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वाह महाराज! आपको देखकर तो गिरगिट भी शर्मा जाए। वैसे, रंग बदलना तो आपके खून में है।

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अखिलेश जी, सुना है आपने अपने अपराधियों को अब यूनिफार्म पहनाने की ठान ली है। देश में ऐसा पहला मौका है जब अपराधी भी यूनिफार्म में घूमेंगे। कमाल कर दिया महाराज आपने। वैसे अपराध का कोई रंग तो नहीं होता लेकिन आपने रंग भी चुराने की कोशिश कर ली। राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना से तो आप पहले से आकर्षित थे। जब हमने आपने हाथ मिलाया था, तब मऊ के हलधरपुर वाली पहली रैली में आपने हमारी सुहेलदेव सेना का अनुशासन देखकर तारीफ़ भी की थी। याद है ना? याद तो होगा ही, तभी तो रंग और वर्दी चुराने की कोशिश कर ली। ख़ैर, कोई बात नहीं। रंग और वर्दी चुराने से अनुशासन थोड़ी ना दे पाएंगे। वो भी अपराधियों को। वैसे कोशिश कीजिएगा कि थोड़ा सा अनुशासन अगर आपके लोग सीख लें तो भला होगा। एक सुझाव और है। आप पर पीला गमछा बहुत अच्छा लगेगा। उम्मीद है अगली बार आप पीले गमछे में दिखाई देंगे। जय भारत, जय महाराज सुहेलदेव Akhilesh Yadav

Om Prakash Rajbhar

111,407 Aufrufe • vor 25 Tagen

भारत में जैसे जाति जीवन के अंत तक आपका पीछा नहीं छोड़ती उसी तरह रंगभेद भी बैताल के जैसे आपका पीछा नहीं छोड़ता। अख़बार के इश्तिहार में “ गोरी लड़की चाहिए” से ले कर “ हल्दी बेसन लगाओ रंग निखरेगा” कहने तक। बाहरी तो छोड़िए आपके अपने जानने वाले भी आपके मुँह पर कह देते है “ कटिंग तो बढ़िया है रंग थोड़ा “साफ़” होता तो बेहतर होता”! वो आपके सामने ऐसे बोलते है मानों आप वहाँ खड़े नहीं हो, आपके सामने ही आपको इनविज़िबलाइज़ कर दिया जाता है! ये सिलसिला बचपन से शुरू होता है और बाल अवस्था में मन पर गहरा प्रभाव भी छोड़ता है। आपके कॉन्फिडेंस को हिला कर रख देता है और उस कॉन्फिडेंस को दुबारा ज़िंदा कर पाना बहुत मुश्किल होता है। कई बार आपको ये भी कहा जाता है “अरे काली नहीं है साँवली है” तो कोई कहेगा “ गेहुआँ रंग है” , मानो आपको सांत्वना दी जा रही हो! और ये बात भी हमें समझनी होगी की इसके शिकार सिर्फ़ महिलायें नहीं पुरुष भी होते हैं। काली , कल्लू , कलुआ, कालिया , कल्लो, कारी ये सारी शब्दावली रंग देख कर ही तो गढ़ी और थोपी जाती है। इसलिए इन सबसे परेशान ना हो कर जीवन में आगे बढ़ते जाइए और जो ये शब्दावली आपके ऊपर थोप रहे थे वो बस पीछे छूटते जायेंगे। मुश्किल है बचपन से लादी गई सोंच को झटक कर फेंक देना लेकिन जीवन सुकून से आत्मसम्मान के साथ जीना है तो झटकना तो पड़ेगा।

Priyanka Bharti

59,160 Aufrufe • vor 1 Jahr