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“जीवन जो शेष है, वही विशेष है.!"
213,011 views • 9 days ago •via X (Twitter)
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बिल्कुल सही

चौरासी लाख योनियों से होकर गुजरने वाली जीवन यात्रा....प्रत्येक योनि में चेतना का एक नया आयाम जुड़ना—जलचर से अस्तित्व, वनस्पति से संवेदना, कीट-पतंगों से भय, पक्षियों से स्वतंत्रता, और पशुओं से स्नेह एवं स्मृति—और अंततः मनुष्य योनि में आकर आत्मचिंतन (Self-Reflection) की क्षमता का विकसित होना, वास्तव में जीवन की इस विशाल यात्रा को एक विशेष अर्थ देता है।जब हम यह समझते हैं कि हमारी चेतना और एक चींटी की चेतना मूलतः एक ही तत्व है, तो शरीर या रूप का अहंकार व्यर्थ लगने लगता है।यह दृष्टिकोण जीव मात्र के प्रति दया और जुड़ाव की भावना जगाता है, क्योंकि हर छोटा-बड़ा जीव उसी विकास यात्रा का हिस्सा है।केवल शारीरिक सुखों या प्रदर्शन में इसे बिता देना इसके मूल अवसर को खो देने जैसा है। "मैं कौन हूँ?" यह प्रश्न पूछने और स्वयं को जानने की क्षमता ही मनुष्य होने की सबसे बड़ी सार्थकता है।

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Nashedi ganjedi gang 🤣

ज़िन्दगी भर लोगो के जीवन को दुष्कर बनाकर ऐसे ही समय को विशेष बनाया जाता है अंत में.

उम्रदराज लोग मस्ती कर रहें हैं, सही बात है, करनी भी चाहिए. बस video मत बनाए, या फिर कम से कम सोशल मीडिया पर अपलोड ना करें, देखने में बकवास लगता है 😐

2-3 budhe ludak jayenge aise naachte naachte 😁 Ask them to sit down 🤣

महफ़िल में इतने साँप हैं, किस-किस से बचकर चलें, चेहरे तो सब अपने हैं, किस-किस को अपना समझें।

