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बांकीपुर में भाजपा की वोट चोरी जारी है लेकिन फिर भी भाजपा हारेगी

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बिल्कुल! भाजपा जब INDIA गठबंधन पर सवाल उठाती है, तो उसे अपने पुराने “आशिकी के चिट्ठे” भी खोलकर देखने चाहिए। भाजपा की पुरानी ‘आशिक़ी’ और राजनीतिक अवसरवादिता 1.1999-2004: NDA में रहते हुए भाजपा के साथी राज्य में दुश्मन थे! •TMC (ममता बनर्जी) केंद्र में भाजपा की साथी थी, लेकिन बंगाल में भाजपा के खिलाफ लड़ी। •BJD (ओडिशा) राज्य में भाजपा से सीटों को लेकर लड़ती रही, लेकिन केंद्र में साथ थी। •JDU (बिहार) के साथ भी कई बार सीटों को लेकर झगड़े हुए। •लोक शक्ति (कर्नाटक) भाजपा के खिलाफ लड़ी, लेकिन केंद्र में भाजपा के साथ थी। 2.2014 के बाद भी भाजपा की ‘दोहरा प्रेम नीति’ जारी •AIADMK (तमिलनाडु) केंद्र में भाजपा की सहयोगी थी, लेकिन राज्य में हमेशा अलग लड़ी। •JDU (बिहार) भाजपा के साथ आई, छोड़ी, फिर आई, फिर छोड़ी – ये किस तरह का गठबंधन है? •शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा की साथी थी, लेकिन बीएमसी चुनावों में भाजपा के खिलाफ लड़ी। 3.“सबका साथ, पर चुनावी स्वार्थ” •भाजपा जब सत्ता में होती है तो अपने पुराने दुश्मनों को भी दोस्त बना लेती है, और जब विपक्ष में होती है तो गठबंधन को ‘अवसरवादी’ कहती है। •भाजपा ने PDP (जम्मू-कश्मीर) से गठबंधन किया, जिसे वो खुद ‘देशविरोधी’ कहते थे। •मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, गोवा में भाजपा ने जनमत को दरकिनार कर सत्ता हथियाई। भाजपा प्रवक्ताओं के पास कोई जवाब नहीं बचता, जब उनसे ये सवाल पूछे जाते हैं: ✅ अगर भाजपा का केंद्र और राज्य का अलग गठबंधन करना जायज़ था, तो INDIA गठबंधन के लिए क्यों गलत? ✅ अगर भाजपा के लिए गठबंधन राजनीति एक रणनीति है, तो विपक्ष का गठबंधन अवसरवाद कैसे माना जा सकता है? ✅ भाजपा बताये कि जब वो खुद अलग-अलग राज्यों में गठबंधन बनाती और तोड़ती रही, तो उसे अब गठबंधन धर्म की याद क्यों आ रही है? “भाजपा का इतिहास बताता है कि उसे सिर्फ सत्ता से प्यार है, विचारधारा और गठबंधन से नहीं!”

Nighat Abbass🇮🇳

57,541 次观看 • 1 年前