I don't have any issues with anyone eating or... drinking anything, anywhere. But what goes around, comes around. उस दिन जो कांग्रेस के लोग अभिजीत दीपके और सौरव दास का कॉफी पीने पर मजाक उड़ा रहे थे, वो क्या आज राहुल गांधी के रोल खाने और डाइट कोक पीने पर भी मजाक उड़ाएंगे?show more

Luffy
151,821 Aufrufe • vor 13 Tagen
एक झूठ जब बार बार बोला जाता है, जब... आधे लोगों को वो सच लगने लगता है और आधे कंफ्यूज हो जाते हैं। जिस यज्ञ में कई दलित युवा भी थे क्या वो यज्ञ दलितों के खिलाफ हो सकता है ? जिस यज्ञ में कई दलित और अन्य समुदाय के लोग एक साथ बैठे हों क्या वो यज्ञ छुआछूत को बढ़ाने वाला हो सकता है ? हल्द्वानी में शुद्धिकरण यज्ञ के 21 दिन बाद अचानक राहुल गांधी आज इस पर प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं।show more

Ashok Shrivastav
108,077 Aufrufe • vor 5 Tagen
यूपी में कांग्रेस की लंका ऐसे ही नहीं लगी..... आज शाम जब राहुल गांधी अपने रायबरेली के तीन दिवसीय प्रवास पर लखनऊ पहुंचे तो इसकी झलक दिखी.. जो नेता सैकड़ों लोगों की भीड़ लेकर पहुंचे थे, उन बेचारों को राहुल गांधी की झलक तक देखने को नहीं मिली.. सूत्रों के मुताबिक कुछ नेता तो 10-10 हजार रुपए का फ्लाइट का टिकट लेकर पहुंचे थे.. (चूंकि एयरपोर्ट अडानी का है तो मुझे बताया गया कि भीतर वही लोग जा सकते हैं जो यात्री हैं.. पता नहीं कितना सच है क्योंकि हवाई जहाज से यात्रा मेरे बजट में नहीं है और मैं अडानी के एयरपोर्ट के तौर तरीके जानता भी नहीं.. फिलहाल तमाम नेता राहुल गांधी से मिलने जहाज के यात्री बन कर पहुंचे थे..) ये पैसा उन्होंने सिर्फ इसलिए खर्च किया ताकि राहुल गांधी को चेहरा दिखा सकें.. लेकिन राहुल गांधी तक पहुंचा कौन!! प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, विधायक आराधना मिश्रा मोना, सांसद प्रमोद तिवारी, पीएल पुनिया, किशोरी लाल शर्मा, अखिलेश प्रताप सिंह, शिव पांडे के अलावा कुछ और बहुत खास लोग.. बाकी में कुछ धकिया दिए गए तो कुछ गेट पर इंतजार में ही खड़े रह गए.. पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और पूर्व मंत्री मोइन खान की तो गजब बेज्जती हुई.. दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन राहुल गांधी को फूलों का गुलदस्ता देना उनके लिए सपना साबित हुआ.. लखनऊ के जिलाध्यक्ष रुद्रदमन सिंह सैकड़ों लोगों को लेकर आए थे.. बेचारे एयरपोर्ट के गेट पर ही ढोल-नगाड़े बजाते रह गए.. बसपा से आए हुए एक और नेता नकुल दुबे तो एयरपोर्ट आए ही नहीं.. सूत्रों का कहना है कि नकुल दुबे को अंदाजा था कि राहुल गांधी से मिलने नहीं दिया जाएगा.. ऐसे में शोशेगिरी का कोई मतलब नहीं, इसलिए उन्हें लगा कि वहां जाना ठीक नहीं है.. नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मोइन खान, रुद्रदमन सिंह जैसे सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता नाराज होकर एयरपोर्ट से लौटे.. राहुल गांधी अपने पीछे लखनऊ में जबरदस्त आक्रोश लेकर रायबरेली गए हैं.. #RahulGandhi #congressnews #congress #UttarPradesh #politics #Lucknowshow more

Vivek K. Tripathi
79,933 Aufrufe • vor 7 Monaten
बेहद शर्मनाक बयान! आज तो झूठ भी अपने आप... को लज्जित महसूस कर रहा होगा। इतना बड़ा झूठ भी नहीं बोलना चाहिए कि इंसान औरों की ही नहीं अपनी निगाह में भी गिर जाए। सफ़ेद झूठ बोलने से व्यक्ति की गरिमा भी गिरती है और उन सभी पदों की प्रतिष्ठा और मान-मर्यादा भी जिन पर वो बैठता है। सत्ता का ऐसा भी क्या लालच कि उस बात को झूठ बताना जिसके प्रमाण हर तरह से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और जनता ने जिसका ख़ुद साक्षात अनुभव किया हो। इतना बड़ा झूठ बोलना तभी संभव होता है जब व्यक्ति या तो चेतना खो दे या सच्चाई या अपने आदर्श और सत्य के संस्कार। ऐसे महाझूठ वक्ता दरअसल अपने लोगों को महामूर्ख समझते हैं। वो मानते हैं कि उनके अनुयायी उनकी हर बात को सच ही मानेंगे लेकिन ऐसा होता नहीं है। भाजपा और उनके संगी-साथियों और वाहिनीवादियों की सोच ही यही है कि झूठ बोलकर अपने लोगों को ठगो। आज तो भाजपाई गुट के वो सब लोग शर्म से ज़मीन में गड़ गये होंगे जो ऐसे लोगों के लिए हर तर्क-कुतर्क से बाज नहीं आते थे और इनकी ईमानदारी की गारंटी देते थे। अपनी नहीं तो पद की गरिमा का ही मान रखिए। वैसे उनसे सच की उम्मीद करना बेकार है जो महाकुंभ जैसे पावन और धार्मिक अवसर पर सनातनी हिंदुओं की मृत्यु पर झूठ बोलने का घोर पाप कर चुके हैं। आज सत्य अपने आप को कितना बौना महसूस कर रहा होगा।show more

Akhilesh Yadav
228,402 Aufrufe • vor 11 Monaten
पिछले 14 दिन से आदिवासी समाज के लोग मध्य... प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे थे. वे उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे. फिर खबर आई कि PM ऑफिस ने इनका संज्ञान लिया. जिसके बाद आज पुलिस ने आंदोलन ही खत्म करा दिया. खास बात है कि दिल्ली से 600 किलोमीटर दूर हो रहे इस आंदोलन के लिए किसी सेलिब्रिटी ने ना पोस्ट किया, ना ही वीडियो बनाया. क्योंकि इनके पास उतने पैसे नहीं कि ये उनसे पोस्ट करवा सकें. ऐसा ही हाल स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का था, जो गंगा के लिए 111 दिन तक भूख हड़ताल किए और मर गए. उनके पास भी पैसे नहीं थे कि वो सेलिब्रिटी लोगों से पोस्ट करवाकर दूसरे गांधी बन सकें.show more

Ranvijay Singh
62,901 Aufrufe • vor 1 Monat
कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत किसने दी ? हाईकोर्ट... ने कोर्ट ने सबूत देखे, दलीलें सुनी, उसके बाद जमानत दी है और सजा को सस्पेंड किया है इसके बाद भी हल्ला क्यों किया जा रहा है ? जो लोग न्यायपालिका के सम्मान की बात करते रहे हैं, वो आज न्यायपालिका द्वारा Kuldeep Singh Sengar को जमानत देने पर विलाप कर रहे हैं Kuldeep Sengar 7 साल से अधिक समय से जेल में है तो क्या उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती ? जब कुलदीप सेंगर पर केस हुआ था, तब मीडिया ट्रायल करके उन्हें विलेन बनाया गया था आज 7 साल से अधिक समय तक जेल काटने के बाद जब उन्हें जमानत मिली है तो फिर से न्यायपालिका पर दवाब बनाने की कोशिश की जा रही है कुलदीप सेंगर पहले दिन से कहते रहे हैं कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और इसी भरोसे की ख़ातिर उन्होंने 7 साल से ज़्यादा जेल में काटे हैं और आज भी जेल में हैं लेकिन जब आज उन्हें कोर्ट से न्याय की उम्मीद मिलती दिख रही है तो न्यायपालिका पर सवाल खड़े कर न्यायपालिका पर दवाब बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है आज भी उन्नाव और बांगरमऊ के लोग ये मानने को तैयार नहीं है कि कुलदीप सेंगर जैसा जनसेवक रेप कर सकता है कुलदीप सेंगर का भी यही कहना है कि भले समय लगे लेकिन अंतिम विजय सत्य की होगी और वो निर्दोष साबित होंगेshow more

Abhay Pratap Singh (बहुत सरल हूं)
31,334 Aufrufe • vor 8 Monaten
इस वक्त इजरायल के लिए सबसे मददगार अमेरिका की... लॉकहीड मार्टिन कंपनी के बने हुए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान f-35 साबित हो रहे हैं जो इसराइल से लगभग 2200 किलोमीटर दूर यमन जाकर वहां तबाही मचा कर वापस इसराइल लौट जा रहे हैं और इतनी ऊंचाई से उड़ रहे हैं कि इन्हें रडार पकड़ भी नहीं पा रहा और इतना सटीक निशाना लगा रहा है कि यह जहां चाह रहे हैं वहीं बम गिर रहा है और यह नसरुल्लाह के खात्मे ने साबित भी कर दिया और इसी विमान की वजह से इसराइल एक साथ चार-चार देशों पर यानी लेबनान गाजा यमन सीरिया में खतरनाक बमबारी कर रहा है सोचिए जब मोदी सरकार भी 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान राफेल खरीदना चाह रहे थे तब कांग्रेस ने वामपंथी इकोसिस्टम ने और राहुल गांधी ने कितनी प्रॉब्लम खड़ी कर दी कि किसी तरह से यह डील न होने पाए और भारत के पास उन्नत लड़ाकू विमान ना आने पाए जबकि भारत बहुत पुराने मिग विमान यूज करता था वहीं पाकिस्तान जैसे देश के पास भी 4.5 पीढ़ी के f 16 प्लेन थे चीन के पास भी पांचवीं पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू विमान थे लेकिन INDI गठबंधन खास कर राहुल गांधी यह नहीं चाहते थे कि भारत अत्याधुनिक लड़ाकू विमान खरीदे और इसके लिए न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमेबाजी किया गया बल्कि सार्वजनिक रूप से भी मोदी जी को भ्रष्टाचारी कहने का पाप किया गया इनके लोग तो राफेल विमान को इतना बदनाम कर दिए कि यह बहुत खराब विमान है जबकि राफेल विमान लीबिया की लड़ाई में अपनी क्षमता को दिखा चुका हैshow more

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳
514,099 Aufrufe • vor 1 Jahr
जिसे तुम पप्पू समझते रहे वो तुम्हारा सबसे बड़ा... हक बचाने के लिए अकेला लड़ रहा है... मैं जानता हूँ इस पोस्ट पर कुछ लोग हँसेंगे, कुछ तंज कसेंगे, कुछ मुझे भी ट्रोल करेंगे लेकिन आज जो सुना, जो देखा, जो महसूस किया उसके बाद ही अपने विचार रख रहा हूं.... राहुल गांधी की आज की कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक प्रेस मीट नहीं थी वो एक जागृति थी, एक ऐसा आईना था जिसमें हमने लोकतंत्र का लहूलुहान चेहरा देखा। जिसे इस देश की मीडिया ने हाशिए पर डाल दिया, जिसे ट्रोल आर्मी ने सालों तक पप्पू कहकर हँसी का पात्र बना दिया वो आज इस देश को समझा रहा था कि वोट क्या होता है, संविधान क्या होता है, लोकतंत्र की आत्मा क्या होती है। उसने कोई भावनात्मक जुमला नहीं दिया, न कोई नारा उछाला... बस कुछ सच्चे आँकड़े और तथ्य रखे तथा देश को दिखा दिया कि किस तरह एक एक वोट चुराया गया। जिस सरकार को हमने चुना समझा वो दरअसल फर्ज़ी वोटों से खड़ी की गई एक इमारत निकली। जिस चुनाव को उत्सव कहा गया वो अब एक बहुत बड़े विश्वासघात जैसा लगने लगा है। आज राहुल गांधी ने बताया कि लोकतंत्र की हत्या तलवारों से नहीं सिस्टम से होती है और जब सिस्टम ही सड़ जाए तो सच्चाई बोलना देशभक्ति बन जाता है। सोचिए वो शख्स, जिससे आप मज़ाक करते थे आज एक एक नागरिक का हक़ बचाने के लिए लड़ा रहा है। उसने नफरत का जवाब आँकड़ों से दिया और झूठ का पर्दा तर्कों से हटा दिया। अब सवाल सिर्फ राहुल गांधी का नहीं है अब सवाल है हमारा। क्या हम सच में इतने सुन्न हो चुके हैं कि फर्ज़ी वोटों से बनी सरकार को चुपचाप सह लेंगे? क्या हम इतने अंधे हो चुके हैं कि जो संविधान की बात करे उसे ही निशाना बना दें? क्या अब सच बोलना पागलपन है और सिस्टम से सवाल करना गुनाह? अब ये लड़ाई किसी नेता की नहीं ये हर उस नागरिक की है जो लोकतंत्र को सिर्फ वोट डालने का नाम नहीं बल्कि अपनी पहचान मानता है। आज राहुल अकेला नहीं है आज वो हर इंसान उसकी लड़ाई में है जो अपना वोट बेचता नहीं बल्कि उसे अपनी आवाज़ समझता है। फिर बता रहा हूं कि मेरी ये पोस्ट कोई प्रचार नहीं ये जिम्मेदारी है उस पीढ़ी की ओर से जो अब समझ चुकी है कि अगर आज खामोश रहे तो कल कुछ भी कहने लायक नहीं बचेंगे। अब अगर हम नहीं बोले तो अगली पीढ़ी हमसे पूछेगी जब लोकतंत्र लुट रहा था, तब तुम कहां थे..?show more

Mukesh मारवाड़ी
117,306 Aufrufe • vor 1 Jahr
*युद्धविराम के पीछे का सच :-* युद्ध विराम की... चर्चा से पहले यह जान लेवें कि भारत और भारत की जनता को कैसे बचाना है ,यह मोदी जी जैसे हर देशभक्त का प्रथम लक्ष्य हैं । स्वयं का घर जलाकर होली मनाना मूर्खता है ।कुछ अज्ञानी लोग कल शाम से प्रधानमंत्री मोदी को गालियां दे रहे हैं , कोस रहे हैं । युद्ध विराम के निर्णय को गलत बता रहे हैं । मोदी को गरियाने वाले अज्ञानियों से निवेदन है कि पिछले 4 दिनों में क्या कुछ घटा है और मोदी जी ने क्या कुछ किया है ,इसका अध्ययन आप एक बार जरूर कीजिए । युद्ध करना जरूरी है लेकिन समझ के साथ युद्ध करना सबसे ज्यादा जरूरी है । आप सिर्फ समाचार पत्रों या वेबसाइट की पिछले 3 दिनों को खबरें पढ़ें । विशेषरूप से 9 मई और 10 मई की अलसुबह की खबरें। आप पढ़ेंगे तो पाएंगे कि पाकिस्तान में लगातार 2 दिन भूकंप आने की खबर है । दोनों दिन रिक्टर पैमाने पर 4.0 के भूकंप का समाचार है । लगातार 2 दिन इस तरह एक ही पैमाने का भूकम्प बहुत कुछ संकेत देता है । मेरे आकलन के अनुसार यह भूकंप नहीं बल्कि पाकिस्तान का वह गुप्त परमाणु परीक्षण था जिसे वह हताशा में अपनी आसन्न हार के मद्देनजर भारत पर आजमाने की पूरी प्लानिंग कर चुका था । केवल 2 दिनों में पाकिस्तान पूरी तरह पस्त हो चुका था । उसका एक भी हमला भारत की जमीन को छू भी नहीं सका था । इसलिए उसके धर्मांध हुक्मरानों , पिटी हुई आर्मी ने चीन और तुर्की की शह पर परमाणु हमले का निर्णय ले लिया था । पाकिस्तान जानता था कि वह पूरी तरह बर्बादी के कगार पर है । इसलिए भारत को भी बर्बाद कर मिट जाना अच्छा लगा पाकिस्तान को, भारत ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर रिसर्च लैबोरेट्री के ठीक पड़ोस वाली बिल्डिंग को निशाना बनाकर यह संकेत दिया था कि वह कभी भी इस लैबोरेट्री को नष्ट कर सकता है । पाकिस्तान द्वारा परमाणु हथियार उपयोग में लेने की मंशा ने अमेरिका को भी अलर्ट मोड पर डाल दिया!अब आएं मिसाइल के उपयोग पर 9 मई की देर रात्रि में हरियाणा के सिरसा के ऊपर भारतीय सेना ने जिस मिसाइल को इंटरसेप्ट किया,वह फतेह 2 मिसाइल पाकिस्तान द्वारा विशुद्ध रूप से राजधानी दिल्ली और एनसीआर को लक्ष्य करके सिर्फ इसीलिए दागी गई थी ताकि पता लग सके की परमाणु बम को ले जाने वाली यह मिसाइल कितनी दूर तक जा सकती है पाकिस्तान और भारत के दुश्मनों ने यह तय कर लिया कि इस बार दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्र को परमाणु हमले की जद में लाया जाए,उसके बाद में भले ही हम स्वयं नक्शे से मिट जाए लेकिन भारत में लाखों आदमियों का कत्ल परमाणु हमले से हो । चीन भी इस युद्ध में पूरी तरह उतर जाने की प्लानिंग पर था!इधर मोदी सरकार और भारतीय सेना ने पहले दिन से यह तय कर लिया था कि पहलगाम हमले के बदले आतंकी कैंपों को निशाना बनाना है और उसमें वह सफल भी हुए। यथेष्ट लक्ष्य हासिल भी कर लिया गया!बहावलपुर से लेकर पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर तक सभी आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया गया और सैकड़ो आतंकी ठिकाने भी लगा दिए गए,अक्ल से अंधे होकर सिर्फ परमाणु युद्ध के लिए उतर जाना, पूरे विश्व को खतरे में डाल देना भी किसी भी तरह से उचित नहीं था । अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस जो पाकिस्तान के विरोधी भी हैं और जिन्होंने 2 दिन पूर्व ही भारत-पाकिस्तान कनफ्लिक्ट से अलग रहने के अमेरिका के स्टैंड का ऐलान किया था, उन्होंने मजबूत इनपुट के आधार पर ही मोदी से बात कर सीजफायर करने की बात मोदी को कही । मोदी भी इस विश्व व्यापी खतरे को समझ रहे थे । भारत के अंदर और भारत के बाहर के भारत विरोधी तत्वों , दुश्मनों की उस मंशा को भी समझ रहे थे जो विकसित होते भारत को बर्बाद होते देखना चाहते थे और लाखों नागरिकों परमाणु हमले के माध्यम से मारे जाने का सपना देख रहे थे । इसलिए अपनी इमेज की परवाह किए बगैर भारत के लिए क्या उचित है, इस देश की जनता की हिफाजत के लिए क्या उचित है इसका निर्णयपीएम ने लिया और सीजफायर का ऐलान किया! इसे एक कपोल कल्पना पोस्ट मान सकते हैं । लेकिन मेरा इतना कहना है कि आप पिछले 4 दिनों के घटनाक्रम का सिलसिलेवार अध्ययन स्वयं करें। हम न्यूक्लियर वॉर यानी परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़े है, यह बात आप खुद जान पाएंगे । हमारे महान भारत देश को बचाने के संकल्प के साथ ही दुश्मनों को भी खत्म करना है । आगे भी समय आएगा । कई मौके मिलेंगे । उस समय तरीके से दुश्मन को नष्ट भी किया जाएगा । लेकिन आज अंधे होकर निर्णय नहीं लिया जा सकता। मै तो कहती हूं मेरी पोस्ट पर नहीं पर Narendra Modi पर भरोसा रखें।भारत को भी बचाकर दुश्मनों का खात्मा भी किया जाएगा,पाकिस्तान की ओर से न्यूक्लियर वॉर की पूरी रचना की जा चुकी थी। उसके परमाणु बम वाली मिसाइल के निशाने पर भारत की राजधानी दिल्ली थी! #budhdha_purnima #IndiaPakistanWar2025show more

कविता भारतीय 🇮🇳 एस्ट्रोलोजर
55,767 Aufrufe • vor 1 Jahr
लगातार 4 दिन से यूजीसी और SC-ST एक्ट के... विरोध में शांतिपूर्ण धरना दे रहे सवर्ण समाज के लिए खड़े बड़े भाई PankajDhavraiyya RspChief को जिस तरह प्रशासन परेशान कर रहा है, वैसा व्यवहार शायद किसी आतंकवादी के परिवार के साथ भी नहीं किया गया होगा। पंकज धवरैया पदयात्रा कर दिल्ली जाकर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी पदयात्रा रोक दी और उन्हें नज़रबंद कर दिया। और उनके द्वारा निकाली जा रही सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोक लगा दी और अब किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा हैँ चारों तरफ दबाव, डर और दमन का माहौल तैयार किया जा रहा हैँ जो लोग कहते हैं कि ये हिन्दूवादी सरकार है, उनसे एक सीधा और साफ़ सवाल क्या इस हिन्दूवादी सरकार में पंकज धवरैया को हिन्दू माना जाता है या नहीं? जो लोग दिन-रात “हिन्दू-हिन्दू” का नारा लगाते हैं, उनसे पूछना पड़ेगा— क्या पंकज धवरैया हिन्दू नहीं हैं? क्या सवर्ण समाज हिन्दू नहीं है? अगर सवाल पूछना अपराध है, अगर शांतिपूर्ण पदयात्रा गुनाह है, तो फिर ये सरकार नहीं, तानाशाही है। जिस सवर्ण समाज को आज दबाया जा रहा है, वही समाज 2027 में इस सरकार की औकात बता देगा।show more

शैलेंद्र तिवारी
11,518 Aufrufe • vor 6 Monaten
क्या भूत सच में होते हैं...? इस सवाल का... जवाब आपको इस घटना से जरूर मिल जाएगा 👇 पारुल अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी पढ़ते पढ़ते उसे जब नींद के झोंके आने लगे तो उसने चाय बनाने का निश्चय किया... जब उसने घड़ी देखी 3 बज रहे थे उसे एक बार के लिए किचेन में अकेली जाने में...थोड़ा डर लगा लेकिन आज उसी मौर्य वंश का चैप्टर पूरा निपटाना ही था.... उसने हिम्मत करके चाय बनाने का फैसला किया और चाय बनाने के लिए गैस चूल्हे पर चढ़ा दी.. लेकिन जब आधे घंटे तक भी चाय में उबाल नहीं आया तो उसे थोड़ा डर लगा कि कहीं किसी आत्मा का चक्कर तो नहीं है... उसके बाद उसने चाय पीने के idea को साइड करते हुए वापस अपने कमरे में जाने का सोचा.... और ज्योंहि गैस बंद करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया वो shocked हो गई..😲 दोस्तों वो लड़की गैस जलाना भूल गई थी...😁show more

Kashish
14,443 Aufrufe • vor 17 Tagen
Dave Eubank पहले US Special Forces में था। 1997... में उसने Free Burma Rangers नाम का एक ग्रुप बनाया। ऊपर से ये एक humanitarian organization है, जो म्यांमार के war zones में जाकर घायलों का इलाज करता है, फंसे लोगों को निकालता है और खाने पीने व दवाइयों की मदद देता है। लेकिन ग्राउंड पर कहानी थोड़ी अलग है। ये लोग सिर्फ मदद नहीं करते, बल्कि rebel इलाकों में रहते हैं, उनके साथ चलते हैं, उनको पूरा Technical Support में पूरी HELP करते है म्यांमार में सालों से Ethnic Groups और military के बीच सिविल वॉर चल रहा है। वहीं कई insurgent groups भी एक्टिव हैं, जो भारत के नॉर्थ ईस्ट में अस्थिरता फैलाने और भारत को डिस्टर्ब करने में शामिल हैं। Eubank ने खुद को उन्हीं इलाकों में सेट कर लिया है। वो जंगलों में रहता है, लोकल लोगों के साथ strong नेटवर्क बना चुका है और वहीं से काम करता है। US SF Forces बैकग्राउंड होने की वजह से दुनिया भर के ex-soldiers और foreign fighters उससे जुड़ते जा रहे हैं human rights के नाम पर आते है, और कुछ लोग तो सिर्फ combat experience लेने आते हैं। सीधी बात ये है कि वो खुद को humanitarian बताता है, लेकिन म्यांमार सरकार उसे अपने खिलाफ काम करने वाला मानती है। Bottom line म्यांमार उसके लिए सिर्फ एक mission नहीं है, बल्कि एक active war zone है, जहाँ असली खेल सीधे जमीन पर चल रहा है। USA 🤔show more

Lucky Bisht
26,004 Aufrufe • vor 5 Monaten
क्या ही प्राणी है भई... क्या ही डरा लोगे... इसे?? ईडी इंट्रोगेशन कर रही है, और मैं उधर लॉकअप देख रहा हूँ। सोच रहा हूँ, की मेरे परदादा 12 साल ऐसी ही सेल में बैठे थे... तो दस साल तो मेरा भी बनता है.. ●● अक्रॉस द पार्टीज, अक्रॉस द नेशन.. एक नेता बता दो, जो ऐसी बात बोल देने का भी गट्स रखता हो। एंड आई सीरियसली बिलीव, कि इस बंदे को पीएम शिएम बनने में कत्तई रुचि नही। ये तो सर से पाँव तक घोर एंटी एस्टेब्लिशमेंट है। तो मौका आएगा, तो टोपी किसी और के हाथ दे देगा। सत्ता की कुंजी हाथ मे रखेगा। वह सब कुछ, कान पकड़कर औरो से करवाएगा, जो सत्ता में रहने वाले को सत्ता की मजबूरियां करने नही देती। ●● राहुल,अपने जीवन मे राहुल होने का आनंद ले रहे है। गांधी होने का वजन हंसकर, हंसाकर उठा रहे हैं। जो मोहब्बत, जो लगाव, और जो पीस डालने वाली आशाओं का दबाव इस सरनेम के साथ जुड़ा होता है, ये उसके बोझ से चरमराता हुआ शख्स नही है। उसकी गुरुता से गर्वित है। न मौत का डर, न जेल का। न ठेके दिलाने हैं, न कमीशन में रुचि। लड़के में आज जवाहरलाल का वारिस, गांधी का अक्स दिखा है। ●● हां, उस म्यार पर पंहुचने में तो अभी वक्त है। उसके हिस्से का सँघर्ष बाकी है, लेकिन इंशाअल्लाह लम्बी उम्र भी बाकी है। राह यही पकड़ी रही, तो उनसे भी आगे जायेगा। वीडियो, पता नही कब, कहाँ का है। किसी ने आज लिंक भेजा, तो 20 बार देख चुका हूँ। आप भी देखिए।show more

Manish Singh
211,553 Aufrufe • vor 2 Jahren
बाबु जगजीवन राम,मीरा कुमार,के आर नारायण, राम नाथ गोविंदा,... राम विलास पासवान, सुशील कुमार शिंदे इस देश में कई दलित नेता हुए बड़े बडे पदों पर भी रहे लेकिन कोई भी कांशीराम नहीं बन पाया जानते हैं क्यों, बाकी दलित नेताओं ने दलितों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन मान्यवर साहब ने बसपा बनाने से पहले दलितों का जागरण किया, उनके भीतर शोषित से शासक बनने की इच्छा पैदा की उनको अपने इतिहास से अवगत करवाया, बाबा साहब ने दलितों के लिए जो किया उसको दलितों को बताने वाले कांशीराम दलितों मे चेतना जगाने वाले कांशीराम, इस देश में 85% समाज को राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी दिलाने वाले कांशीराम DRDO से इस्तीफा देने के बाद कांशीराम ने दलितों के लिए जो किया वो इस देश का सबसे बड़ा राजनीतिक और समाजिक बदलाव का आंदोलन हैं जिसको कांग्रेस ने छुपाये रखा,दबाए रखा इस देश में 18% दलितों को अपनी ताकत का एहसास नहीं था वह सिर्फ शोषण सहता था उस समाज के भीतर राजा बनने की इच्छा और अपनी ताकत का एहसास करवाने वाले कांशीराम और आज राहुल गाँधी बोल रहे बिना dalit Ansprition कांशीराम कुछ नहीं है अफसोस ये बात दलित उनके बगल में बैठ के सुन रहे हैंshow more

Gaurav Pal
27,336 Aufrufe • vor 2 Jahren
जहाँ सम्मान नहीं, वहाँ जाना भी अपमान को न्योता... देना है। घटना लूणी विधानसभा क्षेत्र जोधपुर की बताई जा रही है। एक तरफ पूर्व विधायक महेंद्र बिश्नोई मफलर और गद्दे पर विराजमान हैं, और दूसरी ओर दो मेघवाल युवक ज़मीन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। सवाल सिर्फ बैठने का नहीं, मानसिकता का है। महेंद्र बिश्नोई के दादा रामसिंह बिश्नोई मारवाड़ के बड़े कांग्रेसी नेताओं में गिने जाते थे। लूणी क्षेत्र से 1972, 1977, 1980, 1985, 1990, 1998 और 2003 में विधायक चुने गए। फिर इनके पिताजी मलखान सिंह बिश्नोई वर्ष 2008 में कांग्रेस से विधायक बने। दलित भंवरी देवी हत्याकांड में जेल गए। लगभग 50 वर्षों से लूणी विधानसभा क्षेत्र जोधपुर में इस परिवार का राजनीतिक कब्जा रहा है। अगर इतने वर्षों की राजनीति के बाद भी समाज में बराबरी का संस्कार नहीं आया, तो फिर विकास के दावों का मतलब क्या है? दलितों को सिर्फ वोट बैंक समझने वालों को यह समझना होगा कि अब समय बदल चुका है। संविधान ने बराबरी दी है, लेकिन कुछ लोगों की मानसिकता अब भी जातिवाद की चौखट पर अटकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल इन दोनों मेघवाल युवाओं से भी है जो आज भी “नेता जी” के सामने आत्मसम्मान गिरवी रखकर नीचे बैठे हैं। जिस दिन समाज का अंतिम व्यक्ति अपनी इज़्ज़त की कीमत समझ जाएगा, उसी दिन जातिवाद की सबसे मजबूत दीवार दरकने लगेगी। कुर्सियाँ बदलने से समाज नहीं बदलता, मानसिकता बदलनी पड़ती है। और जो सम्मान न दे सके, उसके दरबार में भीड़ नहीं, बहिष्कार होना चाहिए। Rahul Gandhi जी, क्या आपकी कांग्रेस पार्टी में ऐसे नेताओं को संविधान ओर समानता की समझ नहीं है?show more

Ashok Meghwal
13,338 Aufrufe • vor 3 Monaten
𝟐𝟎𝟎𝟓 से पहले किसी के पास चेहरा था? 𝟐𝟎𝟎𝟓... के बाद सब बढ़िया चेहरा तो हम ना लगवाए है जी। पहले कोई बोलती थी? उ तो हम ना सिखाए है जी! 𝟐𝟎𝟎𝟓 से पहले सृष्टि थी? उ तो हम पैदा किए है जी! जरा एक-एक बात याद रखना, क्या पता इ मोबाइलवा सारी दुनिया ना खत्म कर दें? महीनों बाद किचन कैबिनेट के अधिकारियों ने बोलना सिखाया, इतना रटाया फिर भी वही बोला जो बोलना था। एक मा॰ मंत्री तो इतने बेचैन थे कि मा मुख्यमंत्री को अभी रोक दें-टोक दें। किस प्रदेश में ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके व्यक्तव्य के दौरान उनके जूनियर मंत्री की भी समानांतर कमेंट्री और ध्यान भटकाने के लिए बनावटी हंसी-ठहाका चलता रहता है? अब तो मंत्रियों और अधिकारियों को 𝐂𝐌 पर भरोसा भी नहीं कि पता नहीं वो कब क्यों कहाँ और कैसे क्या बोल दें? प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कैसे चार लोग 𝐂𝐌 को चला रहे है। अगर कोई इंसान अस्वस्थ है (मानसिक और शारीरिक) तथा उस अस्वस्थता का फायदा 𝟒 व्यक्तियों को एवं नुकसान पूरे राज्य का है तो इसका ख़ामियाज़ा 𝟏𝟒 करोड़ प्रदेशवासियों को नहीं भुगतना चाहिए। #Biharshow more

Tejashwi Yadav
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महाकुंभ में मौनी अमावस्या की वो काली रात... 28... जनवरी, रात 1.58 बजे थे। मैं महाकुंभ के अंदर कैंप में सो रहा था। दैनिक भास्कर के वरिष्ठ साथी आशीष राय (Ashish rai) ने शोर मचाया कि महाकुंभ में भगदड़ मच गई है, सब उठो। अगले एक से डेढ़ मिनट के भीतर पूरा कैंप खाली था। मैं, साथी विकास श्रीवास्तव (@Vikashsri17 ) और लता मिश्रा (Lata Mishra) दौड़ते हुए अगले 10 मिनट में मेले के सबसे बड़े सेंट्रल हॉस्पिटल में पहुंचे। तब तक एंबुलेंस आने का सिलसिला शुरू हो चुका था। पुलिसकर्मियों के चेहरों की उड़ी हवाइयां, हर मिनट बजते एंबुलेंस के सायरन, भागते हुए अस्पताल कर्मचारी ये बयां कर रहे थे कि कुछ तो बड़ा हुआ है। मेरे हाथ में माइक था। अस्पताल कर्मचारियों ने मीडिया के घुसने पर पाबंदी लगा दी। मैंने माइक बैग के अंदर रखा। पहचान छिपाकर हॉस्पिटल में घुस गया। अंदर का नजारा खौफनाक था। पीछे हॉस्पिटल का तरफ एग्जिट गेट था। उस गेट के पास कमरे में लाशों का ढेर था। मेरी गिनती के अनुसार 18 लाशें थीं। मोबाइल से सिर्फ दो वीडियो बनाए, चार–पांच फोटो खींचे। (दैनिक भास्कर ऐसा पहला मीडिया संस्थान है, जिसने भगदड़ में मौत होने की खबर फोटो प्रूफ के साथ ब्रेक की) इतने में हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने मुझे देख लिया। अपराधियों की तरह मेरा हाथ पकड़ा। बोला– तुम्हें पुलिस को देता हूं। वो मुझे पकड़कर कुंभ मेला की OSD के पास ले गया, जो एक महिला IAS ऑफिसर हैं। OSD ने मुझसे फोटो–वीडियो डिलीट करने को कहा। मैंने कहा कि अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि मैं ये सब ऑफिस को भेज चुका हूं। ये सुनकर उन्होंने मुझे हॉस्पिटल से बाहर कर दिया। मैं रात 2 बजे से लेकर सुबह साढ़े 5 बजे तक इसी हॉस्पिटल के गेट पर खड़ा रहा। इन साढ़े 3 घंटे में करीब 100 एंबुलेंस के चक्कर लगे होंगे। कोई मृत था तो कोई घायल। मोबाइल बैटरी डाउन हो चुकी थी। थोड़ी देर के लिए हम तीनों साथी वापस अपने कैंप पर आए। सुबह 10 बजे दूसरी सूचना आई कि संगम पार झूंसी इलाके (अखाड़ों की तरफ) भी रात में भगदड़ मची है। कई किलोमीटर पैदल चलकर हम वहां पहुंचे तो नजारा भयावाह था। हजारों लोगों के कपड़े, जूते-चप्पल, बैग सड़क पर पड़े थे। ढेर इतना कि दो ट्रक सामान भर जाए। बल्लियां टूटी पड़ी थीं। पुलिस बूथ पलटा पड़ा था। कार के शीशे टूटे हुए थे। आसपास के दुकानदारों से बात की तो पता चला कि रात 2 से 3 बजे के बीच यहां भगदड़ मची और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इस इलाके में सब सेंट्रल हॉस्पिटल है। तुरंत हम वहां पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गए। हॉस्पिटल में 20 से ज्यादा एंबुलेंस खड़ी थीं। इनके आने-जाने का सिलसिला जारी था। यहां भी मीडिया के अंदर घुसने पर पाबंदी थी। एक एंबुलेंस ड्राइवर ने बताया- लाशें अंदर पड़ी हैं। करीब 50 से ज्यादा लोग हॉस्पिटल पर अपनों को ढूंढने पहुंचे थे। कई प्रत्यक्षदर्शी श्रद्धालु मिले, जिन्होंने रात की भगदड़ का वृतांत रोते-रोते सुनाया। उस रात हमारे दूसरे साथी राजेश साहू (Rajesh Sahu) संगम नोज की तरफ मोर्चा संभाले हुए थे और वहां से पल-पल का कवरेज दे रहे थे। पहली बार महाकुंभ कवर कर रहा हूं। मौनी अमावस्या की रात से लेकर अगली सुबह तक क्या-क्या देखा, वो सारी बात शब्दों में पिरोना संभव नहीं है। लेकिन यही कहूंगा अफसरों का ओवर कॉन्फिडेंस, VIP की लगातार विजिट, रास्तों और पैंटून पुलों को पुलिस द्वारा मनचाहे तरीके से बंद करना या खोलना, 144 साल की ब्रांडिंग...इन्हीं सब की वजह से उस रात अव्यवस्थाएं पैदा हुईं।show more

Sachin Gupta
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ये लड़का जिसका नाम विनोद है, विनोद जाखड़। ये... जेन ज़ी है। ये भला आदमी रात होने तक तो सीकर में नीट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहा था और सुबह चार बजे तक झुंझुनूं के गांवों में था। नीट मामले में पीड़ित परिवार के सदस्यों की बात नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करवा रहा था। पीड़ित परिवार को शुक्रवार की रात को पचास हजार रुपए भेंट करके आया। शनिवार को इसने एलान किया कि उनका संगठन 11 लाख रुपए का पूरा करजा उस पीड़ित परिवार का उतारेगा। शनिवार शाम को वह हैदराबाद में प्रदर्शन कर रहा था। इस ट्वीट के साथ प्रदर्शन के वीडियो हैं। विनोद अनुसूचित जाति के एक मजदूर का बेटा है, छात्र संघ के चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जीतकर राजस्थान विश्वविद्यालय का अध्यक्ष बना था। किसी तरह वह एनएसयूआई का अध्यक्ष बना और मौक़ा मिला ने उसने एनएसयूआई के ही कुछ दिल्ली वाले नेताओं की भारी परेशानी झेली और उसे अपमानित किया गया; जो कि पदों पर बनावटी तौर बैठ जाने वाले लोग करते हैं। लेकिन उसने पूरे हौसले से काम किया। मुझे याद है, मैं तो उसे जानता ही नहीं था। मेरा परिचय विनोद से तब हुआ जब वह राजस्थान की ख़तरनाक़ लू में राजस्थान के जिलों का दौरा करने निकल रहा था। वह अवाक् कर देने वाला हौसला था। उसने वह सब किया। मुझे नहीं याद पड़ता कि किसी काँग्रेसी युवा या बुज़ुर्ग ने कभी कोई इस तरह का काम किया हो। तथ्यों के अनुसार दुरुस्त करने का अधिकार तो आपका है ही। अब NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना तो इस किरदार में इस तरह उतर गया कि उसकी सक्रियता काँग्रेस में विभिन्न पदों पर वर्षों से बैठे लोगों को नींद में भी शर्मसार तो ज़रूर करती होगी कि काम कैसे किया जाता है। बहुत से पदाधिकारी जातियों और क्षेत्रीयता के दायरे से ही बाहर नहीं आ पाते और जाने क्या बनने के ख़्वाब देखने लगते हैं। कुछ पूरा समय गाय वाले भैंस के नीचे और भैंस वालों को गाय के नीचे करने से ही फुरसत नहीं। मुझे लगता है, सही राजनीति इसी तरह की जाती है, जो रास्ता विनोद ने अपनाया है। राजनीति का एक ही माध्यम है और वह है आंदोलन। आंदोलन वह तेज वेग जलधारा होती है, उसमें कचरा बह जाता है और सिर्फ़ टिकी रहने वाली चीज़ें ही टिकती हैं। आंदोलन नहीं होते तो असली चीज़ें ढक जाती हैं और कचरा उसके ऊपर तैरने लगता है। यह कोई कांग्रेस की कहानी नहीं है। यह जनता के मूल दु:ख-दर्द से विमुख आंदोलनविहीन और यथास्थतिवादी हर संगठन के साथ है। आप सोचिए, अगर किसानों, युवाओं, संस्कृति कर्मियों, बुजुर्गों, प्यास से तड़पते इलाकों, सुदूर यात्री सुविधाओं से वंचित लोगों,एमएसपी की झूठी कहानियों, जल और उर्वरकों के संकट में सूखती फसलों, बदहाल मंडियों, बढ़ते अपराधों, बहुत ख़तरनाक़ तरीके से सुदृढ़ होती घूसखोरी, आए दिन सड़कों पर मारे जाते लोगों, साइबर ठगियों के बेइंतहा अपराधों, लुटते बुजुर्गों, बैंकिंग सिस्टम की बेलगाम लूट आदि मामलों में कितना कुछ किया जा सकता है। छात्रों और नीट के मोर्चे पर अपने किरदार को जीकर विनोद ने यही दिखाया है। यह एक छोटी घटना है, लेकिन इसके भीतर का विस्तार बहुत है। विनोद एक उम्मीद का नाम है; जो काँग्रेस जैसी आंदोलनविमुख ज़मीन पर पैदा हुई है। मैं जानता हूँ, मेरा यह ट्वीट इस तरह लिखे जाने से इसे कोई भी कॉंग्रेसी रिपोस्ट तो क्या; लाइक भी नहीं कर सकता। हाँ; बच्चे गाली वाले प्रियजन तो वे आमंत्रित हैं! VINOD JAKHAR Rahul Gandhi Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ Sukhjinder Singh Randhawa Jitendra Singh Alwar Sachin Pilot NSUIshow more

Tribhuvan_Official
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