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Ana Sayfaya Dön

भाजपा किसी की सगी नहीं है… कल तक भाजपाइयों की अपनी ही ‘परिषद’ बनाम अपनी ही ‘वाहिनी’ हो रहा था, अब अपने तथाकथित राजनीतिक सहयोगी के ख़िलाफ़, उनके आवासों तक पर प्रदर्शन करवा रही है। भाजपाइयों की ‘दरारवादी सोच’ अब अपने गुट में भी दरार डाल चुकी है। भाजपा...

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धिक्कार है ऐसी भाजपाई राजनीति और सत्ता की भाजपाई भूख पर जो सियासत के लिए देश के भाईचारे के बीच दंगा कराने की साज़िश करती है। बहराइच हिंसा के मामले में हर दिन नये खुलासे हो रहे हैं, जिनसे भाजपा मुँह दिखाने लायक नहीं रही है। भाजपा के विधायक ही भाजपाइयों पर साज़िश करने की एफ़आइआर करा रहे हैं और दंगाई छुपे कैमरे के सामने सच उगल रहे हैं। भाजपा के जो थोड़े बहुत समर्थक और वोटर बचे हैं, अब तो भाजपा का ये षड्यंत्रकारी और हिंसक रूप देखकर वो भी शर्मिंदा हैं। भाजपा ने अपने समर्थकों की भावनाओं को गुमराह करके, उनका इस्तेमाल अपनी सत्ता को बचाए-बनाए रखने के लिए किया है। सच तो ये है कि भाजपा अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ षड्यंत्र कर रही है। भाजपा भाजपाइयों से दंगे कराकर उन्हें ही फँसा दे रही है। तभी तो भाजपा का विधायक, भाजपाइयों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट लिखवा रहा है। अब तो भाजपाई भी कहने लगे हैं : भाजपा किसी की सगी नहीं। यूपी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

451,167 görüntüleme • 1 yıl önce

ये वीडियो भाजपा के उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों को देखकर अपने ऊपर शर्मिंदा होना चाहिए, जो भाजपा राज में ‘अमृतकाल’ की बात कर रहे हैं। दरअसल भाजपा अपने भोले भाले समर्थकों के भोलेपन का भी दुरुपयोग, अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए, दुष्प्रचार के लिए करती है। वो पढ़े-लिखे लोग भी एक बार दिल पर हाथ रखकर सोचें कि साम्प्रदायिक राजनीति की घुट्टी पिलाकर भाजपा और उनके संगी-साथियों ने किस तरह उनके ज्ञान और विवेक को बंधक बना लिया है। भाजपा ऐसे लोगों को भी अपने झूठ के प्रचार की खेती में, नफ़रती व्हाट्सएप मैसेज और मिथ्या-संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करती है। सबसे पहले तो भाजपाई ही ये याद रखें कि ‘भाजपा किसी की सगी नहीं है’ और भाजपा ‘इस्तेमाली’ पार्टी है। भाजपा एक दिन उनको भी इस्तेमाल करके छोड़ देगी, तब वो कहीं के नहीं रहेंगे। भाजपा का साज़िशन फ़ार्मूला ही है : ‘पहले इस्तेमाल करें, फिर बर्बाद करें !’ भाजपा जाए तो खाद आए! किसान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

81,025 görüntüleme • 1 yıl önce

आलू के दाम गिरने से बर्बाद हो रहे किसानों के लिए किसान और खेती विरोधी भाजपा सरकार पूरी तरह लापरवाह होकर बैठी है और उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। भाजपा को सिर्फ़ अपनी राजनीतिक सत्ता से मतलब है। भाजपा के नेता चुनाव प्रचार के लिए तो उपलब्ध हैं लेकिन किसानों की परेशानी-दिक़्क़तों के लिए उनके पास समय नहीं है। भाजपा का पूरा खेल ही यही है कि पैदावार के दाम इतने कम करवा दो कि किसानों की लागत तक न निकले और वो थक-हार कर खेतीबाड़ी का काम ही छोड़ दें और अपनी ज़मीनें भाजपा के समर्थक अमीरों को कौड़ियों के दाम बेचने पर मजबूर हो जाएं और फिर ये भाजपाई पैसेवाले, किसान को उसके अपने खेत में ही मालिक से मजदूर बना दें। भाजपाइयों की साज़िश ही ये है कि वो किसानों की ज़मीन हड़प कर बड़े स्तर पर खेती करके खाद्यान्न और फसलों की पैदावार को अपने हाथों में ले लें और फिर मनमानी क़ीमत जनता से वसूलें। इसीलिए भाजपा कभी भू-अधिग्रहण बिल लाती है, कभी तीन कृषि काले क़ानून या फिर भारत की खेती-कारोबार के लिए प्राणघातक अमेरिकी डील करती है। यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब कि आज के खेत का मालिक किसान, कल को अपने ही खेत की पैदावार को ख़रीदने पर मजबूर हो जाएगा। भाजपा दल नहीं दलाल है।

Akhilesh Yadav

79,939 görüntüleme • 6 ay önce

भाजपा और उसके संगी-साथी पराजय स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और अब उनमें ये डर बैठ गया है कि देश की 95% आबादी से बना पीडीए समाज जब भाजपा की करतूतों के ख़िलाफ़ एक साथ खड़ा हो जाएगा तो उनका क्या होगा। उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है। वो सदैव की तरह भूमिगत होकर बिलबिला रहे हैं। इन नकारात्मक लोगों ने आज़ादी से पहले भी देश से ग़द्दारी की और अंडरग्राउंड रहकर देश को ग़ुलाम बनानेवालों की ग़ुलामी की, स्वतंत्रता सेनानियों के ख़िलाफ़ चंद पैसों और वज़ीफ़े के लालच में मुख़बिरी का तुच्छ काम किया। इन्होंने पहले भी देश को धोखा देकर अकूत दौलत इकट्ठा की और अब भी कर रहे हैं। न इन्होंने तब हिसाब दिया था और न अब दे रहे हैं। देश और समाज के लिए एक गिरोह के रूप में ये एक विशाल ‘विषग्रंथी’ है। भाजपाइयों का जैसा संस्कार है, वैसा ही उनका शब्दकोश है और वैसी ही अभिव्यक्ति। भाजपाइयों की वर्चस्ववादी सोच पीडीए को सदैव अपशब्दों से संबोधित करती आई है, इसमें कुछ नया नहीं है। भाजपा ने अपनी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से जो अपमानजनक बात पोस्ट की है वो राजनीतिक नैतिक पतन का ऐसा दस्तावेज़ है जो देश के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है। भाजपाइयों की घृणित मानसिकता से इसके अतिरिक्त कुछ और अपेक्षा भी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे विषैली मानसिकता वाले लोगों को देखकर तो आस्तीन का साँप भी ख़ुद को डसकर आत्महत्या कर लेता है। दरअसल जब-जब पीडीए समाज के किसी भी व्यक्ति का ऐसा अपमान होता है, पीडीए एकता और संकल्प उतना ही दृढ़ होकर उभरता है। पीडीए की एकता और एकजुटता को इससे और भी बल मिला है। आज भाजपा ने एक ऐसी लकीर खींच दी है कि भाजपा में शामिल पीडीए समाज के सांसद, विधायक, पार्षद, पदाधिकारी और सामान्य सदस्य तक का राजनीतिक भविष्य शून्य हो गया है। अब वो किस मुँह से अपने-अपने समाजों के सामने जाएंगे। पीडीए ने तो 2024 के आम चुनाव में ही भाजपा में शामिल ऐसे नेताओं का चुनावी बहिष्कार करके उन्हें हार का और बाहर का रास्ता दिखा दिया था, अब तो पीडीए समाज के बीच उनकी हमेशा के लिए मानसिक नाकाबंदी हो जाएगी। भाजपा की ये गहरी चाल है कि वो पीडीए समाज के अपने सभी नेताओं की सियासत की नींव खोद दे और उनकी राजनीति हमेशा के लिए ख़त्म कर दे। भाजपा का भ्रष्टाचार और आपसी मतभेद ही उसे अंतिम चरण में ले आया है, जहाँ ये खलनायक आपस की गैंगवार में एक-दूसरे का काला चिट्ठा खोलकर, एक-दूसरे को ही ख़त्म कर देंगे। इतिहास गवाह है कि जैसे ही नकारात्मक शक्तियां हारने लगती हैं वो टूटने लगती हैं, इनके साथ भी ऐसा ही होना शुरू हो गया है और आख़िरकार ये होगा भी क्योंकि इन जैसे अवांछित लोगों के लिए इतिहास अपनी चाल नहीं बदलेगा। देखना ये है कि ये दग़ाबाज़ लोग देश छोड़कर भागते हैं या अपने काले अतीत को दोहराते हुए भूमिगत होते हैं, डरपोकों के पास वैसे भी ज़्यादा विकल्प नहीं होते हैं।

Akhilesh Yadav

48,668 görüntüleme • 5 ay önce

जनता अब भाजपाइयों का भाषण सुनने के मूड में नहीं है। अंहकार विवेक हर लेता है। जो दूर से ये धारणा बनाये बैठे थे कि ‘कोई’ ईमानदार है; भ्रष्ट नहीं है; जन-सेवा में निस्वार्थ भाव से लगा है; भौतिक-लालच से परे है, अब तथाकथित माननीय का ‘म्यूट कर दिया गया वो वीडियो’ देखकर, उनका भी सारा भ्रम टूटकर चकनाचूर हो गया है। जो व्यक्ति सैकड़ों कैमरों के सामने किसी माँ की गोद उजड़ जाने के सबसे बड़े दुख के क्षण में भी एक दुखी परिवार को सांत्वना देने की जगह धमकी भरे लहजे में, अपने कठोर हाव-भाव के साथ बोल रहा हो, वो कितना हृदयहीन, संवेदना शून्य, निष्ठुर और निर्मम होगा, अब ये बात सबके सामने खुल गई है। इसे ही क्रूर-व्यवहार कहते हैं, ये बेहद अमानवीय है। अब इनके झूठे नायकत्व का सारा मायाजाल तार-तार हो गया है। सबसे ज़्यादा ठेस इनके सबसे बड़े उन प्रशंसकों और समर्थकों को लगी है जो इनकी ‘मिथ्या दिव्यता’ के गुणगान करते नहीं थकते थे। वो अब अपने घर की महिलाओं को ही मुँह दिखाने लायक नहीं बचे, अन्य महिलाओं का सामना करने की तो बात ही बहुत दूर है। वो जब ये सोचकर देख रहे हैं कि कहीं ऐसी दुखद घटना उनके परिवार के साथ घटती और उनके घर की किसी ‘माँ’ के साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता तो क्या होता, ये विचार करके ही वो काँप जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि वो किस पाताली कूप में कूदकर अपनी शर्मिंदगी छिपाएं। याद रखा जाए इनकी कटु-वचन वाणी का ये पहला उदाहरण नहीं है। पत्रकार से लेकर अधिकारी तक पहले भी सरेआम इनका शिकार हो चुके हैं। जिसके लोक व्यवहार में खोट होता है, वो अकेले में कैसा व्यवहार करता होगा, जनता ये समझ गई है। अब क्या तथाकथित माननीय ये कहेंगे कि पूरी दुनिया में फैल चुका उनका वीडियो AI जेनरेटेड है। सच तो ये है कि अगर जनता चाहे तो AI से होंठों को पढ़कर ये बता सकती है कि ‘वास्तव में उन्होंने किन अपशब्दों का इस्तेमाल किया था’। जिसका अपने वचन-व्यवहार पर नियंत्रण नहीं वो प्रदेश पर क्या नियंत्रण करेगा और दिल्ली पर राज के सपने क्या देखेगा। इनके इस कुकृत्य की वजह से अब प्रदेश, देश, दुनिया की कोई महिला चाहे वो माँ हो या बहन, वो अब भाजपा का पूर्ण बहिष्कार करेगी। इस घटना ने संपूर्ण विश्व में भाजपा की दिखावटी, सजावटी, बनावटी छवि को मिट्टी में मिला दिया है। अब भाजपा इनको पद से हटा भी देगी तो भी ‘आधी आबादी’ के वोट नहीं पायेगी क्योंकि ‘बात जब माँ की आती है तो हर सरहद मिट जाती है।’ जनता ने भाजपाइयों का ‘नारी वंदन’ का सच कैमरे के सामने देख लिया है। भाजपा और उनके संकीर्ण सोच के संगी-साथी सभी लोगों की सामंती सोच में जब नारी के लिए ही कोई स्थान नहीं है तो नारी के मान-सम्मान के लिए क्या होगा। अभूतपूर्व निंदनीय! भाजपा हटाओ, संवेदना बचाओ! माँ का दर्द कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

171,772 görüntüleme • 2 ay önce

“ये हम नहीं हमारी लाशें खड़ी हैं।” भाजपा की सरकार के ख़िलाफ़ दिया गया एक व्यापारी के परिवार का ये आक्रोशित कथन, भाजपा के लिए डूब मरने से कम नहीं है। दरअसल अब समाज का हर वर्ग ये समझने लगा है कि भाजपा केवल चंद अरबपतियों और विशाल कारपोरेट की ही हितैषी है और छोटे कारोबारियों को ख़त्म कर देना चाहती है। भाजपा इसके लिए बहाना ये बनाती है कि छोटे व्यापारी या दुकानदार टैक्स चोरी करते हैं। आज देशभर के व्यापारी संघ भाजपा से एक सवाल कर रहे हैं कि ‘जब देश और दुनियाभर के ये बड़े-बड़े व्यापारी नहीं थे तो क्या देश को टैक्स नहीं मिलता था?’ सच सिर्फ़ इतना है कि भ्रष्ट भाजपाई सारा व्यापार कुछ ‘महा-मुनाफ़ाख़ोरों’ के हाथों में दे देना चाहते हैं, जिससे उन्हें अरबों का राजनीतिक और व्यक्तिगत चंदा एक मुश्त मिल सके और वो इस ‘महा-भ्रष्टाचार’ के सहारे पैसा बाँटकर सरकार बनाते रहें लेकिन अब ये ‘कुटिल भाजपाई चाल’ हर व्यापारी और उनके परिवार के लोग समझ गये हैं क्योंकि काम-कारोबार ख़त्म होने से उनके पालन-पोषण, जीवन-यापन का सवाल खड़ा हो गया है। जिनके परिवार हैं वो ही ये दर्द समझ सकते हैं कि परिवार की भूख, घर के बड़े-बुजुर्गों की दवाई-देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और घरवालों की छोटी-छोटी इच्छाओं की पूर्ति न कर पाने का दुख-दर्द क्या होता है। जिनके परिवार नहीं हैं वो अपने से आगे की कभी सोचते ही नहीं हैं। भाजपाई की यही कमीशनख़ोरी और महा-मुनाफ़ाख़ोरों को दी गई खुली छूट ही हर चीज़ के दाम बढ़ने-महंगाई का कारण है। इससे माँग भी घटती जा रही है, क्योंकि भाजपाई की कारोबार और नौकरी विरोधी गलत नीतियों की वजह से फैली बेकारी-बेरोज़गारी के कारण बाज़ार में मंदी आ गयी है और ट्रेड डील के बाद तो बंदी आ ही जाएगी। इसीलिए अब से हर चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ा झटका सड़कों पर जूझ रहे रेहड़ी-पटरी और ठेलेवालों से लेकर छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, छोटे-बड़े कल-कारखानों और स्थानीय उद्यमियों और उद्योगपतियों से ही मिलेगा। भाजपा राज में ‘मंदी’ और ‘बंदी’ के सिवा देश के कारोबार को कुछ और हासिल नहीं हुआ है। भाजपा हटाओ, व्यापार बचाओ!

Akhilesh Yadav

63,816 görüntüleme • 6 ay önce

फ़र्ज़ी नियुक्ति करनेवालों ने अपने अपराध को मिटाने के लिए भाजपा से एक डील की थी। मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा के एजेंट बनकर बूथ पर नियुक्तियों का जो खेल खेला गया था उसके बदले में उनके ऊपर लगे आरोप वापस लिये जाने थे। भाजपा ने मतलब निकल जाने के बाद अपना पुराना फ़ार्मूला अपनाया ‘पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो’। भ्रष्टाचार का भाईचारा निभानेवाले ये भूल गये कि भाजपा किसी की सगी नहीं है। भाजपा और उनके संगी-साथियों के गोरखधंधे और कुकर्मों की परतें रोज़ उजागर हो रही हैं। भाजपा को अब कोई नहीं बचा सकता क्योंकि उनका चुनावी घपला अब और नहीं चलनेवाला। जनता सिर्फ़ उन्हें हराएगी ही नहीं, हमेशा के लिए हटा भी देगी।

Akhilesh Yadav

43,365 görüntüleme • 10 ay önce

दलितों पर अत्याचार के मामले में भाजपा सरकार के समय में यूपी नंबर 1 बन गया है। सवाल ये है कि दलितों पर हमलों और दलितों के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा अपराधों में, वो भी ख़ासतौर से दलित महिलाओं के उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की वारदातों में उप्र, राजस्थान, मप्र, बिहार, ओड़िशा, महाराष्ट्र जैसे वो ही राज्य क्यों है, जो भाजपा शासित हैं। भाजपा मूलतः परम्परागत प्रभुत्ववादियों की पार्टी है और वर्चस्ववादी भाजपाइयों की बुनियादी सोच सामंतवादी है, जिसमें ग़रीब, वंचित, दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, आधी आबादी (महिलाओं) और आदिवासियों के लिए सिर्फ़ अपमान और ज़लालत के अलावा और कुछ नहीं है। मन, मानस और आचरण में भाजपाई आज़ादी से पहले की ही सोच में जी रहे हैं। इसीलिए भाजपाई संविधान के भी विरोधी हैं क्योंकि भाजपा में संगठन और सरकार के प्रमुख पदों पर हमेशा ही केवल कुछ ख़ास लोग ही विराजमान रहते हैं और बाक़ी दौड़-भाग, डंडा-झंडा, बैनर-दरी के काम औरों को दे दिये जाते हैं। भाजपा के अंदर पदनाम भले किसी दलित, पिछड़े को मिल जाए पर ‘पदमान’ कभी नहीं मिलता। उनके नाम से चुनाव लड़े जाते हैं लेकिन मुख्यमंत्री की तो छोड़ो उन्हें और भी कोई कुर्सी नहीं दी जाती है। अगर सच में कोई अपने ज़मीर की आवाज़ सुने तो वो ऐसे लोगों के हाथ न तो उत्पीड़ित हो और न ही अपमानित, ये बात अलग है कि वो अपने स्वार्थ और लालच की वजह से समझौता कर रहा है। दलित कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

100,347 görüntüleme • 1 yıl önce

सत्तापक्ष से पैसा लेकर ‘डीपफ़ेक’ के द्वारा झूठे प्रचार का ‘अपराध’ करनेवालों की सूची जब से सरेआम हुई है, तब से डर के मारे इनके संचालक और उनके कर्मचारी भूमिगत-से हो गये हैं। अगर सत्ता की मिलीभगत न होती तो अब तक डीपफ़ेक वाले डीपजेल में होते। अब ग़ैरक़ानूनी काम करनेवाली ये गुनाहगारी कंपनियाँ जेल जाने के डर से बचने लिए अपना नाम बदलने के चक्कर में सत्ताधारियों के चक्कर काट रही हैं। वैसे जिन्होंने पैसे देकर ये काम करवाया है या कहिए कि ऐसी लालची कंपनियों को फँसाया है, वो तो स्वयं ही नाम बदलने के एक्सपर्ट हैं, ये कंपनियाँ फिर से उन्हीं की शरण में जाएं। वैसे सूची ज़ाहिर होने के बाद इन्हें कोई बचाएगा नहीं, इनके संचालकों और कर्मचारियों पर अगर सरकार की नहीं, तो जनाक्रोश और अपनी अंतरात्मा के ईमान की गाज तो गिरेगी ही। भाजपा इन्हें दूर से बाँस से भी नहीं छूएगी क्योंकि काम निकल जाने के बाद ये अपनों को नहीं पहचानते हैं तो फिर पैसों की लालची ऐसी कंपनियों को देखकर तो आँख क्या पूरा मुँह मोड़ लेंगे, वैसे भी सब जानते हैं, भाजपा किसी की सगी नहीं है। बेईमान कंपनियों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। अब उनके कर्मचारी अपने को बचाने के लिए इस्तीफ़े भी देंगे, उनके खाते भी सीज़ होंगे और उनके पढ़े-लिखे संचालक जेल में शर्म से सिर झुकाए अपना जीवन गुज़ारेंगे। उनके बच्चे, परिवार और समाज वाले लोग उनसे पूछेंगे कि ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि इतनी प्रतिभा के बाद भी वो अवैधानिक काम कर रहे थे। वो तो एक शर्मसार जीवन बिताएँगे ही, अपनों को भी पूरी ज़िंदगी के लिए शर्मसार जीवन बिताने के लिए मजबूर कर देंगे। वैसे तो इस महाखुलासे के बाद वो पढ़े-लिखे भी बहुत शर्मिंदा होंगे, जो भाजपा द्वारा प्रचारित झूठ को सच मानकर, विपक्ष को बदनाम करने और ऐसे वीडियो को सोशल मीडिया पर बिना जाँच-परख के फ़ारवर्ड करने की साज़िश में अपने भोलेपन की वजह से शिकार हुए हैं। भाजपा लोगों के भोलेपन का इस्तेमाल करने में शातिराना उस्तादी रखती है। आशा है ऐसी जनता अपने अपराधबोध से उबरने के लिए आगे से भाजपा की ऐसी किसी साज़िश का हिस्सा नहीं बनेगी क्योंकि क़ानूनन गुनाहगार तो वो भी है जो किसी को बदनाम करने की बदनीयत से प्रचारित किसी सूचना या समाचार को आगे प्रसारित करता है। भाजपा ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए जानबूझकर जिस भोली-भाली जनता को अपराधी-सा बना दिया है, अब वही जनता भाजपा को हराकर, हटाकर सबक सिखाएगी। भाजपा ने अपने ही समर्थकों के साथ सिर्फ़ विश्वासघात ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी भी करी है और अपनी चार सौ बीसी से क़ानूनी रूप से उन्हें अपने झूठे प्रचार का हिस्सा बनाकर एक अपराध में संलिप्त भी कर दिया है। भाजपा से दूरी ही उनको बचा सकती है। हम माननीय न्यायालय से मांग करते हैं कि वो ‘डीपफ़ेक’ खुलासे का स्वतः संज्ञान लेकर, ऐसा अवैधानिक काम करवानेवाले राजनीतिक दल, अधिकारियों और ऐसा ग़ैरक़ानूनी काम करनेवाली कंपनियों के मालिकों-संचालकों के ख़िलाफ़ जाँच और दंड की प्रक्रिया तत्काल शुरू करें।

Akhilesh Yadav

179,015 görüntüleme • 1 yıl önce

चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’ इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है। सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक। वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या? इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं। अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया। भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी। देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

159,415 görüntüleme • 4 ay önce

भाजपा भर्ती नहीं छलावा करती है और जब एक छल पकड़ा जाता है, तो भाजपाई दूसरा धोखा ले आते हैं। अब यूपी PCS और RO-ARO की परीक्षा में दो शिफ़्ट की भाजपाई साज़िश को कैंडिडेट्स भाँप गये हैं, इसीलिए उसके ख़िलाफ़ आंदोलनरत हैं। हम उनकी आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाते हैं और उनकी जायज़ माँग के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर खड़े हैं। दरअसल ये भाजपा की चाल है कि युवाओं को सरकारी नौकरी न मिले और वो बेरोज़गार ही रहें और एक दिन सस्ते में मज़दूरों की तरह काम करने पर मजबूर हो जाएं, जिससे कि भाजपाई मुनाफ़ाख़ोरों की तिजोरी भरती रहे और वो भाजपा को चंदा देतें रहें, जिसका दुरुपयोग वो चुनाव जीतने के लिए करते रहें। अब पढ़ा-लिखा लेकिन बेरोज़गार युवा भाजपा का ये चुनावी-दुष्चक्र समझ गया है और भाजपा की मंशा भी, इसीलिए वो अब चुनाव में भाजपा को हराने के लिए मुट्ठी बाँध कर संकल्प ले रहा है। भाजपा का भविष्य और युवाओं का भविष्य, दो विरोधाभासी बातें हैं। जो भाजपा नौकरी और रोज़गार की परिभाषा में फँसाकर युवाओं और उनकी नौकरी के सपने देखनेवाले उनके माता-पिता को उलझाए रखती है, उससे कोई भी उम्मीद करना बेकार है। भाजपा के पतन में ही युवाओं का उत्थान है। भाजपा की हार ही, युवाओं की जीत है। युवा कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा! #uppsc #uppcs2024 #no_normalization #ro_aro_onedayexam #uppsc_oneshift_onedayexam #UPPCS_ROARO_ONESHIFT

Akhilesh Yadav

173,967 görüntüleme • 1 yıl önce

भाजपा सरकार ने करोड़ों की जो धनराशि गोरखपुर के राजघाट के निर्माण के लिए निकाली थी उसमें से सिंचाई विभाग ने भाजपाइयों के साथ मिलकर, भ्रष्टाचार की नहर निकालकर अपने स्वार्थ के कई खेत सींच लिए हैं तभी ये बदहाली है। निर्माण की इस दुर्गति के पीछे भाजपाई कमीशनख़ोरी ही ज़िम्मेदार है, जिसने दो अधिवक्ताओं की असामयिक जान ले ली है, उस पर अधिकारियों की असंवेदनशील बेहूदा बयानबाज़ी की प्रेरणा उन भ्रष्ट अफ़सरों को कहाँ से मिल रही है कहने की ज़रूरत नहीं हैं। इधर भाजपा सरकार में ये देखा जा रहा है कि मृतकों के परिजनों के घाव पर नमक छिड़कने का काम लगातार किया जा रहा है। भाजपाई याद रखें अब जनता न तो भाजपावालों के भाषण सुनने के मूड में है, न उनके बयान। निर्माण में संलिप्त अधिकारियों व ग़ैरज़िम्मेदार बयानबाज़ी पर अगर अधिकारियों का निलंबन नहीं हुआ तो माना जाएगा कि वो अपने मुखिया और सांसद के कहने पर ऐसा भ्रष्ट काम कर रहे हैं, ऐसी भ्रष्ट भाषा बोल रहे हैं। उप्र की भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार का हाल ये है कि अगर लोगों को पता चल जाए कि ये निर्माण भाजपाकाल में हुआ है तो : - भाजपाकाल में निर्मित छतरी और द्वार के नीचे जनता खड़ी नहीं होती है; - भाजपाकाल में निर्मित पानी की टंकी देखकर दूर भागती है; - ⁠भाजपाकाल में निर्मित दीवार का सहारा नहीं लेती है; - भाजपाकाल में निर्मित सड़क, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर नहीं चलती है; - ⁠भाजपाकाल में निर्मित पुलों से नहीं गुजरती है; - ⁠भाजपाकाल में निर्मित मंदिर और संसद की टपकती छत से ख़ौफ़ खाती है; भाजपा ने भ्रष्टाचार का वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भाजपाई ये भी नहीं सोचते हैं कि इन जानलेवा निर्माणों के कारण कभी उनके अपने भी इसका शिकार हो सकते हैं, लेकिन हृदयहीन भ्रष्ट भाजपाई अपने आप के अलावा किसी और के बारे में या परिवार के बारे में नहीं सोचते हैं। ये बड़े गर्व से कहते हैं कि हमारा तो परिवार ही नहीं है। परिवार उनके होते हैं जो ज़िम्मेदारी निभाना जानते हैं, उनके नहीं जो ज़िम्मेदारी से भागकर सुरंगों में रहते हैं। गोरखपुर में सांसद, विधायक, मेयर का भाजपाई ट्रिपल इंजन है, ऊपर से मुख्यमंत्री भी यहीं के हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी, शायद इसीलिए भ्रष्टाचार में बंदरबाँट के हिस्से भी ज़्यादा हो रहे हैं और निर्माण के लिए कुछ बचता ही नहीं है। बेहद निंदनीय!

Akhilesh Yadav

174,296 görüntüleme • 14 gün önce

भाजपाइयों को ईमान की रोटी नहीं पचती। भाजपा सरकार में जिनका भी उत्पीड़न हो रहा है, उसके पीछे बात ये नहीं है कि वो कहाँ का है, वो जो कोई भी ही, अगर वो मेहनत करके ईमानदारी से दो जून की रोटी कमा रहा है, मजबूर है, बेबस है या वंचित समाज का है तो वो भ्रष्ट भाजपा सरकार के शोषण-उत्पीड़न का शिकार होगा ही। भाजपा द्वारा गरीबों के विरोध की असली वजह सबको समझनी चाहिए, जो बहुत गहरी है, जिसकी जड़ में मनोविज्ञान है। भाजपाइयों को लगता है कि ‘ईमान की रोटी कमानेवाले’ सैद्धांतिक रूप से भाजपाइयों की पैसे की उस भूख के ख़िलाफ़ हैं, जो बेईमानी से ही पैसा कमाना जानती है। भाजपाइयों को लगता है, ईमानदारी से पैसा कमानेवाले, उनकी बेईमानी की सोच के साक्षात् विरोधी हैं, इसीलिए ऐसे ईमानदार लोगों को आम जनता की आँख के सामने से हटा देना चाहिए। कहा जाता है, जब कुछ दिखना बंद हो जाता है, तो लोग उसके बारे में सोचना भी बंद कर देते हैं। इसीलिए भाजपा ग़रीबों-मेहनतकशों को हटा रही है। देश के प्रधान संसदीय क्षेत्र में तीन पीढ़ियों से पटरी लगाकर अपना पेट भरनेवाले गुजराती समाज के लोगों की आवाज़ सुनी जाए और उनके रोज़गार को हर हाल में बचाया जाए। बनारसी-गुजराती कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा! #भाजपा_ग़रीब_विरोधी_है

Akhilesh Yadav

48,020 görüntüleme • 1 yıl önce

लगता है भाजपा की विधायक जी अपने लखनऊवालों की वाचन-भाषण शैली से प्रभावित होकर अपने क्षेत्र की जनता से इतनी ‘कुसंस्कृत’ भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं। लगता है उन्होंने जनता को ANI का पत्रकार समझ लिया है। वैसे सच तो ये है कि जनाक्रोश देखकर वो समझ गईं हैं कि वो दुबारा कभी नहीं आएंगी और निकट भविष्य में बुलडोज़र उनकी काली कमाई से बने अवैध निर्माणों की प्रतीक्षा करेगा। ये नक़्शा पास न करवा पाने की भी खीझ है। इतने बड़े अतिथि को बुलाकर ये तो उल्टा फँस गईं हैं, ‘नक़्शेबाज़ी’ के चक्कर में मामला इतना हाई लाइट हो गया है कि अब तो भ्रष्ट से भ्रष्ट अधिकारी भी इनका ‘नक़्शा’ पास नहीं करेगा।

Akhilesh Yadav

432,607 görüntüleme • 1 ay önce

जिनको जगह तक न मिली इश्तहार में उनकी क्या अहमियत बची सरकार में जनता पूछ रही है कि उप्र भाजपा सरकार में ‘उप मुख्यमंत्री’ के दोनों पद समाप्त कर दिये गये हैं क्या? आश्चर्य की बात ये है कि विज्ञापन में कनिष्ठ मंत्रियों के नाम तो दिख रहे हैं लेकिन डिप्टी सीएम साहब लोगों के नहीं! कहीं यहाँ भी ‘हाता नहीं भाता’ या ‘प्रभुत्ववादी सोच’ तो हावी नहीं हो गयी। एक तरफ़ डबल इंजन की लड़ाई में कोई एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में किसी को साइड में बैठाकर ऐतिहासिक अपमान कर देता है तो वो महानुभाव आज अपने विज्ञापन में उनको साइड में खड़ा दिखाकर हिसाब बराबर करते दिख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ़ ‘मुख्य’ जी उसी विज्ञापन में अपने ‘उप’ लोगों का ज़िक्र तक नहीं करते हैं। भाजपा में डबल इंजन ही नहीं, इंजन से डबल डिब्बे भी टकरा रहे हैं। भाजपा सरकार ने अयोध्या के पीडीए सांसद जी को दीपोत्सव में न बुलाकर जो कृत्य किया है उससे संपूर्ण पीडीए समाज बेहद आहत हुआ है। उस भाजपा से क्या उम्मीद करना, जो वर्चस्ववादी सोच के अंहकार में डूबी है और अपनों की ही सगी नहीं है। अबकी बार, डिप्टी सीएम बाहर!

Akhilesh Yadav

142,038 görüntüleme • 11 ay önce