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Census data is safe, secure, and fully confidential. It is never shared with any agency. Don’t believe rumours—be part of the Census. Our Census, our development. जनगणना की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय होती है। इसे किसी भी संस्था के साथ साझा नहीं किया जाता। अफवाहों से दूर...

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राहुल गांधी जी ने कल सभी को कांग्रेस पार्टी के सामाजिक न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण के एजेंडा से अवगत कराया है। हमारी तीन मांग थी 👇 • जातिगत जनगणना • आरक्षण में 50% सीमा ख़त्म की जाए • अनुच्छेद 15(5) को लागू किया जाए 24 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और उस बैठक के बाद एक प्रेस नोट निकाला गया जो कि PIB वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इसमें लिखा था कि- The Union Cabinet chaired by Prime Minister Shri Narendra Modi has approved the proposal for conducting the Census of India 2021 at a cost of ₹8,254 crores. It includes three components: house listing, housing census, and population enumeration. यही तीन बातें इस प्रेस रिलीज में शामिल हैं और इसमें कहीं भी जाति शब्द का जिक्र नहीं है, लेकिन कल अप्रत्याशित तरीक़े से यह बताया गया कि जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल होगी। : कांग्रेस महासचिव (संचार) श्री Jairam Ramesh

Congress

14,294 Aufrufe • vor 1 Jahr

इससे गिरा हुआ और क्या काम होगा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को बहाना बनाकर देश का विभाजन करना चाहती है, संघीय ढांचे और संविधान पर प्रहार करना चाहती है? 🔺30 महीने पहले जब सितंबर 2023 में नरेंद्र मोदी की सरकार महिला आरक्षण बिल सदन में लाई थी तो सबने एक स्वर से समर्थन किया था. लेकिन यह भी कहा था कि इसमें परिसीमन, Census जैसी शर्तें मत डालिए. हमने कहा था तुरंत महिला आरक्षण दीजिए, जिससे 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाएं चुनकर सदन में आयें. लेकिन तब सरकार ने विपक्ष के सुझाव की अनदेखी की थी 🔺अगर हमारा सुझाव माना गया होता तो ना सिर्फ लोकसभा में बल्कि महाराष्ट्र, हरियाणा, बंगाल, केरलम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम ,ओडिशा, आंध्र प्रदेश - जहां-जहां विधानसभा चुनाव हुए हैं - वहां पर आज महिलाओं की अच्छी खासी संख्या होती और आधी आबादी का बढ़िया representation हो रहा होता 🔺लेकिन BJP का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है. 1989 में जब पंचायती राज में महिलाओं के आरक्षण के लिए पहली बार राजीव गांधी जी संसद में बिल लाए तो उसके खिलाफ BJP के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, राम जेठमलानी और जसवंत सिंह ने वोट किया 🔺लेकिन उसके बाद 73rd और 74th संवैधानिक संशोधन करके कांग्रेस की सरकार ने पंचायती राज में महिलाओं का एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया और आज हमारे पंचायतों में 15 लाख निर्वाचित महिला सदस्य हैं 🔺BJP बार बार यह सवाल पूछती है आपने 2010 में क्यों नहीं कर लिया? हमने बहुत कोशिश की, हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे. अगर हमारे पास पूर्ण बहुमत होता तो हम 2010 में यह काम बिल्कुल कर लेते. लेकिन हमारे पास absolute majority नहीं थी, हमारी घातक दल की सरकार थी. लेकिन BJP के पास 2014 और 2019 में प्रचंड बहुमत था, आपने तब महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू किया? इसका 2019, 2024 लोक सभा चुनावों के साथ सभी राज्य की सदनों को फ़ायदा मिला होता - कितनी सारी महिलायें निर्वाचित हो पातीं 🔺इसीलिए आप महिलाओं के पीछे छिपकर इस देश का विभाजन मत कीजिए ▪️अब असल मुद्दे की बात करते हैं क्योंकि महिला आरक्षण मुद्दा नहीं है - उस को हथियार मत बनाइए. इस देश की आधी आबादी आपकी सारी कुटिलता, आपकी सारी शकुनि चाल समझती है ▪️सरकार का असल मंसूबा परिसीमन - delimitation है ▪️सरकार बिल लाकर Articles 55, 81, 82, 170, 330, 332, 334A का संशोधन करना चाहती है ▪️अब परिसीमन कब होगा और कौन सी जनगणना का इस्तेमाल होगा इसका फैसला संविधान नहीं बल्कि सदन में एक साधारण से बहुमत से तय हो जाएगा ▪️इसी के चलते 2011 के Census को इस्तेमाल करने की बात हो रही है. 2011 के जनगणना के आंकड़े अब बहुत बदल चुके हैं. 2011 के Census के आंकड़ों के चलते आज 10 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा का फायदा नहीं मिल रहा है ▪️2011 के आंकड़े पर SC, ST और महिला सीट किस आधार पर निर्धारित हो पाएंगी ▪️यह परिसीमन पूरे देश में आशंका का माहौल बना रहा है. दक्षिण के सारे प्रदेशों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिससे उनकी आवाज़ और मुद्दे दब जायेंगे ▪️543 की लोकसभा में दक्षिण के राज्यों का proportionate representation 24.3% है जो कि 850 की लोकसभा में घटकर 20.7% रह जाएगा ▪️जबकि 5 उत्तर के राज्यों का प्रतिनिधित्व 37% से बढ़कर 43% हो जाएगा. इसी के चलते दक्षिण भारत के राज्य आक्रोशित हैं, वहां पर लोगों के बीच नाराज़गी है ▪️BJP ने परिसीमन पर अपना चेहरा और अपनी मंशा असम और जम्मू कश्मीर में दिखा दी है. जहाँ पर किसी क्षेत्र में 8 लाख तो कहीं 25 लाख तक वोटर हैं, कहीं एक एक लोक सभा में 6 तो कहीं 12 विधान सभाएं हैं. सारी क़वायद काट-छाँट करके अपने हिसाब से क्षेत्र बनाने की है - जो अब BJP पूरे देश में करना चाहती है 🔹मोदी सरकार जाति जनगणना से भी मुँह मोड़ रही है. RSS और BJP हमेशा से जाति जनगणना के खिलाफ थे. वो तो राहुल गांधी के चलते उन्हें एक साल पहले जाति जनगणना को मानना पड़ा 🔹 जब जाति जनगणना हो रही है आंकड़ें 2027 में आ जाएँगे - तो बिना उसका संज्ञान लिए परिसीमन क्यों किया जा रहा है? 🔹जाति जनगणना होगा तो पता चलेगा कि देश में SC, ST, OBC की कितनी आबादी है. जैसा कि तेलंगाना के और बिहार के caste survey में पता चला 👉इसीलिए हमारी माँग है कि OBC महिलाओं के लिए महिला सीटों आरक्षण सुनिश्चित किया जाये 👉इतने बड़े क़ानून से पहले देश भर में आम राय तो बनाना दूर, सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक तक नहीं बुलाई 👉मोदी सरकार की यह शकुनि चाल है, जो महिला आरक्षण के पीछे छिपकर राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार, संघीय ढांचे पर प्रहार, और संविधान पर हमला करने की एक नापाक कोशिश है 👉लेकिन मोदी जी महिलाओं को मूर्ख समझने की गलती कर बैठे हैं

Supriya Shrinate

28,554 Aufrufe • vor 5 Monaten

लोक सभा में आज संविधान 131 वा संशोधन विधेयक 2026, संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 तथा परिसीमन विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए मैंने यह स्पष्ट किया कि हमारी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी,महिला आरक्षण के पक्ष में है और महिला वर्ग को सम्मान मिले, महिलाओ को उचित राजनैतिक प्रतिनिधित्व मिले यह हमारी विचारधारा भी है | मैंने सदन में कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस तरह के मनमानी वाले और दलित, आदिवासियों और ओबीसी वर्ग तथा कमजोर राजनैतिक प्रतिनिधित्व वाले मुस्लिम समाज को नुकसान पहुंचाने वाले परिसीमन का विरोध करते है, इस विधेयक की चर्चा में मैने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी का स्मरण करते हुए उनके सिद्धांतों का जिक्र किया वहीं मान्यवर कांशीराम जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ यानी राजनीतिक प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए | परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह दिखाता है कि इन विधेयकों का असली उद्देश्य और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है, और इनका प्रभाव बेहद व्यापक और नुकसानदेह है । संविधान संशोधन कोई साधारण विधायी प्रक्रिया नहीं होती। यह देश की मूल भावना, संविधान निर्माताओं के विज़न और जनता के विश्वास को प्रभावित करती है। लेकिन आज जो 131वां संशोधन विधेयक लाया गया है, उसमें कई ऐसे प्रावधान हैं जिनसे यह आशंका पैदा हो रही है कि सामाजिक न्याय की नींव,विशेषकर ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के अधिकार कमज़ोर किए जा सकते हैं,मैंने यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल बहुमत का नाम नहीं है, यह सहमति, संवेदनशीलता और संतुलन का नाम है,आज देश में यह धारणा बन रही है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव बिना व्यापक चर्चा और बिना जन- सहमति के किए जा रहे हैं जो बहुत बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि हम विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नागरिक भी है | मैं यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतंत्र “नंबर गेम” नहीं है ,लोकतंत्र “विश्वास” का नाम है और एनडीए की सरकार के पिछले कुछ वर्षो के कार्यकाल को देखे तो यह सरकार उसी विश्वास को तोड़ने का काम कर रही है,जिस विश्वास के साथ देश की जनता ने उन्हें बहुमत दिया | मैंने सदन में कहा कि भारत में बड़ा हिस्सा ओबीसी की आबादी का , ओबीसी का आरक्षण भी है ,अगर जातिगत जनगणना के बाद सरकार कुछ करती तो सरकार का संदेश सकारात्मक जाता लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है | मैने सरकार से यह भी कहा कि चर्चा, संवाद लोकतंत्र का हिस्सा है,मगर न राज्यों से संवाद, न सभी दलों से सहमति,न जनता से राय ,क्या आपका यही वो तरीका है जिसे आप लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हो ? मैंने राजस्थान के संदर्भ में सरकार से प्रश्न पूछते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या 6.85 करोड़ थी,इसलिए राजस्थान में 6.85 करोड़ को 14.20 लाख की जनसंख्या प्रति लोकसभा से विभाजित करने पर 48 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बनते हैं, परंतु यदि सभी राज्यों में लोकसभा की सीटों की एक समान 50% की बढ़ोतरी होती है तो राजस्थान में केवल 38 सीटें बनती हैं और फार्मूले से राजस्थान में 10 लोकसभा की सीटों का नुकसान होगा इसलिए सरकार जब जवाब दे तो इस विषय पर सरकार की मंशा स्पष्ट करे ताकि राजस्थान की जनता सरकार की मंशा को जान सके | मैं यह सवाल भी सदन में किये - 1- क्या इन विधेयको को लाने से पहले पर्याप्त पब्लिक कंसल्टेशन क्यों नही लिया गया ? 2-बिल को जल्दबाजी में लाया गया, जिससे सांसदों को अध्ययन का समय नहीं मिला ? आपने ऐसा क्यों किया ? 3-देश की जनता के मन में प्रश्न है की क्या यह बिल संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है ? 4- कई राज्यों की बड़ी शंका है की सरकार का यह कदम क्या यह संघीय ढांचे को कमजोर करता है ? 5.क्या सरकार दक्षिण भारत और अन्य संतुलित जनसंख्या वाले राज्यों के हितों की रक्षा करेगी ? 6.क्या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संसद में प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़े नहीं ? 7.परिसीमन आयोग में Judicial Review की सीमा क्या होगी और इस आयोग के निर्णयों पर संसद की क्या भूमिका होगी ? आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव है,वहां आचार संहिता भी लगी हुई है ऐसे में चुनावों के मध्य केंद्र सरकार ने यह बिल लाकर स्पष्ट कर दिया कि NDA की सरकार केवल दिखावा करने में भरोसा रखती है | सरकार को जातिगत जनगणना के बाद विधानसभा व लोक सभा में OBC वर्ग को आरक्षित करते हुए SC,ST की सीटों को बढ़ाती तो सरकार का संदेश सकारात्मक जाता मगर सरकार की मंशा को अब देश की जनता समझ चुकी है | #RLP #MPNagaur

HANUMAN BENIWAL

14,142 Aufrufe • vor 5 Monaten

PhysicsWallah maintains a zero-tolerance policy toward any form of discriminatory or insensitive language. We are deeply concerned by the recent remarks made by a faculty member, which represent a grave violation of our core values and institutional code of conduct. ​Taking this matter with the utmost seriousness, the faculty member has been suspended with immediate effect pending a thorough investigation by a senior disciplinary committee. ​We offer an unconditional apology to the community. We remain committed to ensuring our platform is a space of dignity and respect for every student. The concerned educator has also tendered an unconditional apology and requested us to share the same. फिज़िक्सवाला किसी भी तरह की असंवेदनशील या भेदभावपूर्ण भाषा के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी रखता है। हाल ही में एक लाइव क्लास के दौरान एक फैकल्टी द्वारा की गई टिप्पणियाँ हमारे मूल्यों और नियमों का गंभीर उल्लंघन हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, संबंधित फैकल्टी को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। इस पर वरिष्ठ अनुशासन समिति द्वारा जांच की जा रही है। हम इस घटना के लिए सभी से माफी मांगते हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से कोशिश करेंगे कि हमारा प्लेटफ़ॉर्म हर छात्र के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित बना रहे। संबंधित शिक्षक ने भी माफी मांगी है और हमें इसे साझा करने का अनुरोध किया है।

Physics Wallah (PW)

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बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन के मैनिफेस्टो तथा श्री राहुल गाँधी जी द्वारा जातिगत जनगणना के लिए किए प्रयासों पर मीडिया से बातचीत : तेजस्वी जी, दोनों मिल के कर रहे हैं, कल भी शायद जाएंगे वो कल भी है, इस प्रकार से अभियान शुरू हो चुका है, वैसे जब हम ने तेजस्वी का नाम घोषित किया था, तमाम राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर के जो महागठबंधन में हैं और तब से ही एक प्रकार से अभियान शुरू हो गया था उस दिन से, और तेजस्वी जी भी बराबर दौरे कर रहे हैं, हमारी पार्टी के जो नेता लोग हैं तमाम लगे हुए हैं, ऑब्जर्वर भी अच्छा काम कर रहे हैं और दूसरा जो है राहुल गांधी जी की जो यात्रा शुरू हुई थी 16 दिन की उसके बाद में जो टेंपो बना, एक नैरेटिव क्रिएट हो गया कि भई इस प्रकार का 20 साल हो गए उनको सरकार में बीस साल हो गए और नीतीश कुमार जी ने कई पार्टियां बदलते गए, एलायंस करते गए, बनते बिगड़ते गए, उससे उनकी छवि भी अच्छी नहीं रही खराब, कहां तो वो प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे और कहां आज उनको बीजेपी वाले भी नहीं पूछ रहे हैं पूरी तरह से, बीजेपी चाहे वो अमित शाह जी हो चाहे कोई नेता हो कई तरह की बातें करते हैं कि हम तो चुनाव के बाद में देखेंगे कौन मुख्यमंत्री बनेगा,तो कहां तो पीएम बन रहे थे और कहां मुख्यमंत्री बनेंगे कि नहीं बनेंगे ये स्थिति बन गई, ठीक है न, उन स्थितियों में चुनाव हो रहा है, एक बात है कि इस बार धनबल का बहुत बड़ा खजाना इक्कठा हो गया है, लूट लिया है इन लोगों ने, इलेक्टोरल बांड के माध्यम से भी, वैसे भी, कोई कमी नहीं है पैसे की, वो प्रयोग देखा हम ने इनका महाराष्ट्र के अंदर, कोई कल्पना नहीं कर सकता जो पैसा बंटा वहां पर और चुनाव कैसे जीत गए एकतरफा ये पूरे देश को आश्चर्य हुआ, हार जीत की अलग बात है, पार्लियामेंट में हम लोग जीते थे और तीन चार महीने बाद में जो वहां पर सफाया हुआ सब पार्टियों का ये तो पूरे देश के लोगों को विश्वास नहीं हुआ, पूरे देश के लोगों को, हरियाणा के अंदर माइक्रो मैनेजमेंट कर लिया हम लोगों ने , चलो भई मान लेते हैं कुछ किया होगा,बराबरी पर आ गए लगभग प्वाइंटों में फर्क था पर महाराष्ट्र की तो हार जीत एक अजीबा है, मतलब एक प्रकार से रहस्य बना हुआ है तो ये जो राहुल जी का अभियान शुरू पहले ही हो गया टाइमली और मैं समझता हूं कि बिहार लोग पॉलिटिकली बहुत समझदार होते हैं, शुरू से ही मान्यता पूरे देश के लोगों की है कि बिहार में पॉलिटिकल सोच होती है अलग उनकी, उम्मीद करते हैं कि वहां बैकवर्ड भी हैं EBC वाले भी हैं, EBC का घोषणा पत्र एक प्रकार से राहुल जी ने वहां पर जारी करवाया है और जो कुछ जातिगत जनगणना की बात पहले बिहार ने करी थी, राहुल गांधी जी ने दबाव दिया सरकार पर पूरे देश के अंदर लागू होनी चाहिए, मना करते गए बीजेपी वाले पर आखिर में उनको मानना पड़ा, कैबिनेट का निर्णय हुआ दिल्ली के अंदर हम जातिगत जनगणना कराएंगे,ये राहुल जी की बहुत बड़ी विजय है। ये भी बिहारवासियों को मालूम है कि राहुल गांधी के कारण से पूरे मुल्क में जातिगत जनगणना अब प्रॉपर होगी, क्योंकि उनकी जातिगत जनगणना हुई थी बिहार की,उसको तो चैलेंज कर दिया सुप्रीम कोर्ट के अंदर, निर्णय हाईकोर्ट के सुप्रीम कोर्ट के आते गए वो लागू नहीं कर पा रहे थे और सरकार डबल इंजन की है तब भी ये सब चलता रहा, अब तो राहुल जी के दबाव से जो मोदी जी की गवर्नमेंट ने जो फैसला किया कि हम करवाएंगे बहुत बड़ी विजय उनकी है, सब जातियां उम्मीद कर रही थीं कि एक बार 1931 में हुई थी ये, 31 के बाद में कभी नहीं हुई, अब कम से कम एक आ गया मामला, मालूम पड़ेगा भई कौन जाति के कितने लोग हैं, तो जो स्कीमें बनेगी भारत सरकार की विभागों की या राज्यों की, तो एक साइंटिफिक वे से बन पाएगी तो एक अच्छा फैसला हो गया। ये तमाम बातें आपको मैं इसलिए बोल रहा हूं कि बिहार के चुनाव में एजेंडा के अंदर नैरेटिव के लिए ये काम आ रही हैं, लोगों में ये डिस्कशन होता है गांव गांव में और कस्बों के अंदर शहरों के अंदर। मैनिफेस्टो आया परसों, 28 को,कल ही , मैनिफेस्टो भी जो है पच्चीस लाख का बीमा उन्होंने कर दिया जो अपने यहां पर था, सबसे पॉपुलर स्कीम राजस्थान की ये रही है कि हर घर में इलाज फ्री हो गया, दवाइयां फ्री टेस्ट फ्री और ऑपरेशन फ्री ये बहुत बड़ा निर्णय किया बिहार के मैनिफेस्टो में महागठबंधन ने किया है, तो मैं समझता हूं कि एक मैसेज गया है, फिर जो और भी जो बिजली को लेकर पानी को लेके नौकरी को लेके, जो वादे किए गए मैनिफेस्टो में एक 35 साल का नौजवान जो है जिस प्रकार राहुल गांधी जी के साथ में दौरे किए वहां पर और अब जो है राहुल जी के दौरे के बाद में उसने जिस प्रकार से मैनिफेस्टो में अपनी भागीदारी निभाई भी है, राहुल गांधी की जो भावना थी पब्लिक क्या सोचती है उसके अकॉर्डिंग टू आप ये मैनिफेस्टो बनाओ, पब्लिक को पूछ के बनाओ, वो स्थिति बन चुकी है उसी में ये मैनिफेस्टो वहां पर बना है और उसका बड़ा इंपैक्ट रहेगा, तमाम स्कीमों का और तेजस्वी जी का मैंने कल सुना मैनिफेस्टो के बारे में भी डिस्कशन में देखा मैंने कि उनको पूरी, दो बार डिप्टी सीएम रहे हैं ,पूरी नॉलेज है उनको स्टेट की तमाम आंकड़े उनके सामने हैं साथ में हैं और वो मैं समझता हूं कि मजबूती के साथ में ये चुनाव जो है दंगल क्योंकि किसी ने ठीक कहा है कि ये तो चुनाव होता है लोकतंत्र के अंदर और ये युद्ध होता है तो चुनाव में लोकतंत्र में नॉन वॉयलेंस होता है, डेमोक्रेसी है कोई जीतो कोई हारो, और जो दंगल होता है संघर्ष होता है वहां क्या होता है वॉयलेंस होती है। युद्ध किधर लड़ रहे हैं, क्योंकि इनका विश्वास है ही नहीं डेमोक्रेसी के अंदर। युद्ध की तरह येन केन प्रकारेण साम दाम दंड भेद उसके माध्यम से चुनाव कहीं जीते हैं, ये उनकी थ्योरी है पूरे देश के अंदर, धर्म के नाम पर और कर दिया, हिंदू धर्म हिंदू धर्म, क्या बाकी लोग हिंदू धर्म के लोग नहीं हैं क्या ? आंकड़े बताते हैं कि कोई एक, ये जो इनकी पर्सेंटेज आ रही है वोटों की, चालीस से नीचे आ रही है, सौ वोट पड़ते हैं पोलिंग,उसका एक बार इकतीस परसेंट आ गया, एक बार छत्तीस परसेंट आ गया एक बार सैंतीस परसेंट आ गया, ऐसे ही तो आ रहे हैं, इसका मतलब सत्तर परसेंट लगभग तो लोग खिलाफ वोट दे रहे हैं इनके, पर किस बात का घमंड कर रहे हैं ये लोग ? ये चाहिए डेमोक्रेसी, संविधान की जो मूल भावना है उसके अनुसार चलें और जो हालात बन गए हैं देश में अहम् घमंड के कारण से, लोग बहुत चिंतित हैं, लोग जेलों में जा रहे हैं बिचारे , आलोचना करना तो देशद्रोही हो गया है यहां पर देश के अंदर, जबकि डेमोक्रेसी का तो मुख्य भाग है नॉन वॉयलेंस और सबको साथ में लेकर चलने वाली बात है, आलोचना को सुनने का माद्दा होना चाहिए, वो इनमें नहीं है। ये तमाम बातें जो हैं ये बिहार चुनाव में नैरेटिव बनेगा हमारा ये मैं कह सकता हूं। महागठबंधन को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में : मैंने कहा न आपको कि इस बार चुनाव जीतना हमारे लिए बहुत जरूरी नहीं है, देश के लिए जरूरी है और ये चुनाव खाली बिहार का नहीं हो रहा है एक प्रकार से देश में मैसेज देने का चुनाव है कि हरियाणा के अंदर क्या हुआ, दिल्ली के क्या हुआ और महाराष्ट्र में क्या हुआ और इनको घमंड आ गया तो घमंड अगर रहता है, अहम् घमंड रहता है तो डेमोक्रेसी के अंदर वो उचित नहीं है, मैं मानता हूं अब इनको बीस साल के बाद में बदलाव चाहिए बिहार को, बदलाव होना चाहिए और पूरी ताकत लगाएगी महागठबंधन, तमाम हमारे महागठबंधन के पार्टनर हैं सब एकजुट हैं, लगे हुए हैं और हम लोग कामयाब हो जाएंगे। फसल खराबे का मुआवजा न मिलने के मुद्दे पर प्रश्न का उत्तर : क्या करें इनका, मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिए, बार बार याद दिला रहे हैं इन लोगों को हम लोग, 22- 23 का मुआवजा नहीं मिला है भरतपुर के लोग भी आते हैं, जोधपुर डिविजन के लोग आते हैं कि वहां भी 23 का मुआवजा नहीं मिल रहा है किसानों को,आज 25 चल रहा है तो आप कल्पना कीजिए कि, अब फिर बरसात हो गई है तो नुकसान क्यों हो रहा है इनको, अर्जेंटली गिरदावरी करा के, आउट ऑफ वे बात करके, आउट ऑफ बॉक्स बात करके इनको चाहिए कि मुआवजे का प्रबंधन करें और मुआवजा फसलों का दें, किसान अगली फसल कैसे बोएगा ? उनके पास तो इतने ही साधन होते हैं, क्योंकि जो मोदी जी ने कहा था डबल इनकम कर देंगे वो तो अब नाम ले नहीं रहे हैं, न डबल इनकम हुई है, डबल इनकम हुई नहीं है तो ये बेचारे परेशान हैं लोग, उनको चाहिए कि ये किस प्रकार से टाइमली मुआवजा दें ये मेरी मांग है।

Ashok Gehlot

13,175 Aufrufe • vor 11 Monaten

कांग्रेस कार्यसमिति बैठक में मेरे प्रारंभिक भाषण के कुछ अंश — • हमारी नयी CWC 20 अगस्त 2023 को बनी थी, जिसकी पहली बैठक हैदराबाद में 16 सितंबर को हुई। • हमने सामूहिक रूप से देश को विभाजनकारी और Polarisation की राजनीति से मुक्त करने, सामाजिक न्याय की स्थापना और एक जवाबदेह, संवेदनशील और पारदर्शी सरकार देने का संकल्प लिया। • आप ने देखा कि हाल में अचानक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया जिसमें मोदी सरकार महिला आरक्षण विधेयक लेकर आई। • हमेशा की तरह इस बार भी सरकार ने विपक्ष के साथ कोई संवाद नहीं किया और असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की रणनीति पर ही काम किया। • कांग्रेस और विपक्षी दलों ने खुले दिल से महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। मोदीजी चाहते तो महिला आरक्षण इसी चुनाव से लागू हो सकता था। और OBC महिलाओं को भी स्थान मिल सकता था। ये बिल केवल प्रचार और वोट बैंक के लिए लाया गया है। • सच्चाई यह है कि भारत में महिलाओं को शक्तियां देने का सबसे अधिक काम कांग्रेस ने ही किया है। • राजीवजी के दृष्टिकोण के कारण पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिला। इसी की देन है कि आज दुनिया में सबसे ज़्यादा ELECTED महिलाएं (करीब 14 लाख) भारत में हैं। • ​आज देश भर में लोग यही सोच रहे हैं कि मोदीजी ने ओबीसी महिलाओं को महिला आरक्षण के दायरे में क्यों नहीं रखा? . महिला आरक्षण को उलझाने के लिए इसके साथ जनगणना और परिसीमन की शर्त क्यों रख दी गयी। इसीलिए पता ही नहीं है कि ये हकीकत कब बनेगा। • ​जातिगत जनगणना भी एक अहम सवाल है। कांग्रेस पार्टी लगातार देशव्यापी जाति आधारित जनगणना की मांग उठा रही है। यह अहम मुद्दा है लेकिन इस पर सत्तारूढ दल मौन है। • कल्याणकारी योजनाओं में उचित सहभागिता के लिए ये जरूरी है कि हमारे पास कमजोर तबकों की स्थिति पर सामाजिक-आर्थिक Data हो। • हमारे लिए इन चिंताओं को आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। 2024 में सत्ता में आने पर OBC महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी तय करने के साथ हम महिला आरक्षण तुरंत लागू करेंगे। • अब हमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनावों के लिए प्रभावी रणनीति बनानी है। इन राज्यों में PM/ HM कई महीनों से दौरा कर रहे हैं। झूठ दर झूठ फ़ैला रहे हैं। उनके पास केवल मणिपुर जाने का समय नहीं है। • साथियों, लोक सभा चुनाव भी हमारे सामने खड़े हैं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनावों का ऐलान हो सकता है। • हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में निर्णायक जीत के बाद देश भर में हमारे साथियों में एक नया उत्साह है। हमें अपनी पूरी ताकत लगा कर सभी 5 राज्यों को जीतना है। • पिछले 2 महीनों में मैं कई राज्यों में जनसभाओं में गया और पाया कि अच्छा वातावरण है। हमें प्रत्येक वोटर तक जाना है, प्रचार करना है और माहौल बनाना है। • इन चुनावों में राजनीतिक दलों के नेता ही नहीं, संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी सक्रिय हैं। वे हम लोगों पर सीधे हमले कर रहे हैं। मर्यादाएं टूट रही हैं। ऐसी स्थिति में हम मौन नहीं रह सकते। • जैसे-जैसे हम आम चुनाव के करीब आएंगे, ऐसे हमले और झूठ और तेज़ हो जाएंगे। ऐसे हमलों और दुष्प्रचार का मुकाबला करना और झूठ को तुरंत खारिज करना जरूरी है। • RULING PARTY को आगामी चुनाव में अपनी हालत का अंदाजा हो चुका है, इसीलिए वे लोगों को मुद्दों से भटकाने के लिए झूठ पर झूठ बोल रहे हैं। • तीन बैठकों के बाद INDIA गठबंधन आगे बढ़ रहा है। PM के भाषणों से इस गठबंधन की शक्ति का असर साफ दिख रहा है। • बहुत से बुनियादी सवाल हमारे सामने हैं। कई चिंताओं के बिंदु भी हैं। आज देश में - o कमरतोड़ महंगाई है। o 45 साल की सबसे अधिक बेरोजगारी है। o नयी पेंशन स्कीम को लेकर सरकारी कर्मचारियों में भारी नाराजगी को सरकार नजरंदाज कर रही है। o विभाजनकारी नीतियां देश के लिए चिंताजनक है। o ED/ CBI/ IT जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग विपक्षी दलों और मीडिया के खिलाफ हो रहा है। o मणिपुर की हालत पिछले 5 महीने से चिंताजनक बनी हुई है। विपक्ष की मांग के बाद भी प्रधानमंत्री मणिपुर नहीं गए। • ​मोदी सरकार की नीतियों से अमीर और गरीब की खाई लगातार बढ रही है। हमारे Constitutional Values से लेकर Federal character पर हमला हो रहा है। सामाजिक तनाव पैदा हो रहा है। • राहुलजी लगातार इन मुद्दों को उठा रहे हैं। मैं उनकी सक्रियता और लगातार मेहनत के लिए बधाई देना चाहूंगा। किसानों, मजदूरों, शिल्पकारों, छात्रों, कुलियों और विभिन्न तबकों के बीच वे व्यापक सक्रिय हैं। उनकी मणिपुर और लद्दाख यात्रा का पूरे देश पर असर है। हाल में उनकी पंजाब यात्रा ने एक अलग असर डाला है। • आज लोकतंत्र और संविधान बचाने की चुनौती है। दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को बचाने की चुनौती है। • ऐसे बहुत से सवालों पर हमें मंथन कर कुछ ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है। एक ऐसी सरकार हमें स्थापित करनी है, जो भारत के लोगों के सामने आने वाली इन गंभीर चुनौतियों का समाधान करे। कमजोर तबकों, पिछड़ों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों आदि की जिंदगी को आसान बना सके। • इसके लिए हमें घर-घर हर दरवाजे तक अपनी सरकारों की उपलब्धियों को बताना होगा। अपनी भविष्य की योजना के बारे में भी विस्तार से बताना है। जय हिन्द

Mallikarjun Kharge

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स्मार्ट मीटर का विरोध क्यों ?? किसी भी समाज में जब कोई बदलव होता है तो लोग उसे बहुत ही ज्यादा रेजिस्टेंस के साथ स्वीकार करते हैं, क्योंकि पुराने सिस्टम की आदत कुछ इस कदर लग जाती है की नयी व्यवस्था को अपनाने से हम परहेज करने लगते हैं ..ऐसा ही कुछ इन दिनों गुजरात में बिजली विभाग द्वारा शुरू किये गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर्स के साथ भी होते हुए दिखाई दे रहा है विरोध का कारण ये हैं की स्मार्ट मीटर , रेग्युलर मीटर की तुलना में तेज़ चलता है और बिल दुगुना आ रहा है -- सुनकर क्या लगेगा कि सभी मीटर ख़राब हैं और इन स्मार्ट मीटर्स के आने से पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी .. जिस तरह से लोगों के विरोध की reels वायरल हो रही हैं, पहली नज़र में मुझे भी ऐसा ही लगा.. रीजनल न्यूज़ चैनल्स पर देखा तो उसमे भी ज्यादा बिल आने की कहानियाँ पर खबर के पीछे क्या कारण है ये कोई नहीं दिखा रहा था. इसीलिए मैंने खुद ही पुरे मुद्दे की पड़ताल करने का फैसला किया और सभी पक्षों से बातचीत करके उन्हें वेरिफाई करके जो तथ्य सामने आये उनसे स्पष्ट होता है की स्मार्ट मीटर के तेज़ चलने के बारे में सारा प्रचार भ्रांतियों से भरा हुआ है .. इसलिए तथ्यों को सामने रखना बहुत जरुरी है सबसे पहले ये पता चला की लोगों के मन में शंका ना बढे इसके लिए हर 100 मीटर्स के क्लस्टर में रैंडम बेसिस पर 5 पुराने मीटर्स भी लगे होंगे जो की नए प्री-पेड मीटर्स के साथ भी जुड़े होंगे ताकि रीडिंग्स को कम्पेयर किया जा सके.. (मैं यहाँ पर आज सुबह का ही ये वीडियो भी पोस्ट करूँगा जिसमे रीडिंग्स को कम्पेयर भी किया गया है..नतीजा खुद ही देखिएगा) तो फिर ये भ्रान्ति पैदा कहाँ से हुई की ये मीटर तेज़ चल रहे हैं . इसकी सबसे बड़ी वजह ये है की जिन घरों में भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत नए मीटर लगाए गए हैं वहां उन घर वालों की सुविधा के लिए पुराने मीटर के यूसेज को उसे वक्त सेटल नहि किया गया और घर वालों की जानकारी में लाने के बाद उस यूसेज चार्ज को 180 दिनों में डिवाइड करके नए मीटर के यूसेज के साथ डेली बेसिस पर जोड़ना शुरू किया गया है .. जिससे लोगों को लगता है की 10 दिन में इतना एक्स्ट्रा पैसा कहा से लग गया . इसके अलावा प्री-पेड मीटर्स में ये व्यवस्था की गयी है की ग्राहक को मोबाइल फोन की जी तरह मीटर पहले से ही चार्ज करवाना होगा और यदि उसका उपयोग प्री-पेड एमाउंट से 300 रूपए ज्यादा भी हो जायेगा तब तक उसकी बिजली नहीं कटेगी .. यानी उतना क्रेडिट उसे मिलेगा.. लेकिन उसके बाद बिजली कट जाएगी और रिचार्ज करवाने पर कनेक्शन ऑटोमैटिकली दोबारा शुरू हो जायेगा.. इन्टरेस्टिंगली 300 रुपये माइनस में जाने के बाद भी बिजली विभाग ग्राहक को 5 दिन का ग्रेस पीरियड दे रहा है अगर उसमे भी रिचार्ज नहीं होता है तब बिजली कटेगी.. अब वडोदरा का वो किस्सा ही ले लीजिये जिसमे एक महिला ये कहते हुए दिख रही है की उसका बिल डबल से भी ज्यादा हो गया .. उसकी हकीकत ये है की महिला ने रिचार्ज एमाउंट यूज़ करने के बाद 300 रुपये की लिमिट भी क्रॉस कर लिए 5 दिन का ग्रेस भी बीत गया उसके बाद तीन दिन की छुट्टी आ गयी (रूल्स के अनुसार छुट्टी के दिन भी बिजली नहीं काटी गयी) बाद में जब बिजली कट गयी तब उसने सब-डिवीज़न ऑफिस में जा कर रिचार्ज करवाणा कनेक्शन शुरू हो गया पर उसके 1500 के रिचार्ज में से 300 रुपये का एक्सेस एमाउंट + 8 दिन ( जिसमे लिमिट क्रॉस करने के बावजूद बिजली नहीं काटी गयी) का एक्सेस यूसेज चार्ज तुरंत कट गया .. अब जानकारी के आभाव में उसे लगा उसका बिल ज्यादा आ रहा है .. पर बाद में जब उसे असली वजह के बारे में बताया गया तो उसका कन्फ्यूज़न दूर हो गया पर तन तक खबर इतनी वायरल हो गयी की दूसरे जिलों से भी लोगों को लगने लगा की उनका मीटर भी तेज़ चल रहा है .. This is called fear of unknown और जब भी कोई नया सिस्टम इंट्रोड्यूस होता है उसको लेकर संशय बना रहता है.. मुझे लगता है सरकार को इसके बारे में और ज्यादा अवेयरनेस फ़ैलाने की जरुरत है क्योंकि सिस्टम सचमुच में उपयोगी है क्योंकि 1. इससे बिजली के उपयोग की रियाल टाइम जानकारी हमें मिलेगी .. हम उसे कंट्रोल भी कर पाएंगे 2. ⁠सरकार के लेवल पर डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेस भी कम होंगे 3. ⁠विभाग के हाथ में पैसा होगा तो सर्विसेज़ भी और बेहतर होगी बिहार, आसाम और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में ये सिस्टम सक्सेसफुली इम्प्लीमेंट हुआ है .. नॉएडा की का बड़ी कप्लोनीज़ में ये सिस्टम सक्सेसफुली चल रहा है तो गुजरात में क्यों नहीं .. वैसे बता दूँ की गुजरात के सूरत में इस सिस्टम को सबसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है वहां सबसे पहले ये मीटर GEB की कॉलोनी में ही लगाए गए और बाद में सूरत के पाल इलाके में जहाँ लोग जानकारी को जल्दी स्वीकार कर पाए India TV Bhupendra Patel

Nirnay Kapoor

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नई नई संभोग।। ज़्यादातर पुरुषों के बीच एक बहुत ही आम और पुरानी गलतफहमी है कि बेड में अच्छा होने का सीधा मतलब घंटों तक टिके रहना या हर रोज़ नए और अजीबोगरीब करतब दिखाना है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। विज्ञान, रिसर्च और खुद महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि वे शारीरिक प्रदर्शन से कहीं ज़्यादा एक गहरा कनेक्शन, आपके हुनर और यह महसूस करना चाहती हैं कि आप उन्हें सच में चाहते हैं। जब बात चरम सुख की आती है, तो हेटेरोसेक्सुअल (पुरुष के साथ संबंध बनाने वाली) महिलाओं की संतुष्टि का प्रतिशत केवल 65% है, जबकि पुरुषों का 95%। यह बहुत बड़ा अंतर किसी शारीरिक कमी की वजह से नहीं है, बल्कि तकनीक, फोकस और परवाह की कमी का नतीजा है। आइए विस्तार से जानते कुछ वह बातें जो हर महिला वास्तव में चाहती है। 1️⃣भावनात्मक जुड़ाव किसी भी बेहतरीन शारीरिक अनुभव की शुरुआत दिमाग और दिल से होती है। एक महिला के लिए सिर्फ शरीर का मिलना काफी नहीं है; उसे सुरक्षित और भावनात्मक रूप से वांछित महसूस करने की ज़रूरत होती है। आर्काइव्स ऑफ सेक्सुअल बिहेवियर (Archives of Sexual Behavior) की स्टडीज़ बताती हैं कि चरम सुख की गिनती से कहीं ज़्यादा, भावनात्मक जुड़ाव महिलाओं की सेक्शुअल संतुष्टि को तय करता है। जो महिलाएँ एक मज़बूत और भरोसेमंद रिश्ते में होती हैं, वे कैज़ुअल हुकअप्स के मुकाबले कहीं अधिक संतुष्टि का अनुभव करती हैं। 2024 के डेटा भी यही साबित करते हैं कि अगर वह आपके साथ भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं करती, तो आपकी बेहतरीन तकनीक भी उसे खोखली लगेगी। इसलिए, सबसे पहले दिल से दिल का कनेक्शन बनाएँ, शरीर खुद-ब-खुद जुड़ जाएगा। 2️⃣ फोरप्ले में जल्दबाज़ी न करें! जल्दी शुरू और जल्दी खत्म वाला रवैया महिलाओं के लिए बहुत निराशाजनक होता है। महिलाओं के शरीर को उत्तेजित होने और वार्म-अप होने के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक समय चाहिए होता है। किन्से इंस्टीट्यूट और हालिया सर्वे के अनुसार, फोरप्ले को प्राथमिकता देने से महिलाओं के चरम सुख तक पहुँचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। कई महिलाओं को पूरी तरह से उत्तेजित होने के लिए कम से कम 15 से 20 मिनट या उससे ज़्यादा के फोरप्ले की ज़रूरत होती है। जब आप जल्दबाज़ी करते हैं, तो वह हताश महसूस करती है, जिससे ऑर्गेज़्म गैप और बढ़ जाता है। इसके विपरीत, जब आप धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, तो उसे लगता है कि आप उसकी परवाह करते हैं और केवल अपने मतलब के लिए जल्दी में नहीं हैं। 3️⃣ क्लिटोरल स्टिम्यूलेशन पर पूरा ध्यान! यह एक ऐसा वैज्ञानिक सच है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। ज़्यादातर महिलाएँ सिर्फ पेनिट्रेशन से संतुष्ट नहीं होती हैं। जर्नल ऑफ सेक्स एंड मैरिटल थेरेपी की एक स्टडी के अनुसार, 36% से अधिक महिलाओं को चरम सुख तक पहुँचने के लिए सीधे क्लिटोरल टच की ज़रूरत होती है। केवल 18% महिलाएँ ही ऐसी हैं जो सिर्फ वैजाइनल पेनिट्रेशन से संतुष्ट हो पाती हैं। वहीं लगभग 75% का मानना है कि क्लिटोरल स्टिम्यूलेशन से उनका अनुभव कहीं ज़्यादा बेहतर हो जाता है। 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए सर्वे में यह सामने आया कि लेस्बियन महिलाएँ (86%) इसलिए ज़्यादा ऑर्गेज़्म का अनुभव करती हैं क्योंकि उनका फोकस क्लिटोरिस पर अधिक होता है। सीधे शब्दों में कहें तो, क्लिटोरिस को अनदेखा करना उसकी खुशी को अनदेखा करने के बराबर है। 4️⃣ ओरल सेक्स का सही तरीका और उत्साह! ओरल सेक्स महिलाओं की सबसे बड़ी चाहतों में से एक है, बशर्ते इसे सही तरीके से और पूरे उत्साह के साथ किया जाए। एक बड़े सर्वे में 90.9% महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्हें ओरल सेक्स का आनंद लेना बहुत पसंद है, और 78% ने कभी न कभी इसके ज़रिए ऑर्गेज़्म महसूस किया है। यहाँ सबसे ज़रूरी बात आपका उत्साह है। उसे यह महसूस होना चाहिए कि आप इसे एक काम की तरह नहीं कर रहे हैं, बल्कि आप सच में इसे एन्जॉय कर रहे हैं। औसतन 20 मिनट की अवधि इसके लिए आदर्श मानी जाती है। उंगलियों और जीभ का सही तालमेल 92% महिलाओं को पसंद आता है। 5️⃣खुलकर बातचीत_करना बिस्तर पर खामोशी अक्सर केमिस्ट्री को खत्म कर देती है। आप क्या कर रहे हैं और वह कैसा महसूस कर रही है, इस पर खुलकर बात करना एक औसत अनुभव को शानदार बना सकता है। किन्से-समर्थित स्टडीज़ दिखाती हैं कि सेक्सुअलिटी पर खुलकर बात करना और अपनी पसंद-नापसंद साझा करना ज़्यादा ऑर्गेज़्म रेट से जुड़ा है। यह सोचना कि मैं सब जानता हूँ या उसकी इच्छाओं का सिर्फ अंदाज़ा लगाना अक्सर गलत साबित होता है। इसके बजाय, प्यार से पूछें, तुम्हें यह कैसा लग रहा है? या क्या तुम कुछ और चाहती हो? जब आप उसकी बात ध्यान से सुनते हैं, तो उसे महसूस होता है कि उसकी राय मायने रखती है, जिससे वह ज़्यादा रिलैक्स होकर आपके करीब आती है।
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नई नई संभोग।। ज़्यादातर पुरुषों के बीच एक बहुत ही आम और पुरानी गलतफहमी है कि बेड में अच्छा होने का सीधा मतलब घंटों तक टिके रहना या हर रोज़ नए और अजीबोगरीब करतब दिखाना है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। विज्ञान, रिसर्च और खुद महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि वे शारीरिक प्रदर्शन से कहीं ज़्यादा एक गहरा कनेक्शन, आपके हुनर और यह महसूस करना चाहती हैं कि आप उन्हें सच में चाहते हैं। जब बात चरम सुख की आती है, तो हेटेरोसेक्सुअल (पुरुष के साथ संबंध बनाने वाली) महिलाओं की संतुष्टि का प्रतिशत केवल 65% है, जबकि पुरुषों का 95%। यह बहुत बड़ा अंतर किसी शारीरिक कमी की वजह से नहीं है, बल्कि तकनीक, फोकस और परवाह की कमी का नतीजा है। आइए विस्तार से जानते कुछ वह बातें जो हर महिला वास्तव में चाहती है। 1️⃣भावनात्मक जुड़ाव किसी भी बेहतरीन शारीरिक अनुभव की शुरुआत दिमाग और दिल से होती है। एक महिला के लिए सिर्फ शरीर का मिलना काफी नहीं है; उसे सुरक्षित और भावनात्मक रूप से वांछित महसूस करने की ज़रूरत होती है। आर्काइव्स ऑफ सेक्सुअल बिहेवियर (Archives of Sexual Behavior) की स्टडीज़ बताती हैं कि चरम सुख की गिनती से कहीं ज़्यादा, भावनात्मक जुड़ाव महिलाओं की सेक्शुअल संतुष्टि को तय करता है। जो महिलाएँ एक मज़बूत और भरोसेमंद रिश्ते में होती हैं, वे कैज़ुअल हुकअप्स के मुकाबले कहीं अधिक संतुष्टि का अनुभव करती हैं। 2024 के डेटा भी यही साबित करते हैं कि अगर वह आपके साथ भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं करती, तो आपकी बेहतरीन तकनीक भी उसे खोखली लगेगी। इसलिए, सबसे पहले दिल से दिल का कनेक्शन बनाएँ, शरीर खुद-ब-खुद जुड़ जाएगा। 2️⃣ फोरप्ले में जल्दबाज़ी न करें! जल्दी शुरू और जल्दी खत्म वाला रवैया महिलाओं के लिए बहुत निराशाजनक होता है। महिलाओं के शरीर को उत्तेजित होने और वार्म-अप होने के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक समय चाहिए होता है। किन्से इंस्टीट्यूट और हालिया सर्वे के अनुसार, फोरप्ले को प्राथमिकता देने से महिलाओं के चरम सुख तक पहुँचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। कई महिलाओं को पूरी तरह से उत्तेजित होने के लिए कम से कम 15 से 20 मिनट या उससे ज़्यादा के फोरप्ले की ज़रूरत होती है। जब आप जल्दबाज़ी करते हैं, तो वह हताश महसूस करती है, जिससे ऑर्गेज़्म गैप और बढ़ जाता है। इसके विपरीत, जब आप धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, तो उसे लगता है कि आप उसकी परवाह करते हैं और केवल अपने मतलब के लिए जल्दी में नहीं हैं। 3️⃣ क्लिटोरल स्टिम्यूलेशन पर पूरा ध्यान! यह एक ऐसा वैज्ञानिक सच है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। ज़्यादातर महिलाएँ सिर्फ पेनिट्रेशन से संतुष्ट नहीं होती हैं। जर्नल ऑफ सेक्स एंड मैरिटल थेरेपी की एक स्टडी के अनुसार, 36% से अधिक महिलाओं को चरम सुख तक पहुँचने के लिए सीधे क्लिटोरल टच की ज़रूरत होती है। केवल 18% महिलाएँ ही ऐसी हैं जो सिर्फ वैजाइनल पेनिट्रेशन से संतुष्ट हो पाती हैं। वहीं लगभग 75% का मानना है कि क्लिटोरल स्टिम्यूलेशन से उनका अनुभव कहीं ज़्यादा बेहतर हो जाता है। 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए सर्वे में यह सामने आया कि लेस्बियन महिलाएँ (86%) इसलिए ज़्यादा ऑर्गेज़्म का अनुभव करती हैं क्योंकि उनका फोकस क्लिटोरिस पर अधिक होता है। सीधे शब्दों में कहें तो, क्लिटोरिस को अनदेखा करना उसकी खुशी को अनदेखा करने के बराबर है। 4️⃣ ओरल सेक्स का सही तरीका और उत्साह! ओरल सेक्स महिलाओं की सबसे बड़ी चाहतों में से एक है, बशर्ते इसे सही तरीके से और पूरे उत्साह के साथ किया जाए। एक बड़े सर्वे में 90.9% महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्हें ओरल सेक्स का आनंद लेना बहुत पसंद है, और 78% ने कभी न कभी इसके ज़रिए ऑर्गेज़्म महसूस किया है। यहाँ सबसे ज़रूरी बात आपका उत्साह है। उसे यह महसूस होना चाहिए कि आप इसे एक काम की तरह नहीं कर रहे हैं, बल्कि आप सच में इसे एन्जॉय कर रहे हैं। औसतन 20 मिनट की अवधि इसके लिए आदर्श मानी जाती है। उंगलियों और जीभ का सही तालमेल 92% महिलाओं को पसंद आता है। 5️⃣खुलकर बातचीत_करना बिस्तर पर खामोशी अक्सर केमिस्ट्री को खत्म कर देती है। आप क्या कर रहे हैं और वह कैसा महसूस कर रही है, इस पर खुलकर बात करना एक औसत अनुभव को शानदार बना सकता है। किन्से-समर्थित स्टडीज़ दिखाती हैं कि सेक्सुअलिटी पर खुलकर बात करना और अपनी पसंद-नापसंद साझा करना ज़्यादा ऑर्गेज़्म रेट से जुड़ा है। यह सोचना कि मैं सब जानता हूँ या उसकी इच्छाओं का सिर्फ अंदाज़ा लगाना अक्सर गलत साबित होता है। इसके बजाय, प्यार से पूछें, तुम्हें यह कैसा लग रहा है? या क्या तुम कुछ और चाहती हो? जब आप उसकी बात ध्यान से सुनते हैं, तो उसे महसूस होता है कि उसकी राय मायने रखती है, जिससे वह ज़्यादा रिलैक्स होकर आपके करीब आती है।

तृप्त ...🖤

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#BharatJodoYatra is a People’s Movement, unequalled in history. As the Yatra completes one year today, on behalf of the Indian National Congress, I congratulate Shri Rahul Gandhi, all Bharat Yatris and the lakhs of our citizens who walked and joined in this historic endeavour. From Kanyakumari to Kashmir, Bharat Jodo Yatra covered more than 4000 Kms and carried a message of unity in diversity, with lakhs of people from all walks of life. The trend of manufacturing irrelevant headlines to divert attention from the real issues of people to hide the agenda of hate and division is a systemic attack on our collective conscience. The Yatra seeks to bring real issues of economic inequalities, price rise, unemployment, social injustices, subversion of Constitution, centralisation of power, to the centre stage of people’s imagination. The Yatra continues to fight the menace of hate and hostility in our society through a conversation. The Bharat Jodo Yatra is not just a physical endeavour, it is a sincere effort to rebuild our broken collective conscience. Our ingrained values of Justice, Liberty Equality, and Fraternity, for us, are supreme. The Congress party is continuously reaching out to people in an endeavour to reclaim our Constitution and protect our Democracy. Today, Bharat Jodo Yatra continues...🇮🇳 *** #BharatJodoYatra - एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन है, जो इतिहास में अद्वितीय है। आज यात्रा के एक वर्ष पूरा होने पर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से, मैं श्री Rahul Gandhi, सभी भारत यात्रियों और हमारे लाखों नागरिकों को बधाई देता हूँ जो इस यात्रा में शामिल हुए। कन्याकुमारी से कश्मीर तक, भारत जोड़ो यात्रा ने 4000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ विविधता में एकता के लिए संवाद स्थापित किया। नफ़रत और विभाजन के एजेंडे को छिपाने के लिए, लोगों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए, अप्रासंगिक सुर्खियां बनाने की प्रवृत्ति हमारी सामूहिक चेतना पर एक सोचा-समझा प्रहार है। यात्रा आर्थिक असमानताओं, महँगाई, बेरोज़गारी, सामाजिक अन्याय, संविधान के विध्वंस, सत्ता के केंद्रीकरण के वास्तविक मुद्दों को लोगों की कल्पना के केंद्र में लाने का प्रयास करती है। यह यात्रा लोगों की भागीदारी के माध्यम से हमारे समाज में नफ़रत और शत्रुता के खतरे से लड़ने के लिए जारी है। भारत जोड़ो यात्रा सिर्फ एक भौतिक प्रयास नहीं है, यह हमारी टूटी हुई सामूहिक चेतना को फिर से बनाने का एक ईमानदार प्रयास है। हमारे लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के हमारे संवैधानिक मूल्य सर्वोच्च हैं। कांग्रेस पार्टी, हमारे संविधान की रक्षा और हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा करने के प्रयास में लगातार लोगों तक पहुंच रही है। आज भी, भारत जोड़ो यात्रा जारी है...🇮🇳

Mallikarjun Kharge

176,576 Aufrufe • vor 3 Jahren

भारत के उप राष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। महान विद्वान डॉ. राधाकृष्णन, डॉ शंकर दयाल शर्मा, Justice Hidyatullah, K.R. Narayanan, समेत कई महान लोग इस पद पर रह चुके हैं। 1952 से अब तक किसी उप-राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ संविधान के Article 67 के अंतर्गत Resolution for removal of the Vice-President नहीं लाया गया। क्योंकि वो हमेशा निष्पक्ष, पूरी तरह राजनीति से परे रहे। बाबासाहेब डॉ आंबेडकर जी ने Draft Constitution में Officers of Parliament खंड में पेज नंबर 31 पर साफ लिखा था कि - The Vice President of India shall be ex-officio Chairman of the Council of States. भारत के पहले उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 16 मई 1952 को सांसदों से कहा थाः “मैं किसी भी पार्टी से नहीं हूं और इसका मतलब है कि मैं सदन में हर पार्टी से हूं।” लेकिन हमें अफसोस है कि संविधान के adoption के 75वें साल में Chairman की तरफ़ से हो रहे Biased और Partisan व्यवहार ने विपक्षी पार्टियों को उनके खिलाफ यह प्रस्ताव लाने पर मजबूर किया। पिछले 3 वर्षों में उनका आचरण, उनके पद की गरिमा के विपरीत रहा है। कभी वे सरकार के तारीफ़ में कसीदे पढ़ने लगते है। कभी खुद को RSS का एकलव्य बताने लगते है। इस तरह की बयानबाजी, उनके पद को शोभा नही देती। सभापतिजी सदन के अंदर प्रतिपक्ष के नेताओं को अपने विरोधियों की तरह देखते हैं। Senior-Junior कोई भी हो, दोनों सदनों के विपक्षी नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर उन्हें अपमानित करते हैं। सदन में vast experience वाले कई नेता है। कई दशकों तक मंत्री भी रहे है। उनका 40-40 और 50- 50 वर्षों का legislative अनुभव रहा है। ऐसे नेताओं की भी सभापतिजी headmaster की तरह schooling करते हैं। उनको प्रवचन सुनाते हैं। संसद में विपक्ष की तरफ़ से rules के तहत जो भी महत्त्वपूर्ण विषय उठाये जाते हैं, उन पर Chairman planned तरीके से संवाद, बहस, वाद-विवाद नहीं होने देते। बार-बार विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका जाता है। उनकी निष्ठा संविधान और संवैधानिक परंपराओं की जगह सत्ताधारी दल के लिए है। वे अपनी अगली Promotion के लिए सरकार के spokesperson बन चुके हैं। मुझे यह कहते हुए कोई संकोच नहीं कि the - biggest disruptor in Rajya Sabha is the Chairman himself. सदन अगर disrupt होता है तो उसका सबसे बड़ा कारण चेयरमैन साहब खुद हैं। Normally विपक्ष चेयर से protection मांगता है, वही विपक्ष का संरक्षक होता है। पर अगर खुद सभापति सत्तापक्ष और प्रधानमंत्री का खुला गुण-गान कर रहे हों तो विपक्ष की कौन सुनेगा? इसके लिए तो वही कहावत कही जा सकती है कि “बाड़ ही खेत को खा रही है।" जब भी विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है, तो मंत्रियों के जवाब देने से पहले ही, चेयरमैन खुद सरकार की ढाल बन कर खड़े होते है। उनके आचरण ने देश की गरिमा को बहुत नुकसान पहुंचाया है। देश के संसदीय इतिहास में ऐसी स्थिति ला दी है कि हमें उनके खिलाफ यह Resolution का Notice लाना पड़ा। उनके साथ हमारी कोई निजी दुश्मनी या राजनीतिक लड़ाई नहीं है। देश के नागरिकों को हम विनम्रता से बताना चाहते हैं कि हमने बहुत सोच विचार और मंथन करके देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के इरादे से मजबूरी में यह कदम उठाया है।

Mallikarjun Kharge

55,905 Aufrufe • vor 1 Jahr

▪️अक्टूबर 2024 में हुए हरियाणा चुनाव के बाद महमूद प्राचा ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की ▪️9 दिसंबर को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान एक मतदान केंद्र पर पड़े वोटों से संबंधित वीडियोग्राफी, सुरक्षा कैमरे की फुटेज और दस्तावेजों की प्रतियां वकील महमूद प्राचा को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ▪️लेकिन बजाय पेपर और वीडियो उपलब्ध कराने के, हाई कोर्ट आदेश के कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने शुक्रवार 20 दिसंबर, 2024 को चुनाव संचालन नियम बदल दिए ▪️चुनाव आचरण नियम 93(2)(ए) बदलने के बाद चुनाव संबंधी सभी दस्तावेज अब जनता की पहुंच से बाहर हो गए, अब पूरी जानकारी नहीं उपलब्ध होगी ▪️केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने परिवर्तन को अधिसूचित कर दिया है जो चुनाव आयोग के परामर्श से बना है. मतलब अब कोई भी व्यक्ति चुनाव संबंधी किसी भी कागजात का निरीक्षण नहीं कर सकेगा ▪️अदालतें भी अब चुनाव आयोग को जनता को चुनाव संबंधी सभी कागजात उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दे सकती हैं ▪️ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी चुनाव आयोग ने महमूद प्राचा की याचिका का विरोध किया था. चुनाव आयोग ने कहा था कि महमूद प्राचा अक्टूबर में हुए हरियाणा में विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए वह चुनाव से संबंधित दस्तावेज नहीं मांग सकते ▪️प्राचा ने उच्च न्यायालय में कहा कि एक उम्मीदवार को दस्तावेज़ निःशुल्क दिए जायें और किसी भी अन्य व्यक्ति को एक निर्धारित शुल्क पर दिए जाने चाहिए ▪️इस तर्क को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग को छह सप्ताह के अंदर फॉर्म 17C, भाग 1 और भाग 2 सहित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था 🔺🔺सरकार के चुनाव आयोग के साथ मिलकर इस एकतरफा निर्णय ने बहुत सारे सवाल उठा दिए हैं 👉 आख़िर चुनाव आयोग को पारदर्शिता से क्या परहेज़ है 👉 लोकतंत्र में अगर जनता से ही चुनावी दस्तावेज छिपाये जायेंगे तो लोकतंत्र का मतलब क्या है 👉 आख़िर क्या छिपाना चाहता है चुनाव आयोग? क्यों नहीं दस्तावेज आम लोगों को मिल सकते 👉 ऐसे वक्त पर जब चुनाव आयोग की साख दांव पर लगी हुई है, यह करके उसको और मटियामेट क्यों करना है 👉 क्या यह निर्णय राजनैतिक दलों से विचार विमर्श करके उनको विश्वास में लेकर नहीं लिया जा सकता था 👉 चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप है, वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने से लोगों के मन में संशय है, पक्षपात के गंभीर आरोप हैं और अब यह करके सरकार और आयोग ने हिंदुस्तान के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों पर एक और प्रश्नचिन्ह लगा दिया है याद रखिएगा - जो गुप्त और गोपनीय रखा जाता है अक्सर वो ग़लत होता है Sunlight is the best disinfectant. पारदर्शिता प्रजातंत्र की पहली शर्त है. सरकार और चुनाव आयोग उसके दमन पर क्यों आमादा है?

Supriya Shrinate

77,823 Aufrufe • vor 1 Jahr

Youth are not only the Agents of Change, they are also the Greatest Beneficiaries of Change. 🇮🇳 A strong democracy is built not only on the courage to raise our voice, but also on the dignity of the words we choose. हाल के दिनों में कुछ ऐसे videos सामने आए, जिनमें कुछ युवा जिस तरह की abusive, derogatory and disrespectful language का प्रयोग करते दिखे, उसने मन को सचमुच विचलित किया। यह केवल भाषा का प्रश्न नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल है— हम अपने बच्चों को कैसी parenting, mentoring और value system दे रहे हैं? क्या अपशब्दों का सहज प्रयोग अब सामान्य होता जा रहा है? अगर हाँ, तो यह हम सभी के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। असहमति लोकतंत्र की शक्ति है, लेकिन अभद्रता कभी उसकी पहचान नहीं हो सकती। विचारों में मतभेद भी हो सकते हैं, लेकिन शब्दों में संयम, संवाद में शालीनता और व्यवहार में मर्यादा हमेशा बनी रहनी चाहिए। एक माँ होने के नाते मैं इतना अवश्य कहना चाहूँगी— हम अपने बच्चों को अपनी आवाज़ बुलंद करना सिखायें , लेकिन यह भी सिखायें कि शब्दों की गरिमा कभी न खोएँ। क्योंकि व्यक्तित्व की पहचान केवल विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है। Let us empower our youth to speak with courage, compassion and civility. 🙏🏻🌱 Disagreement strengthens democracy. Respectful dialogue sustains it. 🤝 जय हिन्द 🇮🇳

Sonal Goel IAS 🇮🇳

20,239 Aufrufe • vor 2 Monaten