए स्कीम है, चिरंजीवी योजना। हिंदुस्तान में एकमात्र राजस्थान राज्य है जहाँ 90% जनता जुड़ चुकी है। क्योंकि यह सबके लिए योजना है।" बाक़ी जो प्रधानमंत्री जी की जो योजना है, क्या नाम उसका? आयुष्मान भारत, यह लोगों को गुमराह करने वाली योजना है। 5 लाख की बात है, वो अलग बात है। उसके अलावा भी, यह लोग जो है एसईसीसी (SECC) एक सर्वे हुआ था मनमोहन सिंह जी के वक़्त में, ख़ाली उनके लिए वो योजना है। पूरी पब्लिक के लिए नहीं है। पब्लिक इतनी शरीफ़ है, गहरायी में जाती नहीं है। उन्हें पता ही नहीं है कि सबके लिए योजना नहीं है वो। तो आप कल्पना कीजिए, क्या बीत रही होगी? हमने सबके लिए यह योजना की है। हमारी योजना जैसी योजना हिंदुस्तान में कहीं नहीं है और शायद दुनिया में भी कहीं नहीं है। मैं कल आया हूँ, उदयपुर से गया जालौर, जालौर से आया हूँ जोधपुर। रास्ते भर लोगों की आँखों में आँसू देखे मैंने। एक-एक किस्सा बता रहे थे, उनके परिवार में क्या हुआ, किस प्रकार से फ्री इलाज हो गया। 25 लाख का बीमा, क्या लोग उसके बारे में बोलते हैं। पेंशन बुज़ुर्गों को तीन-तीन, चार-चार महीने मिल नहीं रही है। थैला जो था, अरे, मैंने कहा मुख्यमंत्री जी, मेरी फोटो हटा के आप अपनी फोटो लगा देते, स्कीम बंद क्यों की? ऐसे पचासों पॉइंट हैं, सरकार को समझ में आ नहीं रही है बात। नंबर एक बात। दूसरा क्या पूछा आपने?

Ashok Gehlot

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प्रदेश के वर्तमान हालात पर मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर बातचीत की : दिक्कतें ही दिक्कतें हैं चारों ओर। सरकार बनते ही ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि दो चार महीने के अंदर ही लोग कहने लगे गवर्नेंस नहीं हो रही, शासन नहीं हो रहा। कुशासन चल रहा है और मैं बराबर आग्रह करता हूं मुख्यमंत्री जी से, वो इसे लेते आलोचना और हम चाहते हैं कि सुधार हो जिससे कि पब्लिक को फायदा मिले। अगर सरकार इन्हीं को रहनी है मान लीजिए इनकी मेजॉरिटी है तो शासन तो यही करेंगे। मगर कुशासन होगा तो पब्लिक में काम नहीं होंगे। आप कल्पना कीजिए कि क्या हालत बने, करप्शन की हदें पार हो गई। चाल, चेहरे, चरित्र एक्सपोज हो गए इनके पर उसके अलावा भी जिस प्रकार से पेमेंट नहीं हो रहे हैं कोई डिपार्टमेंट के अंदर तो फिर क्या हो रहा है? शिक्षा में, स्वास्थ्य सेवाएं तो चरमरा गई है। आप बताइए जिस प्रकार से शिक्षा की स्थिति बनी है, वो तो बड़ी अजीब सी बन गई है। स्कूलें बंद हो रही है, टीचर्स नहीं है और साथ में आपका यह स्वास्थ्य, RGHS का पता ही नहीं है। लोग खुद दुखी हो गए तो चारों ओर से आकर शिकायतें करते जो आप बात पूछ रहे थे हैं वही उसी बात। तो कहने का मतलब है कि हम बार बार कहते हैं मुख्यमंत्री जी को कि कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट, रेप अलग हो रहे हैं, डकैती अलग हो जाती है, फायरिंग करके मार देते हैं ज्वेलर्स को या किसी को। एक के बाद एक घटना, इतने सारे मुद्दे एक साथ हो गए हैं कि विपक्ष की पार्टी भी क्या क्या मुद्दा उठाए? सरकार जब तक खुद आगे नहीं आएगी, पूरा मंत्रिमंडल जब तक उस ढंग से बिहेव नहीं करेगा, जनता के साथ में डिपार्टमेंट की पकड़ नहीं करेंगे, मजबूती से डिपार्टमेंट को कसेंगे नहीं वो, तो नीचे तक जो हालात होते हैं वो बदलेंगे नहीं और नुकसान क्या होगा पब्लिक का। हमें चिंता पब्लिक की है। बाकी तो देखिए शासन तो आते जाते रहते हैं, उन्नीस बीस तो देखो हर शासन में होता है करप्शन तो यह मैं दावा नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस शासन होते तब नहीं होता है, होता है, पूरे देश में होता है, सब जगह होता है। पर जो इस बार जो जिस रूप में हो रहा है ना तो आम जनता से पूछ लीजिए, मालूम पड़ेगा। स्थिति बड़ी नाजुक है। मैं चिंता कर रहा हूं कि वो ठीक होनी चाहिए।

Ashok Gehlot

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देश- प्रदेश में पेट्रोल - डीजल और सीएनजी के बढ़ते दामों एवं ख़राब होती स्थिति पर मीडिया को आज प्रतिक्रिया दी : विपक्ष मांग क्या कर रहा है? राहुल जी क्या मांग कर रहे हैं? आप देशवासियों को बताओ कि स्थिति यह है, हमारी मजबूरी है, अंतरराष्ट्रीय स्थिति बन गई उसके कारण मजबूरी है और आने वाले वक्त में हमें यह कदम उठाने पड़ सकते हैं। अभी तो खाली मोदी जी ने देशवासियों को आह्वान किया कि आपको क्या-क्या कदम उठाने हैं। वो कदम उठाने के लिए जो कहा गया उसके बाद सब मुख्यमंत्रियों का उन राज्यों में जहां बीजेपी की सरकारें हैं, उनके मंत्रियों का नाटक हुआ, कोई रिक्शा में गए, कोई पैदल गए, कोई इलेक्ट्रिक वैन में गए और वो का वो तमाशा हो रहा है अभी भी। तमाशे से पब्लिक में मैसेज नहीं जाता है। अगर आप हकीकत में कुछ त्याग करते हो, उसका मैसेज सीधा उतरता गले के अंदर ,पर ये खाली तमाशे कर रहे हैं। अब कल परसों और बढ़ा दिए आज सीएनजी के बढ़ा दिए, ये क्या मजाक है। आप खुल के कहो भई ये हमारी मजबूरी है। लोग लाइक करेंगे उस बात को और वो भी समझेंगे कि नेता प्रतिपक्ष का सम्मान किया है, उन्होंने जो मांग की है उसका जवाब दिया है सत्ता पक्ष ने, एनडीए गवर्नमेंट ने, प्रधानमंत्री मोदी जी ने और अमित शाह जी ने। तो ये तो हुई कायदे की बात। ये जो कर रहे हैं वो बिल्कुल ही ऐसे काम कर रहे हैं जिससे कि लोगों में गलतफहमी पैदा हो और लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अब कल कितना बढ़ेगा। इस चिंता में लोग तकलीफ में हैं। पेट्रोल पंप पर लाइनें लग रही हैं ये स्वीकार नहीं कर रहे। मुझे आश्चर्य होता है कि जो हकीकत है कि पेट्रोल वाले कहते हैं एक हजार का पेट्रोल लो और कोई कोटा से आएगा, जयपुर, जोधपुर से आएगा, भरतपुर से आएगा, तीन बार रुक के उसको पेट्रोल भरवाना पड़ता है रास्ते में। तो ये जो प्रैक्टिकल हकीकत है उसको ये सरकार हमारे जो मुख्यमंत्री जी और इनके नेता हैं, यहां के जो हमारे मदन राठौड़ साहब हैं उनके अध्यक्ष हैं, इनका काम ही यही है, झूठ बोलो, बार बार असत्य बोलो और नकार दो कि हो ही नहीं रहा है। अरे भाई पब्लिक दुखी हो रही है। पेट्रोल डीजल मिल नहीं रहा है। लाइनें लगी हुई है। LPG नहीं मिलता दस से पंद्रह दिन तक, ये तो गांव गांव से खबर आ रही है। लोहावट से खबर आ गई, ओसियां से खबर आ गई। स्थिति ऐसी बिगड़ी हुई है। जो एजेंसी वाले हैं LPG वाले वो खुद हमें कहते हैं हमारी स्थिति ऐसी हो गई है, टेंशन होता है क्योंकि पब्लिक को जवाब क्या दें हम लोग? वो इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती। स्थिति स्पष्ट करती तो गांव गांव में मैसेज होता तो जो एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर है, पेट्रोल पंप के मालिक भी हैं, उनको जनता के आक्रोश का सामना नहीं करना पड़ता। गलती केंद्र की है और राज्य सरकार की।

Ashok Gehlot

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पत्रकार: सर, मूक- बधिर बच्चों की समस्याएं जो हैं , उन पर क्या कहेंगे ? जवाब : मैं जा रहा हूँ, वहाँ जा रहा हूँ। टीचर नॉर्मल लगाए गए हैं, मूक-बधिर वालों की भाषा अलग होती है। वो साइन लैंग्वेज होती है । उससे वो समझते हैं कि कौन क्या बोल रहा है आपस के अंदर, बातचीत भी करेंगे तो साइन लैंग्वेज से करेंगे। मैंने तो खुद ने एक 40 साल पहले जब मैं एमपी बना, 45 साल पहले, मैंने खुद ने स्कूल खोली है मूक-बधिर की। मुझे मालूम है कि उनमें क्या-क्या समस्याएं आती हैं, अब तो कॉलेज बन गई हमारी जोधपुर के अंदर। तो यह तो सरकारी है, हमारी जो चल रही एनजीओ से चल रही है। यह सरकारी कॉलेज है, सरकारी कॉलेज में कमी है और वहाँ के बच्चे हड़ताल कर रहे हैं, तो इतनी संवेदनशीलता कौन दिखाएगा? सरकार को ही दिखानी पड़ेगी, यह मेरी मांग है। उनसे बातचीत भी करो तथा हल करो जो समस्याएं हैं। सवाल : सर गर्भवती महिलाओं का एक बड़ा मामला सामने आया था, 104 एम्बुलेंस जो है वो ऑफ ट्रैक हैं , क्या रिएक्शन है आपका ? जवाब : 104 तो बंद पड़ी हुई हैं , हमने वो क्या नाम था उसका? जननी सुरक्षा योजना, मैंने ही शुरू की 15 साल पहले। वो तमाम गाड़ियाँ बंद पड़ी हैं। अब बताइए, एक साल से बंद पड़ी हैं, तो बेचारी औरतों पर क्या बीत रही होगी ? आराम से गाड़ी जाती, लेके आती उनको गाँवों से भी अस्पताल में, प्रसव होता, वापस पहुँचाती। तो यह तमाम हरकतें जो सरकार कर रही है ना, यह उचित नहीं है। मैं कोई राजनीतिक बात नहीं करना चाहता, मैं चाहता हूँ मुख्यमंत्री जी तीनों बातों पर, चाहे वो हमारे डेफ एंड डम्ब हों, चाहे जननी सुरक्षा योजना है उसकी बात हो, और चाहे आपके यह शुभम की बात हो हड़ताल की, छात्र संघ चुनाव की घोषणा करें और उनको विश्वास दिलाएं कि आप तो हड़ताल तोड़ दीजिए, मेरे पर छोड़ दीजिए, इतना ही कह दीजिए। कम से कम हड़ताल तोड़ो उनकी, यह मेरा मानना है। सवाल : सर, यह बीजेपी कह रही है संत रविदास का जो पाठ्यक्रम था वो कांग्रेस ने हटा दिया था ? जवाब : इनकी बातों का क्या जवाब दूँ ? इनकी बातों में इनके कोई गंभीरता नहीं होती है, यह मैं कह सकता हूँ।

Ashok Gehlot

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पत्रकार: सर, एक जो चुनाव आयुक्त को लेकर, ज्ञानेश कुमार को लेकर जो विरोध चल रहा है एसआईआर की रिपोर्ट पे, आज राहुल गांधी जी ने भी पीसी करी थी... राहुल गांधी जी ने जो-जो बातें कही हैं, वो सब जानते हैं कि आज देश में हालात क्या हैं। राहुल जी तो एक साल पहले से बोल रहे थे इनके बारे में , वोट चोरी को लेकर सवाल उठा रहे थे। एसआईआर को लेकर भी उन्होंने देश के सामने कई प्रेजेंटेशन दिए। लोगों ने उनकी आलोचना की। पर अब मालूम पड़ गया कि जब उनके खुद के दो सदस्य, चुनाव आयोग के दो सदस्य कहते हैं कि चौदह बार हमने इनको ऐतराज़ किया था कि आप गलत काम कर रहे हो उसके बाद में भी ज्ञानेश कुमार जी ने ये छोड़ा नहीं। कल ही मैंने कहा, इनको तो सज़ा मिलनी चाहिए, इनको बर्खास्त करना चाहिए, इनका इस्तीफ़ा होना चाहिए। और जो आप देख रहे हो युवा पीढ़ी भी आगे आ रही है। तो ये जो जिस प्रकार की हरकतें हो रही हैं देश में, ये देश की जम्हूरियत को, देश की डेमोक्रेसी को बहुत बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है। हम सबको इसको गंभीरता से लेना चाहिए। राहुल गांधी जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक-एक चीज़ को क्लियर किया है। बहुत अच्छे ढंग से विश्लेषण किया है। वो विश्लेषण भी सुनने लायक है, समझने लायक है, मेरा मानना है।

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पंचायत चुनाव तथा अब OTS पर बनने वाले पुल को लेकर कोर्ट के फैसले संबंधी सवाल का जवाब : अब उसके बारे में क्या कमेंट करें। सरकार को समझ में आ नहीं रहा है। सरकारें बदली कई बार हैं, हम आए हैं वापस सरकार के अंदर। दो बार वसुंधरा जी थीं, वापस हम लोग आए। पहले भैरोंसिंह शेखावत थे तब भी हमने सरकार बनाई। भारी बहुमत से बनाई, उस वक्त 156 लोग आए कांग्रेस के और 32 पर रह गई भैरोंसिंह जी की सरकार। तब भी हमने तीनों सरकारों के वक्त में कोई उनके फैसले नहीं बदले। रिव्यू किया होगा छह महीने के लिए, समाप्त कर दिया। और इस सरकार ने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट रोक रखे हैं। बल्कि उद्घाटन भी नहीं कर रहे हैं। मुझे तो आश्चर्य होता है मैंने खुद ने मुख्यमंत्री जी से अभी मेरी चर्चा हुई, टेलीफोन पर बातचीत हुई थी बर्थडे पर। मैंने उनको रिक्वेस्ट की, जोधपुर का उदाहरण दिया। मैंने कहा छह प्रोजेक्ट बने पड़े हैं वहां पर। आप खुद जाइए, जाकर उद्घाटन कर दीजिए उनका। क्यों नहीं कर रहे हैं? अस्पतालों की बिल्डिंग बनी पड़ी है वहां पर। स्पोर्ट्स का इंस्टीट्यूट खड़ा है, न कोच है ना इक्विपमेंट है। अस्पताल की बिल्डिंग शानदार बन गई है। वहां ना इक्विपमेंट है ना डॉक्टर हैं। लाइब्रेरी की बिल्डिंग पड़ी हुई है, ना बुक्स ला रहे हैं वहां पर ना शिफ्ट कर रहे हैं। तो चारों ओर जो है ये समझ के परे है कि सरकार में हो क्या गया है। इस सरकार को कौन चला रहा है, ये समझ के परे है हमारे तो। सरकार चला कौन रहा है? बीजेपी चला रही है? इनकी पार्टी चला रही है? गाइड कौन कर रहा है मुख्यमंत्री जी को? या आरएसएस चला रही है राजस्थान की? या फिर जो लोगों में कहावत बन गई है कि साहब दिल्ली से आता है मैसेज तब फैसले होते हैं। फैसले दिल्ली में होते हैं और इम्पलिमेंट भी फिर ये पूरा कर नहीं पाते स्टेट गवर्नमेंट। ये भी शिकायतें इनकी हैं। मुख्यमंत्री जी लकी हैं जिंदगी के अंदर, पहली बार एमएलए बनके आप मुख्यमंत्री बन गए। हमारी शुभकामनाएं उनके साथ में हैं। बार-बार मैं कहता हूं। वो शुभकामनाएं तो स्वीकार करते नहीं हैं और मैं शिकायत करता हूं उस पर वो आलोचना करते रहते हैं। दोनों साथ-साथ करो। हमारी शुभकामनाएं भी लो, हमारे सुझाव भी लो और उनको स्वीकार भी करो और साथ में अगर हमने कोई गलत बात कही है उनको, उसकी आलोचना वापस करो, हमें कोई ऐतराज नहीं है। पर यहां तो एकतरफा मामला चल रहा है। तकलीफ राजस्थान वासियों को है। किसी भी गांव में चले जाओ, मेरा चैलेंज मैं देता हूं सबको, मैंने मीडिया वालों को भी कहा आप जाइए, हम आपका इंतजाम करेंगे जाने का। राजस्थान के करीब-करीब सभी गांव में आपको एक सी बातें मिलेंगी जो अभी आप सुन रहे थे बाहर जो गांव का आदमी आया हुआ था बाप, फलोदी का वो क्या-क्या बोल रहा था। आप चाहो तो चला सकते हो उसको मीडिया के अंदर, मालूम पड़ जाए पब्लिक को। एक अचानक आ गया लड़का गांव का अभी, पांच-छह लोग आए थे। ठेठ फलोदी जो बॉर्डर पर है हमारे, जहां अकाल सूखे तो सदियों से पड़ते गए थे। वहां का लड़का क्या बोल रहा था, गांव में क्या स्थिति है। तो स्थिति बड़ी नाजुक है। ये मैं कह सकता हूं।

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जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत जोधपुर एयरपोर्ट के नए भवन को लेकर पूछे प्रश्न का उत्तर : जोधपुर एयरपोर्ट का नया भवन बना है पर पहली बरसात में ही पानी भर गया तो लोगों में बहुत चर्चा रही इसकी। एयरफोर्स से संबंधित झगड़ा जो दो साल से झगड़ा नहीं मिट रहा था, उसको निपटाने में कांग्रेस सरकार का बहुत बड़ा योगदान है। जमीनों का आदान-प्रदान नगर निगम से करना था, वो भी हमने करवाया। ये उस वक्त की बात है। भवन बनने के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। हाई कोर्ट की ऐसी स्थिति बन गई है, पार्लियामेंट की बन गई है। तो कहीं न कहीं ऐसी स्थिति है कि ठेकेदारों पर अंकुश होना जरूरी है। पार्लियामेंट भवन में पहली बरसात के अंदर पानी पहुंच गया, तो ये स्थिति है, अब हाई कोर्ट बिल्डिंग में भी पहुंच गया। ऐसा मुझे एहसास है, मैं मालूम कर रहा हूं कि कोई जमाने के अंदर हाई कोर्ट बिल्डिंग हो या लोअर कोर्ट बिल्डिंग हो, सरकारें बनाती थीं और वो हैंडओवर करती थीं कोर्ट को, जुडिशरी को। उससे रेस्पोंसिबिलिटी फिक्स होती थी अपने आप ही। अब क्या हुआ, पूरा देखरेख हाईकोर्ट प्रशासन का ही था तो ऐसी स्थिति बन गई कि आज शिकायतें ही शिकायतें हो रही हैं। मुझे पता नहीं अन्य राज्यों में क्या हो रहा है, अन्य राज्यों में भी अगर सब जगह जुडिशरी वाले खुद बना रहे हैं, तो कोई दिक्कत तो नहीं है। यहां पर भी अगर मान लो वो सिस्टम ठीक है, तो हम स्वागत करेंगे। तो मेरा मानना है कि प्रशासनिक काम सरकार का डिपार्टमेंट देखे। उनकी जिम्मेदारी फिक्स हो, तो ये स्थिति नहीं बने। दुख होता है कि नई बिल्डिंग है और ऐसी स्थिति बन जाती है

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आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए : देखिए, एक तो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति बड़ी नाजुक है। एक तरफ तेल और गैस को लेकर जो स्थिति बनती जा रही है, तो राहुल गांधी ने पहले ही वॉर्न किया था कि ये स्थिति बनेगी। हमेशा सरकार लेट कर देती है। तैयारी समय पर करनी चाहिए, क्योंकि वॉर हो गया है, तो वॉर के कारण ही ये स्थिति बनी है। तो आपके पास जस्टिफाई करने का कारण है, खाली इतना ही कि आप जनता को विश्वास में लो कि भाई देखिए, वॉर हो गया, हमारी मजबूरी है, और यहाँ ये कमियाँ रह गईं या नहीं रही हैं, हम प्रयास कर रहे हैं कि जनता को कोई तकलीफ नहीं आए, कम से कम तकलीफ आए। अब जो प्रधानमंत्री ने हाउस में बोला, वो तैयारी उस ढंग से नहीं की। आलोचना के शिकार भी हुए। ये पूरा अंतर्राष्ट्रीय युद्ध की जो स्थिति बनी है, अब किस दिशा में जाएगा, कोई नहीं जानता। और दूसरा, हमारे ट्रंप जो हैं, मिस्टर ट्रंप, पता नहीं जिस प्रकार उनका व्यवहार है मोदी जी के प्रति,कभी कहते हैं मेरे वो दोस्त हैं, कभी कहते हैं कि वो मुझे खुश करने में लगे हुए हैं, कभी कहते हैं कि मैं उनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूँ। आज तक मैंने किसी भी राष्ट्रपति को दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बारे में ऐसे कमेंट करते नहीं सुना। वो वेनेजुएला के प्रेसिडेंट को किडनैप कर सकता है एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के प्रेसिडेंट को किडनैप कर ले और दुख इस बात का रहा कि दुनिया के किसी मुल्क ने निंदा नहीं की, कंडेम नहीं किया, दुख प्रकट नहीं किया। ये दुनिया के लिए बहुत-बहुत बुरा संकेत है। जो हुआ है, सब जानते हैं। अब जो स्थिति बनी है, उसमें पाकिस्तान पंचायती कर रहा है। मतलब आप बताइए, पाकिस्तान की क्या हैसियत है? हमारे देखते हुए भी हमने देखा—65 के वॉर में क्या थी, 71 में क्या थी, कारगिल में क्या थी हमेशा मुँह की खानी पड़ी। वो आज जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर के अंदर भी, तुर्की उनका साथ दे रहा था, हमारे साथ कोई नहीं था। इस प्रकार के हालात में देश चल रहा है। समझना चाहिए, कहाँ पाकिस्तान और कहाँ हिंदुस्तान है। उसके बावजूद भी वो समझौते की बात कर रहा है, डायलॉग वो करवाएंगे। और दुर्भाग्य से हमारे विदेश मंत्री जो हैं, उनका ये कहना कि वो दलाली का काम कर रहा है, ये बहुत ही गलत है। मैं समझता हूँ कि कोई विदेश मंत्री किसी मुल्क के लिए ऐसी भाषा काम में नहीं ले सकता। दलाली क्या होती है, पता नहीं। मैं तो मानता हूँ कि हो सकता है उनके मुँह से स्लिप ऑफ टंग हुआ हो। अगर ऐसा हुआ है तो अलग बात है, उनको सॉरी फील करना चाहिए, नहीं तो मैं समझता हूँ कि देश के अंदर उनकी बहुत आलोचना होनी चाहिए। आप कैसे कह सकते हो कि दलाली कर रहा है? दलाली होता क्या है? अगर दुनिया के मुल्कों में शांति स्थापित होती है हिंसा तो हिंसा ही होती है तो मुल्क कहाँ जाएगा? तीसरे विश्व युद्ध के रूप में जाएगा? थर्ड वर्ल्ड वॉर के रूप में जाएगा? कहाँ जाएगा, कोई नहीं जानता। ऐसे खतरनाक हालात में, जब दुनिया में आग लगी हुई है, वहाँ शांति स्थापित करने के लिए हर वर्ग को, हर मुल्क को प्रयास करना चाहिए। और उसके अंदर आप कह रहे हो कि दलाली कर रहा है ये बात मुझे समझ में नहीं आई। ऐसे हालात में देश चल रहा है। और लोग सब चिंतित हैं कि हमारी स्थिति कहाँ थी और कहाँ पहुँच गई। कहाँ इंदिरा गांधी का जमाना था—90 हजार से अधिक सैनिकों को, जनरल, कर्नल, मेजर को यहाँ अरेस्ट करके इंडिया में ले आए थे। 90 हजार से अधिक लोगों को, लगभग एक लाख लोगों को। और आज देश की हमारी स्थिति क्या है, आपके सामने है। ये जो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति हुई है।

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आज प्रातः मीडिया से बातचीत की : सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गाँधी की आगामी पुस्तक को लेकर पेंगुइन के विथड्रॉ होने संबंधी प्रश्न का उत्तर: प्रकाशक आनाकानी कर रहा है, बहानेबाजी कर रहा है। हमने पहले ही कहा था कि हो सकता है इनके ऊपर पीएमओ का दबाव हो, सरकार का दबाव हो, वरना जो इनकी मूल संस्था है पेंगुइन की वर्ल्ड के अंदर, वह तैयार है छापने के लिए और छाप भी रहा है और अभी भी छाप रहा है। दुनिया में छप सकती है, इंडिया में क्यों नहीं छप सकती वो किताब? तो इनकी पोल खुल गई पेंगुइन की, जो आर्गुमेंट दे रहे थे कि हमारी मंशा यह नहीं थी, मंशा वो नहीं थी, वो तमाम वो एक्पोज हो गए हैं। अभी तक आरोप जब लगे पीएमओ पर लगे, सरकार पर लगे तो सरकार की तरफ से एक शब्द नहीं बोला गया है, जिसका मतलब उन्होंने स्वीकार किया आरोप को क्योंकि सोनिया गांधी कोई मामूली नेता नहीं है। वो नेता प्रतिपक्ष रही हैं लोकसभा के अन्दर, कांग्रेस प्रेसिडेंट रही हैं 22 साल तक, लंबे समय से राजनीतिक जीवन है। यूपीए गवर्नमेंट में एनएसी की चेयरपर्सन रही थीं, और आप सबको मालूम है कि किस प्रकार क्रांतिकारी जो कदम उठाए गए थे RTE, फूड सिक्योरिटी एक्ट, RTI, नरेगा ये सब क्रांतिकारी काम थे। पूरे देश में उनके व्यक्तित्व को लेकर, उनके कामों को लेकर, उनकी सोच को लेकर, उनके व्यवहार को लेकर, राजीव गांधी जी जबसे शहीद हुए हैं, उन्होंने इंदिरा गांधी को अपने बाहों में खोया है। इंदिरा जी के लिए गोलियां लगी थी सबसे पहले सोनिया गांधी पहुंची थीं वहां, उनकी बांहों में उन्होंने दम तोड़ा है। वो घटना उसके बाद में लगभग पाँच साल बाद में अपने पति को खोना राजीव जी को, तब भी हिम्मत के साथ में जब ऐसी स्थिति बनी कांग्रेस कमजोर हो रही थी तो हम सबके आग्रह पर उन्होंने आना स्वीकार किया पार्टी के अंदर और लंबे समय तक अध्यक्ष रहकर उन्होंने बता दिया कि एक इटली की रहने वाली महिला वो उन्हें जिस प्रकार से जिंदगी जी यहां पर भारतीय नारी की संस्कृति संस्कार को अपना करके, उस वक्त लोग आलोचना करते थे क्या कोई मिलता नहीं आपको जो विदेशी को आप कांग्रेस प्रेसिडेंट बना रहे हो, अरे कांग्रेस की स्थापना भी की वो विदेशी ने करी थी 1885 के अंदर, तो विदेशी-देशी क्या होता है, जो देश के लिए अपने आप को समर्पित कर दे वो फिर देश विदेश क्या होता है ,पर इन्होंने जो काम किया आज पूरा देश मुल्क जो है इनकी बात तो नहीं कर सकता जो आरएसएस के और बीजेपी, उसमें भी अधिकांश लोग ऐसे होंगे जो प्राइवेटली तारीफ करते हैं सोनिया गांधी जी के व्यक्तित्व की कृतित्व की। उस महिला ने पहली बार हिम्मत करी है, नेहरू खानदान का कोई व्यक्ति कभी नेहरू जी ने नहीं लिखी आत्मकथा, इंदिरा गांधी जी ने नहीं लिखी, राजीव गांधी ने नहीं लिखी और लोगों ने लिखी होगी उनके बारे में, टिप्पणी लिखी होंगी, उनके लेखन किया होगा,पर आत्मकथा खुद ने नहीं लिखी। सोनिया गांधी जी पहली हैं परिवार से जिन्होंने सोच समझकर के, जो भ्रम फैलाया गया है, जिस प्रकार का भ्रम फैलाया गया एनडीए गवर्नमेंट आने के बाद मोदी जी ने, इनके कुनबे ने, चाहे RSS हो चाहे BJP हो, पंडित नेहरू के बारे में क्या कहा गया है, किसके बारे में क्या नहीं कहा गया, वो देश भूल नहीं सकता। ऐसे शब्द काम में लिए गए मैं वापस रिपीट नहीं करना चाहता। मोदी जी ने चाहे सोनिया जी के बारे में हो, चाहे वो किसी नेता के परिवार के बारे में हो, पर इन्होंने ग्रेस रखा , उनका कोई जवाब नहीं दिया, ना राहुल गांधी ने दिया जवाब, क्या क्या इनके बारे में षड्यंत्र किया गया उनकी इमेज को डाउन करने के लिए। ये परिवार ऐसा है,पूरे देश में आलोचना कभी हुई होगी इन्होंने कभी भी आलोचना का जवाब नहीं दिया क्योंकि इनको विश्वास है देशवासियों पर, कांग्रेस जनों पर। कितना ही बकवास कर लें कितना ही आरोप लगा लें, झूठे सच्चे कुछ भी कर लें, जनता और कांग्रेसजन स्वीकार नहीं करेगा। वो सिद्ध कर दिया है अभी और इन्होंने कि जो पुस्तक लिखी जा रही है, आत्मकथा लिखी जा रही है ,इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और जो आप कह रहे हो कि नई कंपनी आ रही है प्रकाशक नया आ रहा है, ये तो जब से मालूम पड़ा कि पेंगुइन विथड्रा कर गया,प्रकाशक, तब से ही लोग ऑफर करने लग गए उसी दिन से बड़े-बड़े प्रकाशकों ने, इसलिए जो आप कह रहे हो कि नया प्रकाशक आ रहा है नई बात नहीं है, आएगा, किताबें छपेगी दस नवंबर को ये रिलीज होगी।

Ashok Gehlot

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