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The information shared in the Census is kept completely confidential. It is never used for any investigation or tax purposes. Choose trust over rumours. Participate in the Census. Our Census, our development. जनगणना में दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहती है। इसे किसी भी जांच या टैक्स के...

11,758 views • 3 months ago •via X (Twitter)

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राहुल गांधी जी ने कल सभी को कांग्रेस पार्टी के सामाजिक न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण के एजेंडा से अवगत कराया है। हमारी तीन मांग थी 👇 • जातिगत जनगणना • आरक्षण में 50% सीमा ख़त्म की जाए • अनुच्छेद 15(5) को लागू किया जाए 24 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और उस बैठक के बाद एक प्रेस नोट निकाला गया जो कि PIB वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इसमें लिखा था कि- The Union Cabinet chaired by Prime Minister Shri Narendra Modi has approved the proposal for conducting the Census of India 2021 at a cost of ₹8,254 crores. It includes three components: house listing, housing census, and population enumeration. यही तीन बातें इस प्रेस रिलीज में शामिल हैं और इसमें कहीं भी जाति शब्द का जिक्र नहीं है, लेकिन कल अप्रत्याशित तरीक़े से यह बताया गया कि जनगणना में जातिगत जनगणना भी शामिल होगी। : कांग्रेस महासचिव (संचार) श्री Jairam Ramesh

Congress

14,290 views • 1 year ago

इससे गिरा हुआ और क्या काम होगा कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को बहाना बनाकर देश का विभाजन करना चाहती है, संघीय ढांचे और संविधान पर प्रहार करना चाहती है? 🔺30 महीने पहले जब सितंबर 2023 में नरेंद्र मोदी की सरकार महिला आरक्षण बिल सदन में लाई थी तो सबने एक स्वर से समर्थन किया था. लेकिन यह भी कहा था कि इसमें परिसीमन, Census जैसी शर्तें मत डालिए. हमने कहा था तुरंत महिला आरक्षण दीजिए, जिससे 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाएं चुनकर सदन में आयें. लेकिन तब सरकार ने विपक्ष के सुझाव की अनदेखी की थी 🔺अगर हमारा सुझाव माना गया होता तो ना सिर्फ लोकसभा में बल्कि महाराष्ट्र, हरियाणा, बंगाल, केरलम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम ,ओडिशा, आंध्र प्रदेश - जहां-जहां विधानसभा चुनाव हुए हैं - वहां पर आज महिलाओं की अच्छी खासी संख्या होती और आधी आबादी का बढ़िया representation हो रहा होता 🔺लेकिन BJP का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है. 1989 में जब पंचायती राज में महिलाओं के आरक्षण के लिए पहली बार राजीव गांधी जी संसद में बिल लाए तो उसके खिलाफ BJP के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, राम जेठमलानी और जसवंत सिंह ने वोट किया 🔺लेकिन उसके बाद 73rd और 74th संवैधानिक संशोधन करके कांग्रेस की सरकार ने पंचायती राज में महिलाओं का एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया और आज हमारे पंचायतों में 15 लाख निर्वाचित महिला सदस्य हैं 🔺BJP बार बार यह सवाल पूछती है आपने 2010 में क्यों नहीं कर लिया? हमने बहुत कोशिश की, हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे. अगर हमारे पास पूर्ण बहुमत होता तो हम 2010 में यह काम बिल्कुल कर लेते. लेकिन हमारे पास absolute majority नहीं थी, हमारी घातक दल की सरकार थी. लेकिन BJP के पास 2014 और 2019 में प्रचंड बहुमत था, आपने तब महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू किया? इसका 2019, 2024 लोक सभा चुनावों के साथ सभी राज्य की सदनों को फ़ायदा मिला होता - कितनी सारी महिलायें निर्वाचित हो पातीं 🔺इसीलिए आप महिलाओं के पीछे छिपकर इस देश का विभाजन मत कीजिए ▪️अब असल मुद्दे की बात करते हैं क्योंकि महिला आरक्षण मुद्दा नहीं है - उस को हथियार मत बनाइए. इस देश की आधी आबादी आपकी सारी कुटिलता, आपकी सारी शकुनि चाल समझती है ▪️सरकार का असल मंसूबा परिसीमन - delimitation है ▪️सरकार बिल लाकर Articles 55, 81, 82, 170, 330, 332, 334A का संशोधन करना चाहती है ▪️अब परिसीमन कब होगा और कौन सी जनगणना का इस्तेमाल होगा इसका फैसला संविधान नहीं बल्कि सदन में एक साधारण से बहुमत से तय हो जाएगा ▪️इसी के चलते 2011 के Census को इस्तेमाल करने की बात हो रही है. 2011 के जनगणना के आंकड़े अब बहुत बदल चुके हैं. 2011 के Census के आंकड़ों के चलते आज 10 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा का फायदा नहीं मिल रहा है ▪️2011 के आंकड़े पर SC, ST और महिला सीट किस आधार पर निर्धारित हो पाएंगी ▪️यह परिसीमन पूरे देश में आशंका का माहौल बना रहा है. दक्षिण के सारे प्रदेशों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिससे उनकी आवाज़ और मुद्दे दब जायेंगे ▪️543 की लोकसभा में दक्षिण के राज्यों का proportionate representation 24.3% है जो कि 850 की लोकसभा में घटकर 20.7% रह जाएगा ▪️जबकि 5 उत्तर के राज्यों का प्रतिनिधित्व 37% से बढ़कर 43% हो जाएगा. इसी के चलते दक्षिण भारत के राज्य आक्रोशित हैं, वहां पर लोगों के बीच नाराज़गी है ▪️BJP ने परिसीमन पर अपना चेहरा और अपनी मंशा असम और जम्मू कश्मीर में दिखा दी है. जहाँ पर किसी क्षेत्र में 8 लाख तो कहीं 25 लाख तक वोटर हैं, कहीं एक एक लोक सभा में 6 तो कहीं 12 विधान सभाएं हैं. सारी क़वायद काट-छाँट करके अपने हिसाब से क्षेत्र बनाने की है - जो अब BJP पूरे देश में करना चाहती है 🔹मोदी सरकार जाति जनगणना से भी मुँह मोड़ रही है. RSS और BJP हमेशा से जाति जनगणना के खिलाफ थे. वो तो राहुल गांधी के चलते उन्हें एक साल पहले जाति जनगणना को मानना पड़ा 🔹 जब जाति जनगणना हो रही है आंकड़ें 2027 में आ जाएँगे - तो बिना उसका संज्ञान लिए परिसीमन क्यों किया जा रहा है? 🔹जाति जनगणना होगा तो पता चलेगा कि देश में SC, ST, OBC की कितनी आबादी है. जैसा कि तेलंगाना के और बिहार के caste survey में पता चला 👉इसीलिए हमारी माँग है कि OBC महिलाओं के लिए महिला सीटों आरक्षण सुनिश्चित किया जाये 👉इतने बड़े क़ानून से पहले देश भर में आम राय तो बनाना दूर, सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक तक नहीं बुलाई 👉मोदी सरकार की यह शकुनि चाल है, जो महिला आरक्षण के पीछे छिपकर राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार, संघीय ढांचे पर प्रहार, और संविधान पर हमला करने की एक नापाक कोशिश है 👉लेकिन मोदी जी महिलाओं को मूर्ख समझने की गलती कर बैठे हैं

Supriya Shrinate

28,499 views • 4 months ago

PhysicsWallah maintains a zero-tolerance policy toward any form of discriminatory or insensitive language. We are deeply concerned by the recent remarks made by a faculty member, which represent a grave violation of our core values and institutional code of conduct. ​Taking this matter with the utmost seriousness, the faculty member has been suspended with immediate effect pending a thorough investigation by a senior disciplinary committee. ​We offer an unconditional apology to the community. We remain committed to ensuring our platform is a space of dignity and respect for every student. The concerned educator has also tendered an unconditional apology and requested us to share the same. फिज़िक्सवाला किसी भी तरह की असंवेदनशील या भेदभावपूर्ण भाषा के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी रखता है। हाल ही में एक लाइव क्लास के दौरान एक फैकल्टी द्वारा की गई टिप्पणियाँ हमारे मूल्यों और नियमों का गंभीर उल्लंघन हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, संबंधित फैकल्टी को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। इस पर वरिष्ठ अनुशासन समिति द्वारा जांच की जा रही है। हम इस घटना के लिए सभी से माफी मांगते हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से कोशिश करेंगे कि हमारा प्लेटफ़ॉर्म हर छात्र के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित बना रहे। संबंधित शिक्षक ने भी माफी मांगी है और हमें इसे साझा करने का अनुरोध किया है।

Physics Wallah (PW)

222,065 views • 4 months ago

Rahul Gandhi is at it again, recycling a Chinese narrative, dressing it up as breaking news, and then accusing the Indian government of hiding it. There is no “slow encroachment” by China in Arunachal Pradesh as he alleges. China has claimed Arunachal, calling it “South Tibet”, for decades. In the 1960 border talks, it sought around 69,000 sq km of Arunachal Pradesh. The Longju issue is not new either. In 1959, China attacked an Assam Rifles post there and captured the area. During the 1962 war, Chinese forces launched major operations across the Kameng, Subansiri, Siyom, Siang and Lohit valleys, before withdrawing north of the LAC after the ceasefire. India today is far better prepared. Improved infrastructure has strengthened patrolling and surveillance, while the Army and ITBP remain geared up to monitor and check Chinese activity. On an undemarcated border, patrol face-offs can occur. Established mechanisms and protocols exist to resolve them. And Rahul Gandhi is lying about Galwan too. He keeps weaponising the Prime Minister’s “not an inch” remark while conveniently ignoring that the then Army Chief, General M.M. Naravane, is on record saying that “not an inch” of territory was lost in the Galwan clash. Rahul Gandhi knows, or should know, all this. Instead, he takes an unsubstantiated claim, presents it as established fact, attacks India’s security establishment and accuses the government of suppressing the “news”. This is not national security scrutiny. It is furthering a Chinese narrative for domestic political propaganda. And he is doing it again. —— /// —— राहुल गांधी एक बार फिर चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। अरुणाचल प्रदेश में चीन के किसी “धीरे-धीरे कब्ज़ा करने” की बात कहना तथ्यहीन है। चीन दशकों से अरुणाचल प्रदेश को “South Tibet” बताकर उस पर दावा करता आया है। 1960 की सीमा वार्ताओं में भी उसने लगभग 69,000 वर्ग किमी क्षेत्र पर दावा किया था। लॉन्गजू का मामला भी नया नहीं है। 1959 में चीन ने वहां असम राइफल्स की चौकी पर हमला कर उसे कब्जे में लिया था। 1962 के युद्ध में कामेंग, सुबनसिरी, सियांग और लोहित घाटियों में चीनी सेना ने बड़े सैन्य अभियान चलाए, लेकिन युद्धविराम के बाद PLA LAC के उत्तर में लौट गई। आज भारत की स्थिति अलग है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ने सीमा पर पेट्रोलिंग और निगरानी क्षमता को मजबूत किया है। भारतीय सेना और ITBP चीनी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। सीमा का पूरी तरह सीमांकन न होने के कारण कभी-कभी पेट्रोलिंग के दौरान आमना-सामना हो सकता है। ऐसे मामलों के समाधान के लिए स्थापित प्रोटोकॉल और तंत्र मौजूद हैं। और गलवान पर भी राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं। वे बार-बार प्रधानमंत्री के “एक इंच जमीन नहीं गई” वाले बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, लेकिन यह बताना भूल जाते हैं कि तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे भी रिकॉर्ड पर कह चुके हैं कि गलवान में एक इंच जमीन नहीं खोई गई। राहुल गांधी को यह सब पता है, या पता होना चाहिए। फिर भी वे बिना किसी ठोस विवरण के एक दावा उठाते हैं, उसे तथ्य की तरह पेश करते हैं, देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं और सरकार पर “खबर दबाने” का आरोप लगाते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाना नहीं है। यह घरेलू राजनीति के लिए चीन के नैरेटिव को आगे बढ़ाना है। और राहुल गांधी यह काम बार-बार कर रहे हैं।

Amit Malviya

18,336 views • 3 days ago

बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन के मैनिफेस्टो तथा श्री राहुल गाँधी जी द्वारा जातिगत जनगणना के लिए किए प्रयासों पर मीडिया से बातचीत : तेजस्वी जी, दोनों मिल के कर रहे हैं, कल भी शायद जाएंगे वो कल भी है, इस प्रकार से अभियान शुरू हो चुका है, वैसे जब हम ने तेजस्वी का नाम घोषित किया था, तमाम राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर के जो महागठबंधन में हैं और तब से ही एक प्रकार से अभियान शुरू हो गया था उस दिन से, और तेजस्वी जी भी बराबर दौरे कर रहे हैं, हमारी पार्टी के जो नेता लोग हैं तमाम लगे हुए हैं, ऑब्जर्वर भी अच्छा काम कर रहे हैं और दूसरा जो है राहुल गांधी जी की जो यात्रा शुरू हुई थी 16 दिन की उसके बाद में जो टेंपो बना, एक नैरेटिव क्रिएट हो गया कि भई इस प्रकार का 20 साल हो गए उनको सरकार में बीस साल हो गए और नीतीश कुमार जी ने कई पार्टियां बदलते गए, एलायंस करते गए, बनते बिगड़ते गए, उससे उनकी छवि भी अच्छी नहीं रही खराब, कहां तो वो प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे और कहां आज उनको बीजेपी वाले भी नहीं पूछ रहे हैं पूरी तरह से, बीजेपी चाहे वो अमित शाह जी हो चाहे कोई नेता हो कई तरह की बातें करते हैं कि हम तो चुनाव के बाद में देखेंगे कौन मुख्यमंत्री बनेगा,तो कहां तो पीएम बन रहे थे और कहां मुख्यमंत्री बनेंगे कि नहीं बनेंगे ये स्थिति बन गई, ठीक है न, उन स्थितियों में चुनाव हो रहा है, एक बात है कि इस बार धनबल का बहुत बड़ा खजाना इक्कठा हो गया है, लूट लिया है इन लोगों ने, इलेक्टोरल बांड के माध्यम से भी, वैसे भी, कोई कमी नहीं है पैसे की, वो प्रयोग देखा हम ने इनका महाराष्ट्र के अंदर, कोई कल्पना नहीं कर सकता जो पैसा बंटा वहां पर और चुनाव कैसे जीत गए एकतरफा ये पूरे देश को आश्चर्य हुआ, हार जीत की अलग बात है, पार्लियामेंट में हम लोग जीते थे और तीन चार महीने बाद में जो वहां पर सफाया हुआ सब पार्टियों का ये तो पूरे देश के लोगों को विश्वास नहीं हुआ, पूरे देश के लोगों को, हरियाणा के अंदर माइक्रो मैनेजमेंट कर लिया हम लोगों ने , चलो भई मान लेते हैं कुछ किया होगा,बराबरी पर आ गए लगभग प्वाइंटों में फर्क था पर महाराष्ट्र की तो हार जीत एक अजीबा है, मतलब एक प्रकार से रहस्य बना हुआ है तो ये जो राहुल जी का अभियान शुरू पहले ही हो गया टाइमली और मैं समझता हूं कि बिहार लोग पॉलिटिकली बहुत समझदार होते हैं, शुरू से ही मान्यता पूरे देश के लोगों की है कि बिहार में पॉलिटिकल सोच होती है अलग उनकी, उम्मीद करते हैं कि वहां बैकवर्ड भी हैं EBC वाले भी हैं, EBC का घोषणा पत्र एक प्रकार से राहुल जी ने वहां पर जारी करवाया है और जो कुछ जातिगत जनगणना की बात पहले बिहार ने करी थी, राहुल गांधी जी ने दबाव दिया सरकार पर पूरे देश के अंदर लागू होनी चाहिए, मना करते गए बीजेपी वाले पर आखिर में उनको मानना पड़ा, कैबिनेट का निर्णय हुआ दिल्ली के अंदर हम जातिगत जनगणना कराएंगे,ये राहुल जी की बहुत बड़ी विजय है। ये भी बिहारवासियों को मालूम है कि राहुल गांधी के कारण से पूरे मुल्क में जातिगत जनगणना अब प्रॉपर होगी, क्योंकि उनकी जातिगत जनगणना हुई थी बिहार की,उसको तो चैलेंज कर दिया सुप्रीम कोर्ट के अंदर, निर्णय हाईकोर्ट के सुप्रीम कोर्ट के आते गए वो लागू नहीं कर पा रहे थे और सरकार डबल इंजन की है तब भी ये सब चलता रहा, अब तो राहुल जी के दबाव से जो मोदी जी की गवर्नमेंट ने जो फैसला किया कि हम करवाएंगे बहुत बड़ी विजय उनकी है, सब जातियां उम्मीद कर रही थीं कि एक बार 1931 में हुई थी ये, 31 के बाद में कभी नहीं हुई, अब कम से कम एक आ गया मामला, मालूम पड़ेगा भई कौन जाति के कितने लोग हैं, तो जो स्कीमें बनेगी भारत सरकार की विभागों की या राज्यों की, तो एक साइंटिफिक वे से बन पाएगी तो एक अच्छा फैसला हो गया। ये तमाम बातें आपको मैं इसलिए बोल रहा हूं कि बिहार के चुनाव में एजेंडा के अंदर नैरेटिव के लिए ये काम आ रही हैं, लोगों में ये डिस्कशन होता है गांव गांव में और कस्बों के अंदर शहरों के अंदर। मैनिफेस्टो आया परसों, 28 को,कल ही , मैनिफेस्टो भी जो है पच्चीस लाख का बीमा उन्होंने कर दिया जो अपने यहां पर था, सबसे पॉपुलर स्कीम राजस्थान की ये रही है कि हर घर में इलाज फ्री हो गया, दवाइयां फ्री टेस्ट फ्री और ऑपरेशन फ्री ये बहुत बड़ा निर्णय किया बिहार के मैनिफेस्टो में महागठबंधन ने किया है, तो मैं समझता हूं कि एक मैसेज गया है, फिर जो और भी जो बिजली को लेकर पानी को लेके नौकरी को लेके, जो वादे किए गए मैनिफेस्टो में एक 35 साल का नौजवान जो है जिस प्रकार राहुल गांधी जी के साथ में दौरे किए वहां पर और अब जो है राहुल जी के दौरे के बाद में उसने जिस प्रकार से मैनिफेस्टो में अपनी भागीदारी निभाई भी है, राहुल गांधी की जो भावना थी पब्लिक क्या सोचती है उसके अकॉर्डिंग टू आप ये मैनिफेस्टो बनाओ, पब्लिक को पूछ के बनाओ, वो स्थिति बन चुकी है उसी में ये मैनिफेस्टो वहां पर बना है और उसका बड़ा इंपैक्ट रहेगा, तमाम स्कीमों का और तेजस्वी जी का मैंने कल सुना मैनिफेस्टो के बारे में भी डिस्कशन में देखा मैंने कि उनको पूरी, दो बार डिप्टी सीएम रहे हैं ,पूरी नॉलेज है उनको स्टेट की तमाम आंकड़े उनके सामने हैं साथ में हैं और वो मैं समझता हूं कि मजबूती के साथ में ये चुनाव जो है दंगल क्योंकि किसी ने ठीक कहा है कि ये तो चुनाव होता है लोकतंत्र के अंदर और ये युद्ध होता है तो चुनाव में लोकतंत्र में नॉन वॉयलेंस होता है, डेमोक्रेसी है कोई जीतो कोई हारो, और जो दंगल होता है संघर्ष होता है वहां क्या होता है वॉयलेंस होती है। युद्ध किधर लड़ रहे हैं, क्योंकि इनका विश्वास है ही नहीं डेमोक्रेसी के अंदर। युद्ध की तरह येन केन प्रकारेण साम दाम दंड भेद उसके माध्यम से चुनाव कहीं जीते हैं, ये उनकी थ्योरी है पूरे देश के अंदर, धर्म के नाम पर और कर दिया, हिंदू धर्म हिंदू धर्म, क्या बाकी लोग हिंदू धर्म के लोग नहीं हैं क्या ? आंकड़े बताते हैं कि कोई एक, ये जो इनकी पर्सेंटेज आ रही है वोटों की, चालीस से नीचे आ रही है, सौ वोट पड़ते हैं पोलिंग,उसका एक बार इकतीस परसेंट आ गया, एक बार छत्तीस परसेंट आ गया एक बार सैंतीस परसेंट आ गया, ऐसे ही तो आ रहे हैं, इसका मतलब सत्तर परसेंट लगभग तो लोग खिलाफ वोट दे रहे हैं इनके, पर किस बात का घमंड कर रहे हैं ये लोग ? ये चाहिए डेमोक्रेसी, संविधान की जो मूल भावना है उसके अनुसार चलें और जो हालात बन गए हैं देश में अहम् घमंड के कारण से, लोग बहुत चिंतित हैं, लोग जेलों में जा रहे हैं बिचारे , आलोचना करना तो देशद्रोही हो गया है यहां पर देश के अंदर, जबकि डेमोक्रेसी का तो मुख्य भाग है नॉन वॉयलेंस और सबको साथ में लेकर चलने वाली बात है, आलोचना को सुनने का माद्दा होना चाहिए, वो इनमें नहीं है। ये तमाम बातें जो हैं ये बिहार चुनाव में नैरेटिव बनेगा हमारा ये मैं कह सकता हूं। महागठबंधन को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में : मैंने कहा न आपको कि इस बार चुनाव जीतना हमारे लिए बहुत जरूरी नहीं है, देश के लिए जरूरी है और ये चुनाव खाली बिहार का नहीं हो रहा है एक प्रकार से देश में मैसेज देने का चुनाव है कि हरियाणा के अंदर क्या हुआ, दिल्ली के क्या हुआ और महाराष्ट्र में क्या हुआ और इनको घमंड आ गया तो घमंड अगर रहता है, अहम् घमंड रहता है तो डेमोक्रेसी के अंदर वो उचित नहीं है, मैं मानता हूं अब इनको बीस साल के बाद में बदलाव चाहिए बिहार को, बदलाव होना चाहिए और पूरी ताकत लगाएगी महागठबंधन, तमाम हमारे महागठबंधन के पार्टनर हैं सब एकजुट हैं, लगे हुए हैं और हम लोग कामयाब हो जाएंगे। फसल खराबे का मुआवजा न मिलने के मुद्दे पर प्रश्न का उत्तर : क्या करें इनका, मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिए, बार बार याद दिला रहे हैं इन लोगों को हम लोग, 22- 23 का मुआवजा नहीं मिला है भरतपुर के लोग भी आते हैं, जोधपुर डिविजन के लोग आते हैं कि वहां भी 23 का मुआवजा नहीं मिल रहा है किसानों को,आज 25 चल रहा है तो आप कल्पना कीजिए कि, अब फिर बरसात हो गई है तो नुकसान क्यों हो रहा है इनको, अर्जेंटली गिरदावरी करा के, आउट ऑफ वे बात करके, आउट ऑफ बॉक्स बात करके इनको चाहिए कि मुआवजे का प्रबंधन करें और मुआवजा फसलों का दें, किसान अगली फसल कैसे बोएगा ? उनके पास तो इतने ही साधन होते हैं, क्योंकि जो मोदी जी ने कहा था डबल इनकम कर देंगे वो तो अब नाम ले नहीं रहे हैं, न डबल इनकम हुई है, डबल इनकम हुई नहीं है तो ये बेचारे परेशान हैं लोग, उनको चाहिए कि ये किस प्रकार से टाइमली मुआवजा दें ये मेरी मांग है।

Ashok Gehlot

13,175 views • 9 months ago

For months, my mother, sister and I have been expressing that we are under threat. We have consistently requested lawfulness and protection. We recently filed a complaint at Safdarjung Police Station seeking registration of an FIR. The night before my mother’s scheduled court hearing at MP MLA Court Rouse Avenue, our car and front gate were set on fire in Green Park. CCTV footage shows an unidentified man outside our gate handling a pistol, attempting to climb over and ultimately burning our swift car and gate. We are three women alone in this house, and these attacks cannot be ignored. I appeal for urgent attention from the authorities. Our safety should not be negotiable. Delhi Police CP Delhi #DilKiPolice DCP South Delhi DCP West Delhi पिछले कई महीनों से, और सच कहूँ तो पिछले कई सालों से, मैं सोशल मीडिया पर लगातार लिखती आ रही हूँ कि मेरी माँ, मेरी बहन और मैं ख़तरे में हैं। हमने हमेशा कानून के रास्ते पर चलकर सुरक्षा और न्याय माँगा है। पुलिस से मदद भी माँगी, शिकायतें भी कीं…कभी मिश्रित प्रतिक्रिया मिली, कभी बस आश्वासन। हाल ही में हमने सफ़दरजंग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दी। लेकिन मेरी माँ की MP–MLA कोर्ट, राउस एवेन्यू में सुनवाई से एक रात पहले, हमारे घर ग्रीन पार्क के बाहर हमारी कार और मुख्य गेट को आग लगा दी गई। CCTV फ़ुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति को हमारे गेट के बाहर हथियार जैसा कुछ पकड़े, गेट पार करने की कोशिश करते हुए और अंत में हमारी स्विफ्ट कार व गेट को जलाते हुए देखा जा सकता है। हम इस घर में तीन अकेली महिलाएँ हैं। इस तरह के हमले नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते। सालों का यह डर, यह दहशत…अब भी उम्मीद बस इतनी है कि न्याय मिलेगा और हमें जीने की मूलभूत सुरक्षा मिलेगी। मैं संबंधित अधिकारियों से तुरंत ध्यान देने की अपील करती हूँ। हमारी सुरक्षा कोई सौदा नहीं है, यह हमारा अधिकार है। CCTV footage is attached here.

Raghavi Kumari

65,794 views • 7 months ago

झारखंड के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति सामने आई है, जहाँ कानून की रक्षा करने वाली व्यवस्था स्वयं गंभीर सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है। धनबाद क्षेत्र के एक कुख्यात अपराधी द्वारा कथित रूप से विदेश से जारी वीडियो ने प्रशासनिक तंत्र और माफिया गठजोड़ को लेकर कई गंभीर आरोपों को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है। यह मामला केवल एक व्यक्ति के बयान तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है। मुख्यमंत्री Hemant Soren जी, क्या राज्य का प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के प्रभाव में काम कर रहा है? वीडियो में धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) पर लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। आरोपों के अनुसार - • गरीब और कमजोर लोगों को निशाना बनाकर उनकी जमीनों पर कब्ज़ा कराने का प्रयास हो रहा है। • माइनिंग माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गठजोड़ की आशंका व्यक्त की गई है। • वर्दी और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल भय और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। यदि इन आरोपों में तनिक भी सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गहरा संकट है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, उनके विरुद्ध निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ क्यों सौंपी जा रही हैं? इससे जनता के बीच यह संदेश जाता है कि सत्ता और प्रभाव के आगे न्याय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। एक जिम्मेदार नागरिक और विपक्ष की भूमिका निभाते हुए हमने संयम बरता है। समाज में भय और अराजकता का माहौल न बने, इसलिए वीडियो का केवल संपादित अंश ही सार्वजनिक कर रहा हूँ। हेमंत सोरेन जी, सोशल मीडिया पर वायरल ये पूरा वीडियो मैं आपको व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध करा दूंगा ताकि आप ये न कह सकें कि आपको जानकारी ही नहीं थी या फिर आपके मातहत काम करने वाले लोगों ने इसके बारे में आपको जानकारी ही नहीं दी। हमारी स्पष्ट मांग है कि- 1. संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए। 2. पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। 3. माइनिंग माफिया, भूमि कब्ज़ा और प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े सभी आरोपों की न्यायिक निगरानी में जांच हो। 4. दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। झारखंड की जनता यह देख रही है कि सरकार कानून के शासन के साथ खड़ी है या माफिया तंत्र के दबाव में काम कर रही है। लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास बनाए रखना है। अब निर्णय सरकार के हाथ में है न्याय और पारदर्शिता का रास्ता चुना जाएगा या फिर आरोपों और अविश्वास के इस माहौल को और गहरा होने दिया जाएगा। Narendra Modi Amit Shah PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India ED Central Bureau of Investigation (India) Income Tax India ANI Press Trust of India IANS ANI_HindiNews BJP BJP JHARKHAND

Babulal Marandi

15,602 views • 3 months ago

I want to say this is not reform. It is retaliation in the guise of reform. Retaliation meticulously scripted, strategically timed, and constitutionally questionable. The Waqf Amendment Act is not an exercise in efficiency as it pretends to be. It is an exercise in erasure. Behind the bland language of governance lies the bold ambition of control. Religious autonomy is being reduced to state-administered protocol. And community rights are being redrawn with bureaucratic pens. This is not about improving institutions but about infiltrating, controlling, and closing them. सरकार जिसे सुधार बता रही है, दरअसल वह अधिकारों पर प्रहार है। वक्फ़ अधिनियम प्रशासनिक कदम नहीं है, यह एक मूल वैचारिक हमला है। इसे पढ़िए और समझिए। कानून सुधार की भाषा में यह अधिनियम पूरी तरह से 100% नियंत्रण की नीति लाने का प्रयास करता है। यह न सिर्फ़ धार्मिक संस्थाओं पर चोट करता है बल्कि अल्पसंख्यकों के आत्म निर्णय, स्वायत्तता की भावना को कुचलता है। ये सत्ता की दखलंदाजी को सुशासन कहकर पेश करता है। लेकिन कांग्रेस पार्टी चुप नहीं रहेगी, वह सड़क से लेकर संसद तक इस अधिनियम का विरोध करेगी। वक्फ़ अधिनियम एक लक्षित अतिक्रमण है। यह अधिनियम प्रशासनिक कार्यकुशलता के नाम पर स्थापित न्यायिक सिद्धांतों को कुचलता है। हमारे मानवाधिकार के पार्ट-3 में दो अनुच्छेद बेहद जरूरी हैं। इनमें 25, 26 विशेष हैं। 26 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हर व्यक्ति को पूरा अधिकार है कि वह अपने धर्म का अभ्यास, निर्वहन और उसका प्रचार-प्रसार कर सकता है। वह धर्म से जुड़ी संस्थाओं को चलाने, उनका प्रबंधन देखने और उनके चुनावों में नामित हो सकता है। कोई ये नहीं कह रहा कि इन अधिकारों की कोई सीमा नहीं है। इसी के तहत संविधान में इसकी सीमा भी लिखी गई है और वे सीमाएं- पब्लिक ऑर्डर, सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता हैं। आप देखेंगे तो इनका वक्फ़ अधिनियम से कोई संबंध नहीं है। इसमें कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जो सार्वजनिक क़ानूनी व्यवस्था को बचाने के लिए किया गया हो, स्वास्थ्य और सार्वजनिक नैतिकता के लिए किया गया हो। 50-60 के दशक में पांच खंडपीठ का एक निर्णय दिया गया, जिसमें कहा गया कि किसी रूप में किसी ऐसे वर्ग की संस्थाओं की स्वायत्तताओं को हटाएंगे, उनके ऊपर नियंत्रण इतना करेंगे कि उनकी स्वायत्तता ख़त्म हो जाए- तो वह असंवैधानिक है। At a political level, you cannot amputate Article 26 and call it administrative efficiency. You cannot call it an Amendment Act where this is in fact an assault—on identity, autonomy and constitutional values. A board with a token Muslim representation is another form of appropriation. It's not about minorities called Muslims—it's about a message that minority institutions are fair game for state takeover. : Abhishek Singhvi ji

Congress

34,594 views • 1 year ago

#BharatJodoYatra is a People’s Movement, unequalled in history. As the Yatra completes one year today, on behalf of the Indian National Congress, I congratulate Shri Rahul Gandhi, all Bharat Yatris and the lakhs of our citizens who walked and joined in this historic endeavour. From Kanyakumari to Kashmir, Bharat Jodo Yatra covered more than 4000 Kms and carried a message of unity in diversity, with lakhs of people from all walks of life. The trend of manufacturing irrelevant headlines to divert attention from the real issues of people to hide the agenda of hate and division is a systemic attack on our collective conscience. The Yatra seeks to bring real issues of economic inequalities, price rise, unemployment, social injustices, subversion of Constitution, centralisation of power, to the centre stage of people’s imagination. The Yatra continues to fight the menace of hate and hostility in our society through a conversation. The Bharat Jodo Yatra is not just a physical endeavour, it is a sincere effort to rebuild our broken collective conscience. Our ingrained values of Justice, Liberty Equality, and Fraternity, for us, are supreme. The Congress party is continuously reaching out to people in an endeavour to reclaim our Constitution and protect our Democracy. Today, Bharat Jodo Yatra continues...🇮🇳 *** #BharatJodoYatra - एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन है, जो इतिहास में अद्वितीय है। आज यात्रा के एक वर्ष पूरा होने पर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से, मैं श्री Rahul Gandhi, सभी भारत यात्रियों और हमारे लाखों नागरिकों को बधाई देता हूँ जो इस यात्रा में शामिल हुए। कन्याकुमारी से कश्मीर तक, भारत जोड़ो यात्रा ने 4000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ विविधता में एकता के लिए संवाद स्थापित किया। नफ़रत और विभाजन के एजेंडे को छिपाने के लिए, लोगों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए, अप्रासंगिक सुर्खियां बनाने की प्रवृत्ति हमारी सामूहिक चेतना पर एक सोचा-समझा प्रहार है। यात्रा आर्थिक असमानताओं, महँगाई, बेरोज़गारी, सामाजिक अन्याय, संविधान के विध्वंस, सत्ता के केंद्रीकरण के वास्तविक मुद्दों को लोगों की कल्पना के केंद्र में लाने का प्रयास करती है। यह यात्रा लोगों की भागीदारी के माध्यम से हमारे समाज में नफ़रत और शत्रुता के खतरे से लड़ने के लिए जारी है। भारत जोड़ो यात्रा सिर्फ एक भौतिक प्रयास नहीं है, यह हमारी टूटी हुई सामूहिक चेतना को फिर से बनाने का एक ईमानदार प्रयास है। हमारे लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के हमारे संवैधानिक मूल्य सर्वोच्च हैं। कांग्रेस पार्टी, हमारे संविधान की रक्षा और हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा करने के प्रयास में लगातार लोगों तक पहुंच रही है। आज भी, भारत जोड़ो यात्रा जारी है...🇮🇳

Mallikarjun Kharge

176,576 views • 2 years ago

भारत के उप राष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। महान विद्वान डॉ. राधाकृष्णन, डॉ शंकर दयाल शर्मा, Justice Hidyatullah, K.R. Narayanan, समेत कई महान लोग इस पद पर रह चुके हैं। 1952 से अब तक किसी उप-राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ संविधान के Article 67 के अंतर्गत Resolution for removal of the Vice-President नहीं लाया गया। क्योंकि वो हमेशा निष्पक्ष, पूरी तरह राजनीति से परे रहे। बाबासाहेब डॉ आंबेडकर जी ने Draft Constitution में Officers of Parliament खंड में पेज नंबर 31 पर साफ लिखा था कि - The Vice President of India shall be ex-officio Chairman of the Council of States. भारत के पहले उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 16 मई 1952 को सांसदों से कहा थाः “मैं किसी भी पार्टी से नहीं हूं और इसका मतलब है कि मैं सदन में हर पार्टी से हूं।” लेकिन हमें अफसोस है कि संविधान के adoption के 75वें साल में Chairman की तरफ़ से हो रहे Biased और Partisan व्यवहार ने विपक्षी पार्टियों को उनके खिलाफ यह प्रस्ताव लाने पर मजबूर किया। पिछले 3 वर्षों में उनका आचरण, उनके पद की गरिमा के विपरीत रहा है। कभी वे सरकार के तारीफ़ में कसीदे पढ़ने लगते है। कभी खुद को RSS का एकलव्य बताने लगते है। इस तरह की बयानबाजी, उनके पद को शोभा नही देती। सभापतिजी सदन के अंदर प्रतिपक्ष के नेताओं को अपने विरोधियों की तरह देखते हैं। Senior-Junior कोई भी हो, दोनों सदनों के विपक्षी नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर उन्हें अपमानित करते हैं। सदन में vast experience वाले कई नेता है। कई दशकों तक मंत्री भी रहे है। उनका 40-40 और 50- 50 वर्षों का legislative अनुभव रहा है। ऐसे नेताओं की भी सभापतिजी headmaster की तरह schooling करते हैं। उनको प्रवचन सुनाते हैं। संसद में विपक्ष की तरफ़ से rules के तहत जो भी महत्त्वपूर्ण विषय उठाये जाते हैं, उन पर Chairman planned तरीके से संवाद, बहस, वाद-विवाद नहीं होने देते। बार-बार विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका जाता है। उनकी निष्ठा संविधान और संवैधानिक परंपराओं की जगह सत्ताधारी दल के लिए है। वे अपनी अगली Promotion के लिए सरकार के spokesperson बन चुके हैं। मुझे यह कहते हुए कोई संकोच नहीं कि the - biggest disruptor in Rajya Sabha is the Chairman himself. सदन अगर disrupt होता है तो उसका सबसे बड़ा कारण चेयरमैन साहब खुद हैं। Normally विपक्ष चेयर से protection मांगता है, वही विपक्ष का संरक्षक होता है। पर अगर खुद सभापति सत्तापक्ष और प्रधानमंत्री का खुला गुण-गान कर रहे हों तो विपक्ष की कौन सुनेगा? इसके लिए तो वही कहावत कही जा सकती है कि “बाड़ ही खेत को खा रही है।" जब भी विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है, तो मंत्रियों के जवाब देने से पहले ही, चेयरमैन खुद सरकार की ढाल बन कर खड़े होते है। उनके आचरण ने देश की गरिमा को बहुत नुकसान पहुंचाया है। देश के संसदीय इतिहास में ऐसी स्थिति ला दी है कि हमें उनके खिलाफ यह Resolution का Notice लाना पड़ा। उनके साथ हमारी कोई निजी दुश्मनी या राजनीतिक लड़ाई नहीं है। देश के नागरिकों को हम विनम्रता से बताना चाहते हैं कि हमने बहुत सोच विचार और मंथन करके देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के इरादे से मजबूरी में यह कदम उठाया है।

Mallikarjun Kharge

55,905 views • 1 year ago

Operation Rohit Keyur - Honeypot Creator आज जो में खुलासा करने जा रहा हू, वो देख कर, कई लोगों के भ्रम टूट जायेंगे और जिस प्रकार ZiaulHaque वाले मामले मे (1 दिन baad) मेने आपको य़ह verify भी कराया था कि जो premium group का प्रचार ZiaulHaque के Offcial group से हुआ था, उस ही प्रकार से में इस मामले मे भी यह सुनिश्चित करवा दूँगा की Rohit keyur का Premium Group उसके official group से linked है, तो आप मुझसे से ये बात तो बोलना ही मत की मेने कोई फर्जी group join कर लिया होगा बहरहाल, वापस लौटते है Rohit के Premium group पर.. मेरी नजर पिछले कई महीनों से इनके Premium Group पर थी, Rohit अपनी community को हमेशा बोलते है कि इनका Premium group बिल्कुल मुफ्त है, लेकिन इसका access वो हर किसी को नहीं देते हैं, वो हर थोड़े दिन बाद Premium group का लिंक Main group पर डालते है और फिर Delete कर देते है, Premium Group की entry को ऐसे Present किया जाता है जेसे किसी रहस्यमय गुफा का दरवाजा.. जो सिर्फ थोड़े समय के लिए दिखाई पड़ता है और फिर आँखों के आगे से गायब.. जिन लोगों ने कल सुबह और दोपहर में Rohit Keyur का account telegram group check किया, उन्होंने इस Premium group के link के दर्शन भी किए होंगे अब इस Premium group में जो कुछ भी हो रहा है वो कोई अनुभवी तो तुरंत समझ जाएगा लेकिन जो बाजार में नए है वो मुर्गे और बकरे की तरह कट जायेंगे और दुःख की बात है कि कई कट भी रहे हैं Rohit Keyur लगभग हर हफ्ते Pump Announcement करते हैं, जिसमें वो य़ह announce करते है कि वो किसी 1 नए token को 400% 500% से लेकर 1000% 2000% pump करेंगे जिसका advertising message कुछ इस प्रकार होता होता है... 👇 🟢3 HOURS BEFORE OUR PUMP!🚀 We are already getting ready to this Sunday pump! Make sure you got BNB on your MetaMask or TrustWallet! Be prepared guys and remember: the faster you buy, the best percent of profit you will get! 🗓 Date: AUGUST , 20th ⏰ Time: 16:00 GMT 💶 Pair: BNB/??? 💹 Exchange: Pancakeswap Slippage 49% 📈Real opportunity to make a great return on your investments in ONE DAY! अब जिन्हें समझना था वो समझ गए और जिन्हें समझ नहीं आया उन्हें में समझा देता हूं.. दरअसल ये Honeypot Trap है, इसमें आप पेसा सिर्फ पेसा डाल सकते हो निकाल नहीं सकते, और इस 49% Slippage का अर्थ है कि आपके खरीदते समय 49% transaction fees में कट जायेंगे, लेकिन यहां बेचने का Slippage बताया नहीं गया है.. जो कि 90% से 99% है, याने आपके हाथ बेचते समय कुछ नहीं आएगा.. य़ह tokens कुछ विशेष wallets से launch किए जा रहे हैं, जो आपस में linked है, लगभग हर हफ्ते ये चल रहा है आवश्यकता है ED और CBI जेसी संस्थानों को investigation करके इस पूरे मामले को उजागर करने की... मेने अभी कुल राशि का आकलन नहीं किया है, इसलिए में अभी राशि का खुलासा नहीं करूंगा में आपको नीचे video और Screenshots share कर रहा हू वो आप देख लीजिए.. और साथ ही वो Contract Address जिस पर कल वाला token launch हुआ था.. 0x90f7d6dbA813F26e096E88b6486f304cfAC1E803

Vikram Soni

12,518 views • 3 years ago

आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया। रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है। हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा। हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया। इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है। कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।” यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी। यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है? हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है? यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है। यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे। #JantarMantar #StudentVoices #Delhi #NEET Press Trust of India ANI IANS The Wire The Indian Express ravish kumar Prakash Raj Cockroaches of India Congress BJP Delhi Congress Delhi Police Yogendra Yadav Abhijeet Dipke Saurav Das Srinivas BV Uday Bhanu Chib

Avani Bansal

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